do not make these 7 big mistakes in 2026 while filing ITR otherwise there will be delay in refund danger of notice too ITR भरते समय 2026 में न करें ये 7 बड़ी गलतियां, वरना रिफंड आने में होगी देरी, नोटिस के भी खतरे, Business Hindi News - Hindustan
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ITR भरते समय 2026 में न करें ये 7 बड़ी गलतियां, वरना रिफंड आने में होगी देरी, नोटिस के भी खतरे

ITR Filing 2026: असेसमेंट ईयर 2026-27  के लिए ITR भरते समय सबसे आम और खतरनाक गलतियां कौन सी हैं, जिनसे बचना जरूरी है। इसका जवाब काफी काम का निकला। आइए समझते हैं ताकि आप बिना किसी परेशानी के सही तरीके से रिटर्न दाखिल कर सकें।

Thu, 4 June 2026 11:27 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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ITR भरते समय 2026 में न करें ये 7 बड़ी गलतियां, वरना रिफंड आने में होगी देरी, नोटिस के भी खतरे

ITR Filing 2026: हर साल की तरह इस बार भी करोड़ों लोग इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की तैयारी में हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फॉर्म चुनने से लेकर बैंक डिटेल भरने तक की छोटी-छोटी चूक आपका रिफंड अटका सकती है, नोटिस आने की वजह बन सकती है या रिटर्न ही खारिज हो सकता है?

अब आयकर विभाग पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम पर काम करता है। आपके रिटर्न का मिलान AIS , फॉर्म 26AS, TDS रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी से अपने आप होता है। इसलिए अब पहले से कहीं ज्यादा सटीकता जरूरी है।

रिटर्न भरते वक्त 2026 में न करें ये 7 गलतियां

1. गलत ITR फॉर्म का चुनाव करना

यह सबसे आम और बड़ी गलती है। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न को डिफेक्टिव मानकर नोटिस भेज दिया जाता है और प्रोसेसिंग रुक जाती है। अगर आपने शेयर या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन कमाया है तो ITR-1 न भरें। विदेशी संपत्ति, एक से ज्यादा मकान या बिजनेस इनकम होने पर भी ITR-1 का इस्तेमाल न करें।

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2. AIS, फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 का मिलान न करना

अधिकतर नौकरीपेशा लोग सिर्फ कंपनी से मिले फॉर्म 16 के भरोसे रिटर्न भर देते हैं, लेकिन वे बैंक एफडी और बचत खाते के ब्याज, डिविडेंड, कैपिटल गेन्स आदि की जानकारी अपडेट करना भूल जाते हैं। यही बेमेल जानकारी रिटर्न के रिव्यू में जाने का सबसे बड़ा कारण है।

3. टैक्स डेटा अपडेट होने से पहले ही रिटर्न भर देना

खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए जरूरी सलाह है कि जब तक फॉर्म 16 जारी न हो जाए, AIS पूरी तरह अपडेट न हो जाए और फॉर्म 26AS में TDS की सही एंट्री न दिखने लगे, तब तक रिटर्न फाइल करने की जल्दबाजी न करें। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, जून के मध्य तक इंतजार करना बेहतर रहता है, ताकि डेटा पूरी तरह अपडेट हो चुका हो और बाद में संशोधित रिटर्न न भरना पड़े।

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4. बैंक डिपॉजिट, डिविडेंड और अतिरिक्त आय को भूल जाना

अक्सर लोग ये दिखाना भूल जाते हैं…

· एफडी और बचत खाते पर ब्याज

· शेयरों से मिलने वाला लाभांश (डिविडेंड)

· फ्रीलांसिंग या प्राइवेट कंसल्टिंग से हुई कमाई

· मकान किराये से आय

याद रखें, बैंक और वित्तीय संस्थाएं ये सारी जानकारी सीधे आयकर विभाग को भेज चुकी होती हैं।

5. बिना पात्रता के कटौती का दावा करना

कुछ सामान्य गलतियां जैसे, धारा 80सी के तहत जरूरत से ज्यादा कटौती दिखाना, · सेक्शन 80डी में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की गलत जानकारी भरना, जो कटौती कंपनी पहले ही फॉर्म 16 में शामिल कर चुकी है, उसे दोबारा दावे में डाल देना आदि। ऐसी गलतियों पर बाद में टैक्स डिमांड का नोटिस आ सकता है।

6. TDS क्रेडिट का गलत दावा करना

केवल उतना ही TDS क्लेम करें जितना फॉर्म 26AS या टैक्स स्टेटमेंट में सही-सही दिख रहा हो। जरूरत से ज्यादा TDS क्रेडिट दिखाना रिफंड अटकने और विभागीय पूछताछ की बहुत बड़ी वजह है।

7. पर्सनल डिटेल्स में गड़बड़ी

पैन नंबर, जन्मतिथि, पता, ईमेल और मोबाइल नंबर जैसी छोटी-सी गलती से प्रोसेसिंग में दिक्कत आ सकती है और हो सकता है आयकर विभाग की अहम सूचना आप तक पहुंचे ही न।

ऐसी गलतियां जो सीधे आपका रिफंड रोक सकती हैं

अगर आप जल्दी रिफंड पाने की उम्मीद कर रहे हैं तो इन गलतियों से बिल्कुल बचें।

गलत या बंद बैंक खाता: रिफंड सीधे बैंक खाते में आता है। खाता नंबर या IFSC कोड गलत होने, खाता बंद होने या पहले से वैलिडेटेड न होने पर रिफंड फेल हो सकता है या देरी से आता है।

AIS/फॉर्म 26AS से बेमेल जानकारी: अगर आपकी बताई आय या TDS सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती तो रिटर्न अतिरिक्त जांच में डाल दिया जाएगा।

TDS का गलत क्लेम: जो TDS विभाग के पास रिकॉर्ड में ही नहीं है, उसे दावे में डालने पर प्रोसेसिंग अटक जाती है।

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ई-वेरिफिकेशन न करना: रिटर्न सबमिट करने के बाद तय समय में ई-वेरिफाई करना जरूरी है। ऐसा न करने पर रिटर्न को दाखिल ही नहीं माना जाएगा।

पुराने नोटिस या बकाया टैक्स को नजरअंदाज करना: अगर पिछले सालों का कोई टैक्स बकाया है या कोई अनसुलझा नोटिस लंबित है, तो चालू वर्ष का रिफंड तब तक रोका जा सकता है जब तक मामला सुलट न जाए।

पैन-आधार लिंक की समस्या: अगर आधार से लिंक न होने की वजह से पैन निष्क्रिय (Inoperative) हो गया है तो रिफंड पर सीधा असर पड़ सकता है।

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