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सैलरी के अलावा अगर अन्य इनकम है तो भरें ITR-2, न करें ये 7 गलतियां वरना…

ITR Filing 2026: ITR-2 फॉर्म के जरिए आप दूसरे स्रोतों से होने वाली इनकम भी दिखा सकते हैं, जैसे लॉटरी, घुड़दौड़ या कानूनी जुए से जीती गई रकम और 5,000 रुपये से अधिक की कृषि आय। समझें स्टेप बाय स्टेप गाइड, लास्ट डेट और जरूरी नियम

Wed, 27 May 2026 12:01 PMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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सैलरी के अलावा अगर अन्य इनकम है तो भरें ITR-2, न करें ये 7 गलतियां वरना…

ITR Filing 2026: असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आयकर विभाग ने ITR-2 फॉर्म की ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी आज यानी 27 मई से एक्टिव कर दी है। अब वे टैक्सपेयर्स, जिनकी इनकम केवल सैलरी तक सीमित नहीं है, अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना शुरू कर सकते हैं। ई-फाइलिंग पोर्टल पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। टैक्सपेयर्स एक्सेल यूटिलिटी डाउनलोड करके भी रिटर्न तैयार कर सकते हैं।

ITR की लास्ट डेट कब है

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ITR भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026 है। वहीं, टैक्स ईयर 2026-27 के रिटर्न के लिए डेडलाइन 31 जुलाई, 2027 तय की गई है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगर आपकी कुल सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है, तो रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है, लेकिन 12 लाख रुपये सैलरी वालों को ITR जरूर भरना होगा, फायदे की बात यह है कि न्यू टैक्स रिजीम के तहत बढ़ी हुई सेक्शन 87A छूट की मदद से ऐसे लोगों को एक भी रुपया टैक्स नहीं देना पड़ेगा।

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किसे भरना होता है ITR-2 और क्यों है जरूरी

चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) संतोष मिश्रा के अनुसार, ITR-2 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए बना है, जिनके पास बिजनेस या प्रोफेशन की आमदनी तो नहीं है, लेकिन आय का जरिया थोड़ा जटिल है। इसमें सैलरी और पेंशन के साथ-साथ एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली कमाई और शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन जैसी चीजें आती हैं।

कुल आमदनी 50 लाख रुपये से ज्यादा तो भरे ITR-2

जिनकी कुल आमदनी 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें भी ITR-2 भरना जरूरी है, क्योंकि वे सिंपल फॉर्म ITR-1 का इस्तेमाल नहीं कर सकते। ठीक ऐसे ही नॉन-रेजिडेंट और रेजिडेंट बट नॉट ऑर्डिनरी रेजिडेंट यानी RNOR स्टेटस वाले लोगों को भी ITR-2 या ITR-3 जैसे फॉर्म का ही सहारा लेना होता है।

इन चीजों से हुई है कमाई तो भरें ITR-2

सीए अभिनंदन पांडे ने बताया कि इस फॉर्म के जरिए आप दूसरे स्रोतों से होने वाली इनकम भी दिखा सकते हैं, जैसे लॉटरी, घुड़दौड़ या कानूनी जुए से जीती गई रकम और 5,000 रुपये से अधिक की कृषि आय। एक और अहम बात, अगर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं या आपने अनलिस्टेड इक्विटी शेयरों में निवेश किया हुआ है, तो आय का स्तर चाहे जो भी हो, आपको अनिवार्य रूप से ITR-2 ही भरना होगा।

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ITR-2 भरते समय सबसे ज्यादा होने वाली गलतियां और उनसे बचने के आसान तरीके

सीए अजय बगड़िया बताते हैं कि ITR-2 फाइल करना अक्सर थोड़ा पेचीदा होता है और करदाताओं से रेजिडेंशियल स्टेटस, कैपिटल गेन रिपोर्टिंग और विदेशी संपत्तियों के खुलासे जैसी जगहों पर बार-बार गलतियां हो जाती हैं। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की गलत पहचान करना या शेड्यूल 112A में सही तरीके से पूरी डिटेल न देना एक आम भूल है।

इसी तरह, रेजिडेंट टैक्सपेयर्स अक्सर विदेश में रखी संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी शेड्यूल FA में देना भूल जाते हैं, जो बाद में परेशानी खड़ी कर सकती है। रेजिडेंट, नॉन-रेजिडेंट या RNOR जैसे रेजिडेंशियल स्टेटस को गलत चुन लेने से टैक्स कैलकुलेशन गड़बड़ा जाती है और फॉरेन टैक्स क्रेडिट के लिए जरूरी फॉर्म 67 जमा करने जैसी जरूरी चीजें छूट जाती हैं।

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अचल संपत्ति, बैंक बैलेंस, शेयर, ज्वैलरी और गाड़ी जैसी संपत्तियों की रिपोर्टिंग में भी अक्सर गलतियां देखी जाती हैं। टैक्सपेयर्स को चाहिए कि वे फॉर्म 26AS और एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS से हर एंट्री का मिलान जरूर करें, ताकि आय कम या ज्यादा रिपोर्ट न हो। सोनी के मुताबिक, एक और बड़ी गलती है पिछले साल के नुकसान को आगे ले जाने और सेट ऑफ करने में कोताही बरतना।

शेड्यूल CFL और शेड्यूल BFLA को सही तरीके से न भरना, या कैपिटल लॉस को आगे बढ़ाने के लिए तय समयसीमा के भीतर रिटर्न फाइल न करना, भविष्य की टैक्स बचत पर भारी पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर साल के दौरान नौकरी या शहर बदला है तो पता और एम्प्लॉयर की जानकारी अपडेट करना बिल्कुल न भूलें।

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