CCI dismisses anti competition allegations in SECI solar tender clears Adani Group check detail टेंडर में अडानी समूह पर नियम तोड़ने के लगे थे आरोप, अब CCI ने सुना दिया फैसला, Business Hindi News - Hindustan
More

टेंडर में अडानी समूह पर नियम तोड़ने के लगे थे आरोप, अब CCI ने सुना दिया फैसला

गौतम अडानी समूह से जुड़ी एक अहम खबर है। दरअसल, सीसीआई ने अपने आदेश में कहा कि देश का बिजली उत्पादन बाजार कई बड़ी सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों से मिलकर बना है और अडानी समूह प्रथम दृष्टया इस बाजार में प्रभुत्वशाली नहीं लगता है।

Thu, 16 April 2026 11:52 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share
टेंडर में अडानी समूह पर नियम तोड़ने के लगे थे आरोप, अब CCI ने सुना दिया फैसला

गौतम अडानी समूह के लिए एक अहम खबर है। दरअसल, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गुरुवार को अडानी समूह की कंपनियों, एज्योर पावर और अन्य के खिलाफ एक सोलर एनर्जी टेंडर में कथित तौर पर प्रतिस्पर्धा-रोधी आचरण से जुड़ी शिकायत खारिज कर दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी ग्रीन एनर्जी फोर लिमिटेड, गौतम अडानी, सागर अडानी, एज्योर पावर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) एवं कई अन्य इकाइयों ने प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन किया है। सीसीआई ने अपने आदेश में कहा कि देश का बिजली उत्पादन बाजार कई बड़ी सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों से मिलकर बना है और अडानी समूह प्रथम दृष्टया इस बाजार में प्रभुत्वशाली नहीं लगता है।

क्या कहा सीसीआई ने?

सीसीआई ने आदेश में कहा- भारत के बिजली उत्पादन बाजार में एनटीपीसी, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, टाटा पावर, टोरेंट पावर और रिलायंस पावर जैसी कई महत्वपूर्ण कंपनियां मौजूद हैं। ऐसे में प्रथम दृष्टया यह नहीं लगता है कि अडानी समूह इस बाजार में प्रभुत्वशाली स्थिति में है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:5% डीए बढ़ाने का ऐलान, एरियर भी मिलेगा... इन कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी

प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा कि क्रॉस-सब्सिडी, प्रतिस्पर्धा को बाहर करने और बाजार में प्रवेश बाधाओं से जुड़े आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं दिए गए। शिकायत में 'ग्रीन शू ऑप्शन' (निविदा में तय मात्रा से अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का विकल्प), शुल्क दरों में संशोधन और अन्य शर्तों को छोटी कंपनियों को बाहर करने वाला तरीका बताया गया था।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:812 फ्लैट बनाने के लिए लैम्बोर्गिनी से डील, कर्ज भी कम, अब डिमांड में आया शेयर

नहीं मिले ठोस सबूत

इसके साथ ही सीसीआई ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देकर सेकी को बिजली बिक्री समझौते करने में सक्षम बनाने और फिर अडानी ग्रीन एनर्जी फोर को सेकी के साथ बिजली खरीद समझौते करने की अनुमति मिलने जैसे आरोप भी प्रतिस्पर्धा कानून की धारा 4 के तहत स्थिति के गलत इस्तेमाल की श्रेणी में नहीं आते हैं। विशिष्ट शर्तों से जुड़े आरोपों पर आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दे सका कि टेंडर दस्तावेज इस तरह तैयार किए गए थे जिससे केवल बड़ी कंपनियों को ही फायदा मिले।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मुकेश अंबानी की इस कंपनी का बढ़ा घाटा, सुस्त पड़ा है शेयर, ₹15 से नीचे भाव

आदेश के मुताबिक, किसी भी टेंडर का स्ट्रक्चर खरीदार की जरूरतों के हिसाब से बनाया जाता है। इसी आधार पर आयोग ने कहा कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा तीन (प्रतिस्पर्धा-रोधी समझौते) और धारा चार के उल्लंघन का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता, इसलिए इसकी जांच करने की जरूरत नहीं है। सीसीआई ने कहा कि इस मामले को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 26(2) के तहत तुरंत प्रभाव से बंद किया जाता है।

जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,