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मार्केट में आएगा घरों और मंदिरों में रखा सोना? सरकार बदल सकती है पूरा सिस्टम, ‘बुलियन बैंक’ मॉडल ने बढ़ाई धड़कन

भारत के प्रमुख ज्वेलर्स संगठन AIJGF ने सरकार को ‘बुलियन बैंक’ यानी गोल्ड बैंकिंग सिस्टम शुरू करने का सुझाव दिया है। इस मॉडल के जरिए घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में पड़े निष्क्रिय सोने को वित्तीय व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। इससे सोने के आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी। 

Tue, 19 May 2026 12:40 PMSarveshwar Pathak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मार्केट में आएगा घरों और मंदिरों में रखा सोना? सरकार बदल सकती है पूरा सिस्टम, ‘बुलियन बैंक’ मॉडल ने बढ़ाई धड़कन

भारत में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं बल्कि भावनाओं, परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, हर मौके पर सोने की खरीदारी होती है। लेकिन, यही सोना अब देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव भी बना रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है और हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ सोना खरीदने में खर्च हो जाता है। इसी बढ़ती चिंता के बीच अब देश के सबसे बड़े ज्वेलर्स संगठन ने सरकार के सामने एक बड़ा ‘बुलियन बैंक’ यानी गोल्ड बैंक बनाने का सुझाव रखा है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

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ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (All India Jewellers & Goldsmith Federation) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भेजे गए प्रस्ताव में कहा है कि भारत को सोने की डिमांड कम करने की बजाय देश में पहले से मौजूद निष्क्रिय सोने का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। संगठन का मानना है कि भारतीय घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में लाखों टन सोना पड़ा हुआ है, जो आर्थिक रूप से सक्रिय नहीं है। अगर इसे एक रेगुलेटेड सिस्टम के जरिए बाजार में लाया जाए, तो भारत को हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करने की जरूरत कम पड़ सकती है।

प्रस्तावित ‘बुलियन बैंक’ मॉडल के तहत लोग अपने घरों या संस्थानों में रखा सोना बैंकिंग सिस्टम में जमा कर सकेंगे। इसके बदले उन्हें ब्याज या अन्य वित्तीय लाभ मिल सकते हैं। वहीं ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और एक्सपोर्टर्स इस सोने को उधार लेकर अपने कारोबार में इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे नए सोने के आयात की जरूरत घटेगी और देश का विदेशी मुद्रा भंडार बच सकेगा।

AIJGF का कहना है कि भारत में बड़ी मात्रा में सोना निष्क्रिय पड़ा है, जिसे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। खासतौर पर मंदिरों और बड़े निवेशकों के पास रखा सोना अगर औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल हो जाए, तो यह देश के लिए एक बड़ा आर्थिक संसाधन बन सकता है। संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि गोल्ड ETFs को अपने फिजिकल गोल्ड का कुछ हिस्सा कंट्रोल तरीके से उधार देने की अनुमति दी जाए, ताकि घरेलू बाजार में लिक्विडिटी बढ़ सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत में बुलियन बैंकिंग सिस्टम लागू होता है, तो इससे ज्वेलरी इंडस्ट्री को भी फायदा मिलेगा। ज्वेलर्स को आसानी से घरेलू सोना उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उनकी लागत कम हो सकती है। इसके अलावा गोल्ड सप्लाई चेन भी ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बनेगी।

हालांकि, इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा। लोगों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि भारतीय परिवार पारंपरिक रूप से अपना सोना घर में सुरक्षित रखना पसंद करते हैं। इसके अलावा सरकार को एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भी तैयार करना होगा, ताकि जमा किए गए सोने की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

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फिलहाल, सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट और विदेशी मुद्रा पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में 'बुलियन बैंक' भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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