युद्ध के 80 दिन बाद ईरान ने खोला बाजार, तेल और शेयर बाजार में आ सकता है भूचाल? इस टेंशन में दुनिया भर के निवेशक
करीब 80 दिनों तक बंद रहने के बाद ईरान का शेयर बाजार फिर से खुल गया है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। इस बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ईरान का शेयर बाजार करीब 80 दिनों बाद आज फिर से खुलने जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण यह बाजार लंबे समय से बंद था। अब जब ट्रेडिंग दोबारा शुरू हो रही है, तो पूरी दुनिया की नजर ईरान की अर्थव्यवस्था और निवेशकों के मूड पर टिकी हुई है। हालांकि, ईरान की अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध पहले से ही भारी दबाव डाल रहे थे, लेकिन हालिया संघर्ष ने हालात और मुश्किल बना दिए। ऐसे में शेयर बाजार का खुलना सिर्फ एक आर्थिक घटना नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है।
ईरान सरकार और वहां की सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि बाजार को बंद रखने का फैसला निवेशकों को घबराहट में नुकसान से बचाने के लिए लिया गया था। युद्ध के दौरान मिसाइल हमले, इंटरनेट बंदी और लगातार बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर दी थी। अब अधिकारियों का दावा है कि कंपनियों को अपने वित्तीय आंकड़े और नुकसान की जानकारी देने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है, ताकि निवेशकों को सही और पारदर्शी जानकारी मिल सके।
ईरान का प्रमुख शेयर सूचकांक TEDPIX इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन जनवरी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों और इंटरनेट बंदी के बाद इसमें भारी गिरावट देखने को मिली। हजारों लोगों की मौत और राजनीतिक अस्थिरता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। अब बाजार खुलने के बाद यह साफ होगा कि निवेशक फिर से पैसा लगाने को तैयार हैं या नहीं।
इस पूरे संकट का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के करीब 20% तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। लेकिन, मौजूदा हालात में यहां से बहुत कम तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति मिल रही है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का शेयर बाजार खुलने के बाद शुरुआती दिनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कई कंपनियां युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों से प्रभावित हुई हैं, जबकि निवेशकों के बीच डर और अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। हालांकि सरकार बाजार को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैश्विक हालात और तेल बाजार की स्थिति आगे की दिशा तय करेंगे।
ईरान के लिए यह सिर्फ शेयर बाजार खोलने का मामला नहीं है, बल्कि यह दिखाने की कोशिश भी है कि देश आर्थिक रूप से अभी भी खड़ा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता है या फिर युद्ध और प्रतिबंधों का असर और गहरा होता है।




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