अनिल अंबानी से जुड़े ठिकानों पर छापे, ED का बड़ा एक्शन, लेकिन शेयरों में तेजी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह-सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कई कारोबारियों के ठिकानों पर छापे मारे हैं। ईडी की करीब 15 विशेष टीमों ने भोर में यह तलाशी अभियान शुरू किया, जो फिलहाल मुंबई में 10 से 12 स्थानों पर जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह-सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कई कारोबारियों के ठिकानों पर छापे मारे हैं। PTI सूत्रों के मुताबिक, ईडी की करीब 15 विशेष टीमों ने अर्ली मॉर्निंग में यह तलाशी अभियान शुरू किया, जो फिलहाल मुंबई में 10 से 12 स्थानों पर जारी है। ये कार्रवाई बिजली कंपनी रिलायंस पावर से जुड़े लोगों के आवासीय और कार्यालय पते पर केंद्रित है। इस छापे की खबर के बावजूद रिलायंस पावर के शेयरों में करीब 2 प्रतिशत की उछाल है और ये 23 रुपये पर पहुंच गए हैं। वहीं, रिलायंस इंफ्रा के शेयर 4 पर्सेंट से अधि उछलकर 94.20 रुपये पर पहुंच गए हैं।
दूसरी ओर द इंडियन एक्सप्रेस ने एक सोर्स के हवाले से कन्फर्म किया है कि ऑपरेशन मुंबई और हैदराबाद की जगहों पर फोकस थे, हालांकि जांच में कॉम्प्रोमाइज से बचने के लिए खास पते नहीं बताए गए। ये रेड ED के अनिल अंबानी के मुंबई के पॉश पाली हिल इलाके में मौजूद घर ‘अबोड’ को प्रोविजनली अटैच करने के कुछ दिनों बाद की गई।
मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध लेनदेन की जांच तेज
यह छापेमारी कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंंग की व्यापक जांच के तहत की जा रही है। हालांकि एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह तलाशी रिलायंस पावर में संदिग्ध फंड ट्रांसफर और लेनदेन से जुड़ी जांच का हिस्सा है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी 2026 में, ईडी ने 40,000 करोड़ रुपये के रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर-कॉम) बैंक फ्रॉड मामले की लंबे समय से चली आ रही जांच में अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास 'अबोड' को कुर्क किया था। उस वक्त इसकी कीमत करीब 3,500 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
अनिल अंबानी के खिलाफ ये भी है मामला
टाइम्स नाऊ के मुताबिक, दिसंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों और उन्हें यस बैंक द्वारा दिए गए ऋण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर से पूछताछ की थी। राणा कपूर, जो उस समय यस बैंक के सीईओ थे, को मार्च 2021 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी ध्वस्त हो चुकी डीएचएफएल को भारी ऋण देने के मामले में हुई थी।
कथित गड़बड़ी और बैंक को नुकसान
राणा कपूर और अनिल अंबानी ने कथित तौर पर 'नुकसान के बदले फायदे' का एक सौदा (क्विड-प्रो-क्वो) किया, जिसके परिणामस्वरूप यस बैंक को भारी नुकसान हुआ। जब राणा कपूर यस बैंक के शीर्ष पर थे, तब 31 मार्च, 2017 तक रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (एडीएजी ग्रुप) पर बैंक का करीब 6,000 करोड़ रुपये का जोखिम था, जो 31 मार्च, 2018 तक बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान, बैंक ने एडीएजी समूह की कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। यह निवेश काफी हद तक बाद में फंसे हुए निवेश (गैर-निष्पादित निवेश) में बदल गया। इन लेन-देन से बैंक को लगभग 3,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कैसे हुआ था कथित सौदा?
अधिकारियों के मुताबिक, ये सामान्य व्यावसायिक लेन-देन नहीं थे, बल्कि एक तरह की 'नुकसान के बदले फायदे' वाली व्यवस्था थी। कथित तौर पर, यस बैंक के निवेश के बदले में, एडीएजी समूह की कंपनियों ने राणा कपूर के परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित फर्मों को ऋण दिए। आरोप है कि राणा कपूर और अनिल अंबानी ने इन अवैध समझौतों को तय करने के लिए निजी बैठकें कीं, जिनमें अक्सर यस बैंक के अन्य अधिकारी मौजूद नहीं होते थे। इसके बाद राणा कपूर ने बैंक अधिकारियों को इन फर्जी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।




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