NSE के अनलिस्टेड शेयरों के नाम पर हो रहा था फ्रॉड, ED ने इन कंपनियों पर कसा शिकंजा
ED Raid: ईडी की कार्रवाई में एटम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्टिमस फाइनेंशियल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, बबली इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सुप्रीमस एंजल जैसी कंपनियां और उनके निदेशक शामिल हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत मुंबई और चेन्नई में 8 स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई एनएसई इंडिया लिमिटेड के तथाकथित 'अनलिस्टेड' शेयरों की बिक्री से जुड़े एक कथित निवेश घोटाले के सिलसिले में की गई है। ईडी ने बताया कि ये छापेमारी 27 फरवरी को उसकी हेडक्वार्टर इन्वेस्टिगेशन यूनिट द्वारा की गई।
किन कंपनियों और लोगों पर है शिकंजा?
सीएनबीसी टीवी 18 की खबर के मुताबिक ईडी की कार्रवाई में एटम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्टिमस फाइनेंशियल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, बबली इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सुप्रीमस एंजल जैसी कंपनियां और उनके निदेशक शामिल हैं। जांच में सतीश कुमार, संजय दामानी, नीरज निसार, कृष वोहरा, मनीष सोनी और निशा कुमारी के नाम सामने आए हैं। ईडी का आरोप है कि ये लोग एक गिरोह का हिस्सा थे, जिन्होंने निवेशकों को एक्सचेंज ऑपरेटर के अनलिस्टेड शेयर दिलाने का वादा करके उन्हें ठगा।
कैसे फंसाते थे निवेशक?
ईडी के अनुसार, आरोपी निवेशकों को लालच देते थे कि उनके पास एनएसई इंडिया लिमिटेड के शेयर हैं और वे निजी शेयर खरीद समझौतों के जरिए प्रीमियम पर उन्हें ट्रांसफर कर सकते हैं, लेकिन जांच में पाया गया कि इस ग्रुप के पास असल में वे शेयर थे ही नहीं, जिन्हें वे बेचने का दावा कर रहे थे। एनएसई इंडिया लिमिटेड के शेयर किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं हैं, इसलिए इनका कारोबार एनएसई या बीएसई जैसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होता।
निजी सौदों का फायदा उठाकर की ठगी
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने निजी लेन-देन में औपचारिक निगरानी की कमी का फायदा उठाया और निवेशकों से एडवांस पेमेंट के रूप में बड़ी रकम वसूल ली। जांच में यह भी पता चला कि निवेशकों से जुटाया गया पैसा कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और फिर उसे चल-अचल संपत्तियों में बदल लिया गया। छापेमारी के दौरान ईडी ने संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री जब्त की है।
ईडी ने कुर्क की संपत्ति और फ्रीज किए खाते
ईडी ने सतीश कुमार, संजय दामानी और उनसे जुड़ी संस्थाओं के कई बैंक और डीमैट खातों को फ्रीज कर दिया है। एजेंसी ने बताया कि इन खातों में "अपराध की आय" होने के सबूत मिले हैं। विभिन्न राज्यों के निवेशकों ने इस योजना से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई हैं। उल्लेखनीय है कि यह घोटाला ऐसे समय में सामने आया है जब एनएसई के संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग से पहले निजी बाजार में उसके शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
एनएसई के आईपीओ की तैयारी और बढ़ी डिमांड
एनएसई के प्रमुख अशोक कुमार चौहान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि एक्सचेंज को सेबी से आईपीओ के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिल गया है और वह ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि आईपीओ लाने में करीब सात से आठ महीने लग सकते हैं और साल के अंत तक लिस्टिंग का लक्ष्य है। बाजार जानकारों का कहना है कि लंबे समय से प्रतीक्षित इस आईपीओ ने अनलिस्टेड बाजार में एक्सचेंज के शेयरों की मांग बढ़ा दी है।
निवेशक रहें अलर्ट
जांचकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की मांग से फर्जी बिचौलियों को भी मौका मिलता है। निवेशकों को शेयर बेचने वाले के स्वामित्व को डीमैट रिकॉर्ड से जांचना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि ट्रांसफर मान्यता प्राप्त डिपॉजिटरी सिस्टम के जरिए ही किया जाए। ईडी ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है।




साइन इन