कर्ज संकट से निपटने को अनिल अंबानी का बड़ा प्लान, SBI समेत 2 बैंकों को लिखा लेटर
इन पत्रों में अनिल अंबानी ने एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के नेतृत्व में एक लेंडर्स कमेटी गठित करने का अनुरोध किया है। इस कमेटी का उद्देश्य समूह की वास्तविक और कानूनी रूप से बकाया देनदारियों को स्पष्ट करना और एक समयबद्ध री-पेमेंट तैयार करना होगा।

रिलायंस ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी कर्ज के जाल से बाहर निकलने के हर प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने समूह के बकाया देनदारियों के समाधान के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने औपचारिक पहल की है। उन्होंने हालिया कानूनी उदाहरणों और अपने पिछले री-पेमेंट रिकॉर्ड का हवाला देते हुए एक स्ट्रक्चरल रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में अनिल अंबानी ने पत्र के जरिए भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी और बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी-सीईओ देबदत्ता चंद से संपर्क किया है।
क्या है पत्र में?
इन पत्रों में अनिल अंबानी ने एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के नेतृत्व में एक लेंडर्स कमेटी गठित करने का अनुरोध किया है। इस कमेटी का उद्देश्य समूह की वास्तविक और कानूनी रूप से बकाया देनदारियों को स्पष्ट करना और एक समयबद्ध री-पेमेंट तैयार करना होगा। अंबानी ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित एक रिट याचिका के संबंध में दायर जवाबी हलफनामे का हवाला दिया और संदेसरा/स्टर्लिंग बायोटेक मामले के समाधान से इसकी तुलना की, जहां अदालत की मंजूरी के बाद देनदारियों का निपटारा हुआ था।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एसबीआई पहले से ही रिलायंस कम्युनिकेशंस के दिवाला प्रक्रिया में कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) का नेतृत्व कर चुका है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस के इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (ICA) के तहत समाधान प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी। इन अनुभवों के आधार पर अंबानी ने दोनों बैंकों से फिर से नेतृत्व संभालने की अपील की है। इस पूरे मामले को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी जानकारी दी गई है। अंबानी का कहना है कि उनके समूह ने पहले भी एसेट मोनेटाइजेशन और कर्ज चुकाने में अच्छा रिकॉर्ड दिखाया है, जिसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले की जांच में सीबीआई और ईडी द्वारा दिखाई गई अनिच्छा पर नाराजगी व्यक्त की और उन्हें इस मामले में निष्पक्ष, तटस्थ, पारदर्शी और समयबद्ध जांच करने का निर्देश दिया।
बता दें कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी मामले की अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध करते हुए पूर्व नौकरशाह ई ए एस शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को यह अनुमति दी कि यदि अन्य सरकारी निकाय उन्हें सहयोग देने में अनिच्छा दिखाते हैं तो वे उससे संपर्क कर सकते हैं।




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