रेलवे कर्मचारियों के बराबर की सैलरी? इन सरकारी वर्कर्स की 8वें वेतन आयोग पर नजर
केंद्र सरकार ने पिछले साल वेतन आयोग का गठन किया था। यह वेतन आयोग 18 महीने में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा। अपनी डिमांड को लेकर AIDEF ने वेतन आयोग के साथ बैठक की है।

8th pay commission latest: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग एक्शन मोड में है। वेतन आयोग की ओर से कर्मचारियों के अलग-अलग संगठनों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। इसी कड़ी में रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने भी वेतन आयोग के साथ बैठक की है। बैठक में जो डिमांड की गई है वो बेहद अहम हैं। आइए डिटेल जान लेते हैं।
रेलवे कर्मचारियों के समान वेतनमान
दिल्ली में 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में AIDEF ने रक्षा सिविल कर्मचारियों को रेलवे कर्मचारियों के बराबर वेतन, प्रमोशन और सुविधाएं देने की मांग जोरदार तरीके से उठाई। AIDEF के महासचिव सी श्रीकुमार ने कहा कि भारतीय रेलवे और रक्षा मंत्रालय दोनों ही बड़े औद्योगिक नियोक्ता हैं लेकिन रक्षा सिविल कर्मचारियों के साथ एक समान व्यवहार नहीं किया जाता है। फेडरेशन के मुताबिक कर्मचारियों का काम बेहद जोखिम भरा होता है। कर्मचारियों को हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और खतरनाक रसायनों के निर्माण में बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा काम करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्हें रेलवे कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और वेतनमान नहीं मिलते।
न्यूनतम वेतन कितना?
फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग से कुछ प्रमुख डिमांड की है। इनमें से सबसे पहली डिमांड मिनिमम बेसिक सैलरी से जुड़ी है। डिमांड है कि एंट्री लेवल केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 69 हजार रुपये किया जाए और सभी कर्मचारियों के लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की भी मांग की गई है।
AIDEF ने कहा कि रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारी, रक्षा प्रतिष्ठानों में, जिसमें सीमावर्ती इलाके और ऊंचे पहाड़ी इलाके भी शामिल हैं, सशस्त्र बलों के कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। हालांकि, जोखिम से जुड़े भत्ते यानी रिस्क अलाउंस सशस्त्र बलों के कर्मियों को तो मिलते हैं लेकिन रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों को नहीं। इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। AIDEF ने हर महीने 15,000 रुपये के रिस्क अलाउंस की मांग की है।
AIDEF का कहना है कि रक्षा क्षेत्र के कई सिविल कर्मचारी विस्फोट जैसी दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं, जिसके लिए उनके परिवार को मुआवजा राशि के तौर पर सिर्फ 25 लाख रुपये ही मिलते हैं। AIDEF का कहना है कि इस रकम को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जो रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभाते हुए दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं, उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। AIDEF का कहना है कि कैडर समीक्षा में होने वाली रुकावट और बेवजह की देरी को देखते हुए ग्रुप C और ग्रुप B के रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों की सभी श्रेणियों को 30 साल की सेवा अवधि के भीतर कम से कम पांच प्रमोशन मिलने चाहिए।




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