youths of bihar are in the grip of dry intoxication ganja charas heroin comes from bangkok nepal assam सूखे नशे की चपेट में बिहार के युवा, बैंकॉक-नेपाल और असम से आ रही खेप; तेजी से बढ़ी खपत, Bihar Hindi News - Hindustan
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सूखे नशे की चपेट में बिहार के युवा, बैंकॉक-नेपाल और असम से आ रही खेप; तेजी से बढ़ी खपत

Bihar News: नशे की यह खेप पूर्वोत्तर राज्यों असम, मणिपुर, नगालैंड के साथ नेपाल, म्यांमार और बैंकॉक (थाईलैंड) जैसे देशों से सड़क, ट्रेन और हवाई जहाज मार्ग से बिहार पहुंच रही है। नशे की पुड़िया ने गली-मोहल्लों तक पहुंच बना ली है।

Tue, 31 March 2026 05:52 AMNishant Nandan हिन्दुस्तन ब्यूरो, पटना
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सूखे नशे की चपेट में बिहार के युवा, बैंकॉक-नेपाल और असम से आ रही खेप; तेजी से बढ़ी खपत

Bihar News: बिहार के युवा सूखा नशा की चपेट में तेजी से फंस रहे हैं। बिहार पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक बीते तीन वर्षों में गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन शुगर, स्मैक, अफीम आदि नशीले पदार्थों की जब्ती तीन से 10 गुना तक बढ़ी है। जब्ती के मुकाबले तस्करी व खपत इससे कई गुना अधिक है।

नशे की पुड़िया ने गली-मोहल्लों तक पहुंच बना ली है

नशे की यह खेप पूर्वोत्तर राज्यों असम, मणिपुर, नगालैंड के साथ नेपाल, म्यांमार और बैंकॉक (थाईलैंड) जैसे देशों से सड़क, ट्रेन और हवाई जहाज मार्ग से बिहार पहुंच रही है। नशे की पुड़िया ने गली-मोहल्लों तक पहुंच बना ली है। बिहार पुलिस के मुताबिक 2025 में 2023 के मुकाबले तीन गुना अधिक करीब 32 हजार किलो गांजा बरामद किया गया।

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इसी तरह, चरस बरामदगी की मात्रा 78 किलो से बढ़कर 394 किलो हो गयी है। डोडा की जब्ती 17 हजार किलो से बढ़कर 2378 किलो, अफीम की जब्ती पांच किलो से बढ़कर 77 किलो हुई है। हेरोइन, ब्राउन शुगर और स्मैक के साथ ही नशीली दवाएं, इंजेक्शन और कोडिन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप की जब्ती के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।

रणनीति बना कर नयई इकाई चला रही अभियान

सितंबर 2025 में गठित मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो नशे के खिलाफ रणनीति बना कर अभियान चला रही है। ब्यूरो की टीम जिलों में स्थानीय पुलिस के सहयोग से नशा माफियाओं को ट्रैक (निगरानी) और ट्रेस (चिह्नित) कर उनको ट्रैप (दबोच) कर रही है। बिहार पुलिस के एडीजी (मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो) अमित कुमार जैन ने बताया कि सूखा नशा के माफियाओं पर कार्रवाई को लेकर जिलों को एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) बना कर भेजी गयी है। इससे स्थानीय पुलिस को गुप्त सूचना संकलन से लेकर बरामदगी, जब्ती और आरोपितों को सजा दिलाने में मदद मिलेगी।

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दुष्प्रभाव अधिक, सतर्क रहे परिवार

डॉक्टरों के मुताबिक, सूखा नशा दिमाग के न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिका) को नष्ट कर देता है। इससे स्मृति ह्रास, अवसाद और हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती है। इसका लंबे समय तक सेवन लिवर, किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अवसाद (डिप्रेशन), चिंता (एंग्जायटी) और आत्महत्या के विचार जैसे गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। इसको लेकर परिवारों को सतर्क रहना होगा। स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान जरूरी है ताकि बच्चे इसके शिकार नहीं हो पाएं।

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