ओवैसी-मायावती को मना लिया, लेकिन कांग्रेस और राजद के ही 4 विधायकों से गच्चा खा गए तेजस्वी
Rajya Sabha Elections RJD Congress: तेजस्वी यादव के महागठबंधन के साथ राज्यसभा चुनाव में खेल हो गया। आरजेडी को राजद और कांग्रेस के ही चार विधायकों ने गच्चा दे दिया। राजद कैंडिडेट एडी सिंह की हार हो गई है।

Rajya Sabha Elections RJD Congress: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के महागठबंधन के साथ राज्यसभा चुनाव में खेला हो गया। तेजस्वी यादव को कांग्रेस के तीन और राजद के एक कुल चार विधायकों ने गच्चा दे दिया। रविवार की रात से ही ये चार लोग रेंज से बाहर चले गए थे और आज शाम 4 बजे तक निर्धारित मतदान अवधि में वोट डालने के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे। कांग्रेस के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और मनोज बिश्वास ने गच्चा दिया सो दिया, राजद के मुसलमान विधायक फैसल रहमान ने भी लालू यादव और तेजस्वी को धोखा दे दिया। इन चार लोगों के वोट नहीं डालने से राजद के कैंडिडेट अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह की हार हो गई है। एडी सिंह 41 वोट मिलने पर जीत जाते और विपक्ष में कुल 41 विधायक हैं।
243 सदस्यों की विधानसभा में 239 विधायकों ने वोट किया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी 202 विधायकों ने वोट गिराया। 41 विपक्षी विधायकों में 37 ने ही वोट डाला। महागठबंधन के 35 में 31 एमएलए ने ही मतदान किया। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के 6 विधायक और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के 1 विधायक हैं, जिनका समर्थन तेजस्वी ने जुटा लिया था। ऐसी चर्चा है कि ओवैसी की पार्टी को समर्थन के बदले आगे विधान परिषद में एक सीट पर राजद का वोट मिलेगा। कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायक के वोट नहीं डालने से तेजस्वी यादव के कैंडिडेट एडी सिंह की जीत चमत्कारिक रूप से हार में बदल गई। इस तरह के चुनावी चमत्कार भाजपा और जदयू बहुत आसानी से करती रही है। 2024 में विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान भी इसी तरह राजद और कांग्रेस के कुछ विधायक नीतीश सरकार के साथ हो गए थे।
विपक्ष के 4 विधायकों के मतदान से दूर रहने और एनडीए के सारे 202 विधायकों के वोट डालने का सीधा मतलब था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ भाजपा के दूसरे और एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम भी दिल्ली जा रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की जीत पहले से ही निश्चित थी। एनडीए के चौथे कैंडिडेट राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की विजय में भी कोई संदेह नहीं था। असली लड़ाई पांचवीं सीट पर थी, जिसके लिए एडी सिंह से शिवेश राम लड़ रहे थे। लेकिन एनडीए के चुनाव मैनेजरों ने राजद और कांग्रेस के ही चार विधायकों को अबसेंट करा दिया। महागठबंधन के वोट में टूट का सीधा फायदा शिवेश राम को मिल गया।
तेजस्वी ने ओवैसी और मायावती की पार्टी को मनाया, लेकिन टूट गए घर के ही विधायक
तेजस्वी यादव ने अपने कैंडिडेट एडी सिंह को जिताने के लिए विपक्ष के 41 विधायक को एकजुट करने की काफी कोशिश की थी। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और मायावती की बसपा को भी मना लिया। ओवैसी की पार्टी पहले अपने कैंडिडेट और महागठबंधन के समर्थन की बात कर रही थी। बाद में ओवैसी ने राजद कैंडिडेट को समर्थन दे दिया, जो महागठबंधन में ओवैसी की पार्टी के कदम रखने का शुरुआती संकेत है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक कैंडिडेट को 41 विधायकों की प्रथम वरीयता के वोट चाहिए थे। विपक्ष के पास 41 वोट भी थे। लेकिन 4 विधायक के लापता रहने से विपक्ष के वोटों की संख्या 37 ही रह गई।
बीजेपी ने दो केंद्रीय पर्यवेक्षकों को कैंप कराया, कांग्रेस के अल्लावरु झांकने भी नहीं आए
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव को कितनी गंभीरता से लिया, इसका उदाहरण उसके बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु का मतदान से पहले बिहार से दूर रहना है। भाजपा ने इस चुनाव में पांचवीं सीट पर जीत की गारंटी करने के लिए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा को केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर पटना में कैंप करवा रखा था। अल्लावरु या कांग्रेस के नेताओं ने 6 विधायकों को एकजुट रखने के लिए प्रभावी प्रबंधन नहीं किया। नतीजा सामने है कि उसके आधे MLA वोट नहीं डालकर एनडीए की मदद कर गए। तेजस्वी पहले भी राजद और कांग्रेस के MLA से धोखा खा चुके हैं, लेकिन फैसल रहमान का गच्चा देना उनको लंबे समय तक याद रहेगा।




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