why opposition parties are un happy with special revision of voter list in bihar before election बिहार में वोटर लिस्ट की दोबारा जांच पर विपक्ष को क्यों एतराज, निर्वाचन आयोग का क्या है तर्क, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार में वोटर लिस्ट की दोबारा जांच पर विपक्ष को क्यों एतराज, निर्वाचन आयोग का क्या है तर्क

निर्वाचन आयोग के मुताबिक, वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण इसलिए जरुरी है ताकि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से आए अवैध प्रवासियों की पहचान हो सके। निर्वाचन आयोग का तर्क है कि संविधान के मुताबिक सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मतदान का अधिकार है।

Mon, 30 June 2025 07:04 AMNishant Nandan लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार में वोटर लिस्ट की दोबारा जांच पर विपक्ष को क्यों एतराज, निर्वाचन आयोग का क्या है तर्क

बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है। वोटर लिस्ट की दोबारा जांच को लेकर बिहार में सियासत भी गरम हो गई है। निर्वाचन आयोग की मंशा है कि छह राज्यों की मतदाता सूची से विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर किया जाए। इसकी शुरुआत बिहार से की जा रही है। हालांकि, विपक्ष ने वोटर लिस्ट की दोबारा जांच की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अंतिम बार बिहार में 2003 में मतदाता सूची की दोबारा जांच-पड़ताल की गई थी। इस दौरान वोटरों की पर्याप्त समय दिया गया था ताकि वो अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें।

निर्वाचन आयोग का क्या है तर्क

इधर वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग का तर्क है कि पुनरीक्षण इसलिए जरुरी है ताकि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से आए अवैध प्रवासियों की पहचान हो सके। निर्वाचन आयोग का तर्क है कि संविधान के मुताबिक सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मतदान का अधिकार है। निर्वाचन आयोग की तरफ से एक बयान में कहा गया था कि भारत का संविधान ही सर्वोच्च है। सभी राजनीतिक दल, निर्वाचन आयोग और यहां के सभी नागरिक संविधान का ही अनुसरण करते हैं।

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निर्वाचन आयोग का कहना है कि बिहार में सफलतपूर्वक वोटर लिस्ट की दोबारा जांच शुरू की गई है और इसमें सभी राजनीतिक पार्टियों की पूरी भागीदारी भी है। बता दें कि निर्वाचन आयोग के पास पहले से ही करीब 78,000 बूथ-लेवल कर्मचारी हैं और नए मतदान केंद्रों के लिए 20,000 नए बीएलओ अप्वाइंट किए जा रहे हैं। इस विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सही वोटरों खासकर बुजुर्ग, बीमार, दिव्यांग और गरीब वोटरों की मदद के लिए एक लाख से ज्यादा वॉलेन्टियर तैनात हैं।

विपक्ष को क्यों है ऐतराज

हालांकि, निर्वाचन आयोग के इस कदम से विपक्षी पार्टियां खुश नहीं हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज कुमार झा का कहना है कि इस विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बिहार के रहने वाले उन 37 फीसदी लोगों का नाम मतदाता सूची से हट जाएगा जो सिर्फ त्योहारों में बिहार आते हैं। मनोज झा ने कहा था कि करीब 37 फीसदी लोगों को इस पुनरीक्षण के दौरान अपना जन्म प्रमाण पत्र देना होगा। इनमें से ज्यादातर वैसे लोग हैं जो पलायन कर चुके हैं। वो सिर्फ त्योहारों में अपने घर आते हैं। इसमें गरीब, दलित, पिछड़े और मुस्लिम हैं। आप उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना चाहते हैं क्योंकि सत्ताधारी पार्टी सर्वे से डरी हुई है। निर्वाचन आयोग अपनी साख खो रहा है।

संसद के बाहर उठाएंगे मुद्दा - डेरेक ओ ब्रायन

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन भी निर्वाचन आयोग के इस विशेष गहन पुनरीक्षण की आलोचना कर चुके हैं। टीएमसी नेता ने दावा किया था कि निर्वाचन आयोग पिछली दरवाजे से एनआरसी लागू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा था वर्ष 1935 में नाजी शासन के दौरान आपको भारत का नागरिक होने के लिए सबूत के तौर पर कुछ दस्तावेज दिखाने पड़ते थे तो क्या नाजी शासन फिर लौट आया है। टीएमसी नेता ने चेतावनी दी थी कि इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां इस मुद्दे को संसद के बाहर उठाएगी।

ओवैसी ने निर्वाचन आयोग को लिखा खत

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी निर्वाचन आयोग की आलोचना की है। ओवैसी ने आयोग को एक खत भी लिखा है। इस खत में असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कहा है कि यह प्रक्रिया अव्यवस्थित, अवैज्ञानिक और लोगों के अधिकारों को प्रभावित करने वाली है। ओवैसी ने दावा किया है कि बिहार में वोटर लिस्ट का पहले ही विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा चुका है। इसमें तेजी से हो रहे शहरीकरण, पलायन, मौतों की सूचना न देने और मतदाता सूची में विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम शामिल करने जैसे मुद्दों पर विचार किया गया है। ओवैसी ने कहा है कि इस पुनरीक्षण को सही ठहराने के लिए इन्हीं वजहों का हवाला दिया जा रहा है।

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