मिंटू निराला ने किसके कहने पर कुत्ते का निवास प्रमाण पत्र बनाया? नेताओं से हो रही थी बात
पटना के मसौढ़ी में डॉग बाबू नाम से कुत्ते का निवास प्रमाण पत्र बनाने वाला कार्यपालक सहायक मिंटू निराला कुछ नेताओं से फोन पर संपर्क में था। अधिकारियों ने बताया कि उसने किसके कहने पर ऐसा किया, इसकी जांच की जा रही है।

बिहार के पटना जिले में पिछले दिनों डॉग बाबू के नाम पर कुत्ते का निवास प्रमाण पत्र बनाए जाने के मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में मसौढ़ी अंचल के कार्यपालक सहायक मिंटू कुमार निराला को गिरफ्तार किया गया है। उसने किसके कहने पर जानबूझकर कुत्ते का निवास प्रमाण पत्र बनाया, इसका पता लगाया जा रहा है। जांच में पता चला है कि मिंटू निराला एक राजनीतिक दल के लोगों से संपर्क में था। उसकी कुछ नेताओं से फोन पर बातचीत भी हो रही थी।
गिरफ्तार कर्मी ने पूछताछ में बताया कि उसकी ड्यूटी मतदाता पुनरीक्षण कार्य के लिए अनुमंडल कार्यालय में लगी थी। मगर उसने 15 जुलाई सुबह 9.41 बजे अंचल कार्यालय जाकर कुत्ते का निवास प्रमाण से संबंधित आवेदन को अपने ही कंप्यूटर पर अपलोड कर दिया। इसके बाद राजस्व अधिकारी के पास एक साथ 300 आवेदन स्वीकृति के लिए भेज दिए। उसी में कुत्ते का भी निवास प्रमाण पत्र था। राजस्व अधिकारी ने बगैर छानबीन किए कंप्यूटर पर सभी आवेदन को सेलेक्ट कर स्वीकृति प्रदान कर दी।
मिंटू ने ही करा था वायरल
मिंटू ने कुत्ते के निवास प्रमाण पत्र का आवेदन 300 के लॉट वाले सीरीज में भेजा था, ताकि राजस्व अधिकारी को पता नहीं चल सके। राजस्व अधिकारी ने बिना आवेदन देखे सभी की स्वीकृति प्रदान कर दी। जैसे ही कुत्ते का निवास प्रमाण पत्र जारी हुआ, कार्यपालक सहायक ने अपने कंप्यूटर से उसे फिर डाउनलोड कर लिया और सोशल साइट पर वायरल करा दिया।
अधिकारियों का कहना है कि छानबीन में पता चला है कि कर्मचारी के मोबाइल के कॉल डिटेल्स में कुछ नेताओं से बातचीत होने की पुष्टि हुई है। छानबीन चल रही है कि किसके कहने पर कर्मचारी ने ऐसा किया था। फिलहाल अब पटना जिले में सभी राजस्व अधिकारियों को जाति, आय, निवास आदि प्रमाण पत्र को बगैर सत्यापन के स्वीकृति प्रदान नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
कई जिलों में ऐसे मामले पकड़े गए
पटना जिला ही नहीं प्रदेश के कई जिलों में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाने का मामला सामने आया है। पटना के अलावा नवादा, मुंगेर और मोतीहारी में ऐसे मामले पकड़े गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसके पीछे एक रैकेट हो सकता है, इसीलिए इस विषय पर छानबीन चल रही है। इसके पीछे कर्मचारियों की शरारत है या कोई राजनैतिक चाल है, इसकी जांच हो रही है।




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