बिहार के छपरा में 8 साल के बच्चे से अप्राकृतिक सेक्स, सासाराम में 9 साल के मासूम पर SC-ST ऐक्ट में केस
देर तक बच्चे के वापस नहीं लौटने पर परिजन खोजते हुए दुकान पर पहुंचे। बताया जाता है कि दुकान के अंदर एक बंद कमरे से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। दरवाजा खोलने पर बच्चे के साथ गलत हरकत किए जाने की बात सामने आई। परिजनों को देखते ही आरोपी फरार हो गया।

बिहार के अलग-अलग जिलों में मासूमों पर जुल्म ढाहने से जुड़ी खबरें सामने आई हैं। पहली खबर छपरा जिले से है। यहां 8 साल के एक मासूम बच्चे के साथ अप्राकृतिक सेक्स किए जाने का मामला सामने आया है। छपरा के एकमा थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय बच्चे के साथ अप्राकृतिक कृत्य का मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को बच्चा घर के समीप स्थित एक दुकान पर सामान लेने गया था।
देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजन खोजते हुए दुकान पर पहुंचे। बताया जाता है कि दुकान के अंदर एक बंद कमरे से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। दरवाजा खोलने पर बच्चे के साथ गलत हरकत किए जाने की बात सामने आई। परिजनों को देखते ही आरोपी फरार हो गया।
घटना के बाद परिजन बच्चे को लेकर थाना पहुंचे। पुलिस ने तत्काल बच्चे को चिकित्सीय जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में लिप्त दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
सासाराम में बच्चे पर गंभीर केस दर्ज
इधर बिहार के ही सासाराम जिले में 9 साल के बच्चे पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज कर दिया गया। यहां नौहट्टा पुलिस की कार्यशैली गुरूवार को सामने आयी। बताया जाता है कि नौ साल के बच्चे पर नौहट्टा थानाध्यक्ष द्वारा एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। मामले में गुरूवार को एक विधि विवादित बच्चा किशोर न्याय परिषद के समक्ष पेश हुआ।
बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी अमित कुमार पांडेय व सदस्य तेजबलि सिंह ने बच्चे की उम्र को देखकर हैरानी जतायी व मामले में किशोर को उनके अभिभावक को सौंपने का आदेश दिया। साथ ही मामले में नौहट्टा थानाध्यक्ष से 24 घंटे के अंदर जवाब देने को कहा गया है। बताया जाता है कि बच्चों के बीच आपसी विवाद में मारपीट की प्राथमिकी एक बच्ची ने मां ने स्थानीय थाने में सात दिसंबर 2025 को दर्ज करायी थी। मामले में चार बच्चों समेत अन्य को आरोपित किया गया था। मामले में एक विधि विवादित किशोर गुरूवार को बोर्ड समक्ष पेश हुआ।
जिस पर बोर्ड ने उसकी उम्र नौ से 10 साल के बीच आंकी। साथ ही प्राथमिकी देखकर हैरानी जतायी। प्राथमिकी के कई कॉलम खाली मिले। किसी भी बच्चे व बड़े आरोपित का उम्र नहीं दर्शाया गया था। बताया गया कि प्राथमिकी में उम्र का दर्शाना बहुत जरूरी है। बोर्ड ने कहा है कि जवाब संतोषजनक नहीं होने पर मामले से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। वहीं बोर्ड में उपस्थित लोग भी बच्चे को देखकर एससी-एसटी ऐक्ट के दुरूपयोग की बात कह रहे थे।




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