बिहार के 28 विधायकों की समाप्त हो सकती है सदस्यता, पटना HC ने थमाया नोटिस
किसी निर्वाचित विधायक पर आपराधिक इतिहास को छुपाने तो किसी पर शपथपत्र में संपत्ति की जानकारी सही नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदान और मतगणना में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाते हुए इनका निर्वाचन रद्द करने की मांग की गई है।

बिहार के 28 विधायकों की सदस्यता समाप्त हो सकती है। दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव में विजयी उम्मीदवारों के निर्वाचन को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोप में 28 विधायकों को नोटिस जारी किया है। 10 अन्य विधायकों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। वर्ष 2025 में हुए चुनाव के बाद अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र से जीते उम्मीदवारों के खिलाफ हाईकोर्ट में 40 चुनाव याचिकाएं दायर की हैं। हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति शशि भूषण प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय को चुनाव याचिकाएं लेने के लिए अधिकृत किया था। सभी 40 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद नवनिर्वाचित विधायकों को नोटिस जारी किया गया।
पिछले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 38 विधायकों ने नामांकन पत्र भरने के दौरान दिए गए हलफनामे में सही जानकारी नहीं दी है। किसी निर्वाचित विधायक पर आपराधिक इतिहास को छुपाने तो किसी पर शपथपत्र में संपत्ति की जानकारी सही नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदान और मतगणना में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाते हुए इनका निर्वाचन रद्द करने की मांग की गई है।
ये प्रमुख आरोप
1. आपराधिक इतिहास छुपाया
2. संपत्ति का सही ब्योरा नहीं दिया
3. मतदान में गड़बड़ी की गई
4. मतगणना में अनियमितता हुई
इन्हें भेजा गया नोटिस
देवयंति देवी उर्फ देवयंति यादव, माधव आनंद, अजय कुमार, राजेश कुमार सिंह, फैसल रहमान, ऋतुराज कुमार, अभिषेक रंजन, मनोज बिस्वास, कौशल किशोर, संदीप सौरभ, डॉ. सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार, बाबूलाल शौर्य, सूबेदार दास, इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता, सतीश कुमार सिंह यादव, संगीता कुमारी, चेतन आनंद, कविता देवी, हरि नारायण सिंह, कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया, नीतेश कुमार सिंह, अभिषेक आनंद, विनय कुमार चौधरी, अनिता, मो तौफिस आलम, बशिष्ठ सिंह, अमरेंद्र कुमार।
इनके खिलाफ भी याचिका
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, मंत्री रमा निषाद, राज कुमार राय, जिवेश कुमार, शुभानंद मुकेश, विनोद नारायण झा, बैद्यनाथ प्रसाद, रत्नेश कुमार और विजय कुमार उर्फ विजय सिंह।
इनके खिलाफ दो याचिकाएं
अजय कुमार और राजेश कुमार सिंह
ये तर्क भी दिए गए
याचिका में कहा गया है कि चुनावी हलफनामे में पुष्ठभूमि, संपत्ति व अन्य जानकारियां सही ढंग से दी जानी चाहिए। गलत तथ्यों को देना गंभीर मामला है। जनता उम्मीदवारों की ओर से दी गई जानकारी को देखकर मन बनाती है कि कौन सा उम्मीदवार सही और किसे मत देना है।
आरोप साबित हुए तो समाप्त हो सकती है सदस्यता
पटना हाईकोर्ट के वकील एसबीके मंगलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में आदेश दिया है कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक इतिहास की सही जनकारी देनी है। नामांकन पत्र के साथ जो शपथपत्र दायर करना है उसके पारा 6क में उमीदवारों को स्पष्ट लिखना है कि उन्होंने अपने खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों की जानकारी अपने दल को दे दी है। साथ ही शपथपत्र में यह भी उल्लेख करना है कि मैंने कोई भी पारा खाली नहीं छोड़ा है।
उम्मीदवार सभी पारा नहीं भरते हैं, उनके नामांकन पत्र को रद्द करने का यह पर्याप्त कारण हो सकता है। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने भी यह आदेश जारी किया है। राज्य के अधिकतर उम्मीदवारों ने इस पारा को नहीं भरा है। कई जिलों के निर्वाचन पदाधिकारियों ने नामांकन पत्र को रद्द कर दिया, वहीं कई जिलों में इसे नजरअंदाज कर नामांकन पत्र को मंजूर कर लिया गया। इसलिए कई याचिका में आयोग को भी पार्टी बनाया गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इन विधायकों की सदस्यता समाप्त हो सकती है।




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