Train ran at 160 kmh Suraksha Kavach took control at red signal trial successful 160 KM/H की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन; रेड सिग्नल दिखते ही 'सुरक्षा कवच' ने किया कंट्रोल, ट्रायल सफल, Bihar Hindi News - Hindustan
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160 KM/H की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन; रेड सिग्नल दिखते ही 'सुरक्षा कवच' ने किया कंट्रोल, ट्रायल सफल

गया-सासाराम-डीडीयू रेलखंड पर 'सुरक्षा कवच’ प्रणाली का फाइनल ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रायल ट्रेन की संभावित दुर्घटना को भांपते हुए सुरक्षा कवच ने स्वतः ट्रेन की गति को नियंत्रित कर मात्र 15 किमी प्रति घंटा तक ला दिया, जिससे हादसा टालने का ट्रायल सफल रहा।

Sat, 25 April 2026 08:33 AMsandeep हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान संवाददाता, गया जी
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160 KM/H की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन; रेड सिग्नल दिखते ही 'सुरक्षा कवच' ने किया कंट्रोल, ट्रायल सफल

गया-सासाराम-डीडीयू रेलखंड पर शुक्रवार से ‘सुरक्षा कवच’ प्रणाली का फाइनल ट्रायल शुरू हुआ। परीक्षण के दौरान 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रायल ट्रेन को अचानक कर्मनाशा स्टेशन के लूप लाइन में प्रवेश करना पड़ा। संभावित दुर्घटना को भांपते हुए सुरक्षा कवच ने स्वतः ट्रेन की गति को नियंत्रित कर मात्र 15 किमी प्रति घंटा तक ला दिया, जिससे ट्रायल एक बड़ा हादसा को टालने में सफल किया।

लाल सिग्नल पर ट्रेन को तुरंत रोका गया

ट्रायल ट्रेन डीडीयू की ओर 160 की स्पीड से गुजर रही थी। इसी दौरान सैयदराजा-चंदौली स्टेशन के बीच गेट संख्या-75 पर लाल सिग्नल दिखा। ऐसे में सुरक्षा कवच प्रणाली ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए ट्रेन की स्पीड को नियंत्रित किया और उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। यह प्रदर्शन इस तकनीक की विश्वसनीयता को दर्शाता है।

विशेषज्ञ टीम की निगरानी में परीक्षण

महत्वपूर्ण ट्रायल में पूर्व मध्य रेलवे, डीडीयू रेल मंडल और रेलवे बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल हैं। शुक्रवार को एलएचवी रेक के साथ परीक्षण सफल रहा, जबकि शनिवार को भी ट्रायल जारी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार यह अंतिम चरण का परीक्षण है और इसके परिणाम के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।

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पायलट को समय-समय पर सतर्क भी करती

ट्रैफिक इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के अनुसार सुरक्षा कवच एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है जो ट्रेनों के बीच दूरी और गति पर लगातार नजर रखती है। खतरे की स्थिति में यह खुद ही ब्रेक लगाकर दुर्घटना को टाल देती है और लोको पायलट को समय-समय पर सतर्क भी करती है। रेलवे के इस प्रयास को यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले समय में इस प्रणाली के लागू होने से हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन और अधिक सुरक्षित व भरोसेमंद बनने की उम्मीद है।

बड़े काम का है 'सुरक्षा कवच'

आपको बता दें 'सुरक्षा कवच' एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। जिसे भारत में ही विकसित किया गया है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा कवच है, जो ट्रेन, ट्रैक और सिग्नल सिस्टम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखता है और जरूरत पड़ने पर खुद ही ट्रेन को रोक देता है।ट्रेन, ट्रैक और सिग्नल पर लगे RFID और रेडियो उपकरण आपस में लगातार डेटा शेयर करते हैं। सिस्टम ट्रेन की स्पीड, लोकेशन और सिग्नल को लगातार मॉनिटर करता है। अगर लोको पायलट गलती से रेड सिग्नल पार कर दे तो यह सिस्टम तुरंत ऑटोमैटिक ब्रेक लगा देता है।

'सुरक्षा कवच' की मुख्य खासियतें

टक्कर से बचाव- दो ट्रेनों के एक ही ट्रैक पर आने पर खुद ब्रेक लग जाता है

रेड सिग्नल पर अलर्ट- ड्राइवर को चेतावनी और जरूरत पड़ने पर ट्रेन रोकना

कोहरे में मदद- कम विजिबिलिटी में भी सिग्नल की जानकारी देता है

रियल-टाइम मॉनिटरिंग- कंट्रोल रूम से ट्रेनों की निगरानी

इमरजेंसी SOS- खतरे की स्थिति में आसपास की ट्रेनों को अलर्ट

भारत में कई ट्रेन हादसे मानवीय गलती के कारण होते हैं। ऐसे में 'सुरक्षा कवच' इस गलती को कम करता है और ट्रेन को “स्वचालित सुरक्षा” देता है। ‘कवच’ रेलवे के लिए एक डिजिटल सुरक्षा ढाल है, जो भविष्य में बड़े रेल हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभाएगा। इसे धीरे-धीरे पूरे देश के रेलवे नेटवर्क पर लागू किया जा रहा है।

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