वोटर लिस्ट रिवीजन में यादव बहुल क्षेत्रों पर चलेगी कैंची? तेजस्वी ने जताई आशंका
तेजस्वी यादव ने गुरुवार को कहा 35 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने की बात सामने आई थी। जब यह काम अभी हुआ ही नहीं, तो फिर इस पर जानकारी कैसे हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यादव बहुल क्षेत्रों में लोगों का नाम काटा जा रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे निर्वाचन आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने फिर से सवाल खड़े किए हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची गहन परीक्षण के नाम पर दलित, वंचित तबके के लोगों का नाम काटा जा रहा है। उन्होंने खास तौर पर यादव बहुल क्षेत्रों में लोगों के वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने की आशंका जताई है। आरजेडी नेता ने जल्द ही इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने की बात कही है।
तेजस्वी यादव ने गुरुवार को पटना के 1, पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि 3 दिन पहले 35 लाख मतदाताओं के वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस काम को अभी किया जाना बाकी है, तो यह जानकारी कहां से आ गई।
चुनाव आयोग ने हाल ही में बताया था कि वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान अब तक उन्हें 35 लाख वोटर ऐसे मिले हैं, जिनकी या तो मृत्यु हो चुकी, या वे स्थायी रूप से बिहार से बाहर शिफ्ट हो गए हैं या फिर उनका नाम एक से अधिक जगहों पर रजिस्टर्ड हैं। आयोग ने ऐसे सभी वोटरो का नाम मतदाता सूची से हटाने की बात कही। इनकी संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि मतदाता सूची के गहन परीक्षण का काम 25 जुलाई तक चलने वाला है।
अब तेजस्वी यादव दावा कर रहे हैं कि चुनाव आयोग जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से काटने जा रहा है, उनमें अधिकांश यादव बहुल क्षेत्रों के लोग हैं। महागठबंधन और खासकर आरजेडी को अपने वोटबैंक के टूटने का डर सता रहा है। एक दिन पहले तेजस्वी ने आंकड़े जारी कर बताया था कि 2020 के विधानसभा चुनाव में 35 सीटें ऐसी थीं जिनपर 3000 से कम वोट से हार या जीत का अंतर था।
उन्होंने कहा कि अगर वोटर लिस्ट रिवीजन में एक बूथ से 10 नाम भी हटाए जाएंगे तो एक विधानसभा से 3200 वोटर हट जाएंगे। इससे विधानसभा चुनाव के नतीजों पर खासा प्रभाव पड़ेगा। तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर चुनिंदा बूथों पर एक खास वर्ग, समुदाय और बूथों पर वोट छांटने का आरोप भी लगाया।
बता दें कि बिहार में यादव जाति को राजद का कोर वोटबैंक माना जाता है। पटना, समस्तीपुर, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण समेत कई जिलों में यादव जाति की आबादी अच्छी खासी है। साल 2023 की जाति आधारित गणना में यादवों की आबादी बिहार में सर्वाधिक 14.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
(हिन्दुस्तान ब्यूरो के इनपुट के साथ)




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