सुपौल : दो दिन बाद बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश के आसार, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
सुपौल जिले में तेज धूप और शुष्क गर्मी का दौर जारी है। 21 से 23 अप्रैल तक मौसम शुष्क रहेगा। अधिकतम तापमान 36-37°C और न्यूनतम 26-27°C रहने का अनुमान है। 24 अप्रैल से बादलों की आवाजाही शुरू होगी, और 25-26 अप्रैल को आंधी और हल्की बारिश की संभावना है। किसानों को फसल की कटाई और भंडारण के लिए सलाह दी गई है।

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में फिलहाल तेज धूप और शुष्क गर्मी का दौर जारी है, लेकिन अगले दो दिनों के बाद मौसम के मिजाज में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 21 से 23 अप्रैल तक मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। इस दौरान अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता करीब 70 प्रतिशत रहने के बावजूद दोपहर में यह घटकर 15 प्रतिशत तक पहुंच जा रही है, जिससे उमस के बजाय तेज और चुभने वाली गर्मी महसूस हो रही है।
दिनभर चलने वाली पूर्वी दिशा की हवा 10 से 12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है, जिससे गर्मी का असर और बढ़ जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल आसमान साफ रहेगा, लेकिन 24 अप्रैल से बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। पूर्वानुमान के मुताबिक 25 और 26 अप्रैल को मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। इन दिनों गरज-चमक के साथ आंधी और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान 4 से 6 मिमी तक वर्षा दर्ज की जा सकती है, जबकि हवा की रफ्तार बढ़कर 18 से 24 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज हवा और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम में संभावित बदलाव का सीधा असर खेती-बाड़ी पर पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नित्यांनद रॉय के अनुसार तेज हवा और बारिश के कारण मक्का की खड़ी फसल गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं आम और लीची के बागानों में टिकोला झड़ने की आशंका भी बनी हुई है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे पकी हुई गेहूं की फसल की कटाई और मड़ाई का कार्य यथाशीघ्र पूरा कर लें। मड़ाई सुबह या शाम के समय, जब हवा शांत हो, उसी दौरान करने की सलाह दी गई है। साथ ही अनाज को सुरक्षित भंडारण के लिए 12 प्रतिशत नमी पर ही संग्रहित करने को कहा गया है। इसके अलावा मक्का की फसल में कीट प्रकोप की स्थिति में उचित दवा का छिड़काव करने और जायद फसलों की बुआई मौसम को ध्यान में रखते हुए करने की सलाह दी गई है। बागवानी फसलों में आम और लीची के बेहतर विकास के लिए पोषक तत्वों का संतुलित छिड़काव करने की जरूरत बताई गई है, ताकि फल गिरने की समस्या कम हो सके। पशुपालकों को भी बदलते मौसम के मद्देनजर सतर्क रहने को कहा गया है। पशुओं को आंधी और बारिश के दौरान खुले स्थान या पेड़ के नीचे न बांधने की हिदायत दी गई है, क्योंकि बिजली गिरने का खतरा रहता है। साथ ही पशुओं को स्वच्छ पानी और संतुलित आहार देने तथा पशुशाला को साफ-सुथरा और हवादार रखने की सलाह दी गई है।मंगलवार दोपहर से सूर्यास्त तक झुलसाने और शरीर को सुखाने वाली तपिश महसूस हो रही थी। लग्न का समय होने के बाद भी शहर की सड़कों पर बाकी दिनों जैसी भीड़ नहीं थी। मनुष्य हों या पशु-पक्षी, सभी छाया की तलाश में बेहाल नजर आए। लगन की खरीदारी करने निकले लोगों को दुकानों तक पहुंचने में खासा दुश्वारियां झेलनी पड़ीं। गमछा-टोपी या छाता तीखी धूप से कुछ राहत दे रहे थे तो लू के थपेड़े शरीर से पानी सुखा रहे थे। सूर्यास्त के बाद तक तपिश महसूस की गई। भीषण गर्मी के चलते पिछले साल के अप्रैल में हुई बिजली खपत का रिकॉर्ड इस बार 21 अप्रैल को ही टूट गया। जिले में 21अप्रैल को 161.3 मेगावाट बिजली खर्च हो गई। ट्रांसमिशन सर्किल के अनुसार, अप्रैल में अब तक की यह सर्वाधिक खपत है। वहीं, 20 अप्रैल को 158 मेगावाट बिजली खपत हुई जबकि, पिछले वर्ष 18 अप्रैल को बिजली की मांग 109 मेगावाट थी। एक साथ 50 मेगावाट बिजली की अचानक डिमांड बढ़ गई है। अप्रैल में बिजली खर्च होने का यह सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। पिछले साल अप्रैल के अंतिम दिनों में 119 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी।
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