नालंदा : दिन में नहीं जलते दीये और शाम में आरती, शीतला मंदिर की अनूठी है परंपरा; कहां मची थी भगदड़
Nalanda Stampede: शीतला मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित 12 इंच ऊंची मां शीतला की अलौकिक प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा के मुकुट पर नौ रेखाएं उकेरी गई हैं, जो नौ देवियों (नवदुर्गा) की प्रतीक हैं। माता रानी को मुख्य रूप से दही और बताशे का ही भोग लगाया जाता है।

Nalanda Stampede: नालंदा जिले के मघड़ा में स्थापित अतिप्राचीन सिद्धपीठ मां शीतला मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए देशभर में विख्यात है। यहां दिन के उजाले में माता के सामने दीपक जलाना या हवन करना पूरी तरह वर्जित है। मान्यता है कि माता को दिन में शीतलता (ठंडक) चाहिए होती है। इसलिए सूर्य अस्त होने के बाद ही यहां आरती और धूप-दीप की रस्म निभाई जाती है।
ज्योतिष के जानकार पं. मोहन कुमार दत्त मिश्र बताते हैं कि पुराणों में वर्णन है कि दिन के समय मां शीतला के शरीर में तीव्र जलन रहती है। इसी जलन को शांत करने के लिए माता को हर दिन सुबह दही और चीनी से स्नान कराया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित 12 इंच ऊंची मां शीतला की अलौकिक प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा के मुकुट पर नौ रेखाएं उकेरी गई हैं, जो नौ देवियों (नवदुर्गा) की प्रतीक हैं। माता रानी को मुख्य रूप से दही और बताशे का ही भोग लगाया जाता है। हालांकि, श्रद्धालु नारियल, चुनरी, चना और दूध भी अर्पित करते हैं।
मंदिर की खासियत
● अति प्राचीन मां का गर्भगृह काफी छोटा है, इसकी लम्बाई-चौड़ाई 10 बाय 12 फीट
● गर्भगृह में जाने और आने के लिए है छोटा एक दरवाजा
● मंगलवार को भीड़ अधिक रहने के कारण गर्भगृह में जाने पर रहती है पाबंदी
● सिंह द्वार के पास सीढ़ियों पर उतरने के दौरान महिला श्रद्धालु गिरीं, इसके बाद भगदड़ मची
● गर्भ गृह के करीब 25-30 फीट पहले सिंह द्वार, यहीं हुई घटना
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