बिहार चुनाव: NDA में सीट बंटवारे पर फंसा पेंच, लोजपा-रालोमो और HAM की मांग 75 सीटों तक पहुंची
चिराग पासवान की लोजपा (रा) ने 40 सीटों की मांग की है तो उपेन्द्र कुशवाहा की रालोमो को 20 सीटों की दरकार है। इसी तरह जीतन राम मांझी की हम को कम से कम 15 सीटें चाहिए। फिलहाल कोई नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं।
जदयू-भाजपा अपनी सीटों से पहले सहयोगी दलों की सीटों का मामला सुलझाएंगे। इसके लिए भाजपा को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। जदयू ने भाजपा से स्पष्ट कहा है कि पहले सहयोगी दलों लोजपा (रा), रालोमो और हम के बीच सीटों का बंटवारा कर दिया जाए। इसके बाद ही जदयू और भाजपा आपस में सीटों का बंटवारा करेंगे। बंटवारे का फार्मूला शेष बंटी सीटों में आधा-आधा का होगा। इसमें एक या दो सीट इधर-उधर हो सकता है।
पिछले दो-तीन दिनों में सहयोगी दलों के तेवर देखकर ही यह निर्णय लिया गया है कि पहले उनका ही मामला निपटाया जाए। चिराग पासवान की लोजपा (रा) ने 40 सीटों की मांग की है तो उपेन्द्र कुशवाहा की रालोमो को 20 सीटों की दरकार है। इसी तरह जीतन राम मांझी की हम को कम से कम 15 सीटें चाहिए।
फिलहाल कोई नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं। तीनों ही अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इस प्रकार सहयोगी दलों की मांग 75 सीटों तक पहुंच गयी है। ऐसे में जदयू-भाजपा के पास केवल 168 सीटें ही शेष रह जाएंगी। ऐसे में मामला बेहद उलझ गया है। उधर, जदयू और भाजपा कम से कम 101-103 सीटों पर लड़ना चाहते हैं। शेष बचे 38-40 सीटों को सहयोगी दलों के बीच बांटा जाना है। ऐसे तो जदयू की मांग 109 सीटों की है।
सहयोगी दलों की नयी मांग के बाद परिस्थितियां बदलीं
अन्य सहयोगी दलों के लिए 33 सीटें ही बचेंगी। इसी में एक-दो सीटों का फेरबदल करने की योजना थी। मगर सहयोगी दलों की नयी मांग के बाद परिस्थितियां बदल गयी हैं। सहयोगी दलों की सीटों की हिस्सेदारी कुछ बढ़नी तय है। इसीलिए जदयू ने भाजपा के साथ अपनी सीटों के बंटवारे के पहले अन्य तीनों सहयोगी दलों की सीटों का निर्धारण कर लेने को कहा है। इसके लिए तीनों दलों के नेताओं के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है अगले दो दिनों में सीटों को लेकर अंतिम निर्णय हो जाएगा।




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