अगर हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करा कर दिखाएं.., राबड़ी आवास पर बढ़ी रार; रोहिणी की खुली चुनौती
पटना में राबड़ी देवी के आवास को लेकर रार अब बढ़ती जा रही है। रोहिणी आचार्या खुलकर अपनी मां के समर्थन में उतर चुकी हैं। रोहिणी आचार्य ने कहा है कि अगर सरकार में हिम्मत है तो वो बंगला को जबरन खाली करवा कर दिखाए।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बंगले को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। राबड़ी देवी ने पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास को खाली करने से इनकार कर दिया है। इधर राज्य की सम्राट चौधरी सरकार की तरफ से पूर्व सीएम को 15 दिनों की मोहलत दी गई है और कहा गया है कि वो बंगले को खााली कर दें। अब राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्या ने इसपर प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी आचार्या ने कहा है कि अगर सरकार को हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करवाए।
रोहिणी आचार्या ने एक्स पर कहा, ‘अगर हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करवाए सरकार ..जनहित के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध की राह पर है सम्राट चौधरी की सरकार l पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी जी को आवास से बेदखल करने का तुगलकी फरमान और आवास पर पुलिस भेजना लोकतंत्र नहीं, सत्ता के अहंकार एवं बेजा दबंगई की निशानी है। अफसोसजनक है कि बेरोज़गारी, महंगाई , भ्रष्टाचार , बढ़ते अपराध के फ्रंट पर पूरी तरह से निष्क्रिय साबित होती सम्राट चौधरी की सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने में पूरी सक्रिय है l ये शासन का कौन सा मॉडल है ? बेशक शासन का प्रतिशोध मॉडल l’
बहरहाल आपको बता दें कि बिहार में उस सरकारी बंगले को लेकर विवाद चल रहा है, जिसमें फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता राबड़ी देवी रह रही हैं और उन्होंने इसे खाली करने से इनकार कर दिया है, जबकि इसे राजग के एक मंत्री को आवंटित कर दिया गया है। भवन निर्माण विभाग ने 27 मई के एक आदेश के माध्यम से राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के निकट स्थित 10, सर्कुलर रोड बंगले को दुग्ध एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। आदेश जारी होने के समय राबड़ी देवी छुट्टी पर बाहर थीं। लेकिन पटना हवाई अड्डे पर उतरने के बाद जब पत्रकारों ने उनसे इस बारे में पूछा, तो वह बिफर पड़ीं।
उन्होंने कहा, ''मैं देख सकती हूं कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनकर काफी उत्साहित हैं। उनकी सरकार चाहे तो मुझे बलपूर्वक बेदखल कर दे। मैं घर खाली नहीं करने वाली।'' गौरतलब है कि जिस घर में वह एक दशक से अधिक समय से रह रही हैं, वह उन्हें जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री होने के चलते आवंटित किया था। वह वर्ष 1997 में बिहार की मुख्यमंत्री बनी थीं।
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को सरकार ने पिछले साल नवंबर में पहली बार घर खाली करने के लिए कहा था, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे। उस समय भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 10, सर्कुलर रोड तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को आवंटित किया जा रहा है। हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेता सिन्हा, जो मंत्रिमंडल में तो हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री का पद खो चुके हैं, कभी भी उस सुविधाजनक स्थान पर नहीं जा सके क्योंकि राबड़ी देवी ने बंगला छोड़ने से इनकार कर दिया था।
मंत्री लेशी सिंह क्या बोलीं
इधर भवन निर्माण मंत्री और जद(यू) की वरिष्ठ नेता लेशी सिंह ने इस ताजा विवाद पर कहा कि पहले का आदेश, जिसके तहत हार्डिंग रोड स्थित 39 नंबर का बंगला विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष को आवंटित किया गया था, अब भी लागू है। मंत्री ने कहा कि इसलिए राबड़ी देवी के लिए उस घर में स्थानांतरित होना बेहतर होगा। लेशी सिंह ने कहा, ‘हमें इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि उन्होंने पहले के आदेश का पालन किया था या नहीं। लेकिन, सच्चाई यह है कि इन बंगलों को किसी भी गणमान्य व्यक्ति को आवंटित करना सरकार का विशेषाधिकार है। कोई भी व्यक्ति किसी बंगले पर अपना अधिकार नहीं जता सकता। हमें उम्मीद है कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते राबड़ी देवी इस बात को समझेंगी और उसी के अनुसार कार्य करेंगी।’




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