संजीव, तारिणी और मुमुक्षु चौधरी; किसी IAS ने कमीशन खाया तो किसी ने दिया ठेका, भ्रष्ट रिशुश्री का हाई प्रोफाइल कनेक्शन
ईडी की रिपोर्ट के आधार पर एसवीयू ने अब तक आईएएस संजीव हंस, मुख्य अभियंता तारिणी दास, संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, बीएमएसआईसीएल के डीजीएम (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की है।

बिहार में भ्रष्ठ ठेकेदार रिशुश्री पर जांच एजेंसियों का शिकंजा पूरी तरह कसा हुआ है। सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार करने वाले कई चेहरे जांच एजेंसियों ने सामने लाए हैं। इनमें चर्चित ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े कई चेहरों की पहचान हो चुकी है, जबकि कई अधिकारी-कर्मी जांच एजेंसी की रडार पर हैं। ईडी की रिपोर्ट के आधार पर एसवीयू ने अब तक आईएएस संजीव हंस, मुख्य अभियंता तारिणी दास, संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, बीएमएसआईसीएल के डीजीएम (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की है। पूछताछ के बाद जांच का दायरा और बढ़ेगा। कई चौंकाने वाले नाम सामने आने के आसार हैं।
रिशु श्री के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण से उसके कई सरकारी अधिकारी व कर्मियों के संपर्कों का खुलासा होने की उम्मीद है। हालांकि, गुप्त बातचीत को लेकर नये तरीके आजमाए जाने की संभावना को देखते हुए जांच एजेंसियां लोकेशन ट्रेसिंग तकनीक भी आजमा सकती है। इस तकनीक की मदद से बगैर बातचीत भी लोकेशन देख कर व्यक्ति की पहचान कायम की जा सकती है।
संजीव हंस, आईएएस
जल संसाधन, ऊर्जा सहित अन्य विभागों में सचिव रहते रिशु श्री की कंपनी को कमीशन लेकर फायदा पहुंचाने का आरोप है। उन पर ईडी, एसवीयू और सीबीआई ने मनी लांड्रिंग व भ्रष्टाचार की तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर रखी है, जिनमें जांच चल रही है। जेल से छूटने के बाद फिलहाल निलंबन मुक्त होकर राजस्व पर्षद में अपर सचिव पद पर तैनात हैं।
तारिणी दास, भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता
27 मार्च 2025 को ईडी की छापेमारी में उनके आवास से 8.50 करोड़ नकद बरामद हुए थे। बाद में उनको बर्खास्त कर दिया गया। तारिणी 31 अक्टूबर 2024 को भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (उत्तर) पद से सेवानिवृत हुए थे। हालांकि विभाग ने 09 नवंबर 2024 को उन्हें इसी पद पर दो साल के लिए पुन: संविदा नियोजित कर लिया था।
उमेश कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता
ईडी की रिपोर्ट पर एसवीयू ने 09 अप्रैल 2026 को इन पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि उमेश सिंह के द्वारा रिशुश्री कंपनी मेसर्स रिलायबल सहित अन्य ठेकेदारों से उनके बिल भुगतान के एवज में रिश्वत प्राप्त की जाती थी। उमेश सिंह के आवास एक करोड़ रुपया नकद जब्त किया गया था।
मुमुक्षु चौधरी, बिहार प्रशासनिक सेवा के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी
ईडी ने 27 मार्च 2025 को उनके आवास पर भी छापेमारी की थी। इनके आवास से करीब दो करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। मुमुक्षु चौधरी पर सीतामढ़ी व सहरसा में नगर आयुक्त रहते कमीशन लेकर रिशु की कंपनियों को भ्रष्ट तरीके से ठेके देने का आरोप है। वर्तमान में वित्त विभाग में संयुक्त सचिव पद पर तैनात हैं। एसवीयू ने उनके विरुद्ध कांड दर्ज किया है, जिसमें जांच चल रही है।
पंकज कुमार, बीएमएसआईसीएल के डीजीएम (प्रोजेक्ट)
एसवीयू ने 12 मार्च 2026 को इनके तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। 32 लाख रुपये नकद सहित 1.31 करोड़ रुपये के आभूषण बरामद हुए थे। इस छापेमारी को भी रिशुश्री कनेक्शन से जोड़ कर देखा जा रहा है।
ये अधिकारी भी निशाने पर
भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, बुडको, बीएमएसआईसीएल (बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम सहित अन्य विभागों के तैनात रहे तत्कालीन आईएएस, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व इंजीनियर निशाने पर हैं। ईडी ने 27 मार्च को भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता (उत्तर) तारिणी दास व मुमुक्षु चौधरी सहित आधा दर्जन पदाधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी में इन अधिकारियों द्वारा ठेके में कमीशन व अवैध बिलों को पास कराने के एवज में कमीशन राशि लिए जाने की जानकारी मिली थी।




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