फर्जी आधार कार्ड और बिहार में रोहिंग्या-बांग्लादेशियों के घुसपैठ का खेल, गिरोह लेडीज का कर रहा यूज
एसएसबी की महिला विंग को आए दिन ऐसे मामले मिलते हैं जिनमें कम उम्र की लड़कियों या महिलाओं को सीमा पार करते पकड़े जाने पर उनके पास मौजूद दस्तावेज संदिग्ध पाए जाते हैं। गिरोह अक्सर किसी महिला को स्थानीय अभिभावक या मां के रूप में पेश कर फर्जी वंशावली बनवाते हैं।
नेपाल और बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ की बुनियाद फर्जी दस्तावेजों पर बनाई जाती है। सीमा के दोनों ओर पहचान के जाली दस्तावेज बनाने वाले गिरोह सक्रिय हैं। घुुसपैठियों के आवास प्रमाणपत्र से पासपोर्ट तक नकली बना लिए जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने घुसपैठ रोकने के साथ ही इस फर्जीवाड़े पर नकेल कसने की दोहरी चुनौती है। सीमांचल के अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और उत्तर बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, मधुबनी, सीतामढ़ी जिलों में फर्जी दस्तावेज बनाने का धंधा तेजी से जड़ें जमा रहा है।
इन इलाकों में जाली दस्तावेज बनाने वालों, नशे व हथियारों के सौदागरों और मानव तस्करी करने वाले गिरोहों का गठजोड़ सिंडिकेट की तरह काम करने लगा है। इसमें होने वाली अवैध कमाई का लालच इस पार के लोगों को भी इस दलदल में धकेल रहा है। सीमांचल में बीते कुछ महीनों में एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने सीमाई इलाकों में छापेमारी की है।
खुफिया इनपुट के आधार पर 33 से अधिक जालसाजों को गिरफ्तार किया गया। ये फर्जी आधार कार्ड व अन्य कागजात बनाने के रैकेट में शामिल थे। जांच में सामने आया है कि ये गिरोह जाली दस्तावेज बनाकर न केवल स्थानीय लोगों को ठग रहे हैं, बल्कि विदेशी नागरिकों विशेषकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलाने का काम कर रहे हैं।
आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह पर संयुक्त कार्रवाई
किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड की मलिनगांव पंचायत के जिया पोखर थाना क्षेत्र स्थित गिला बारी गांव में छह जून 2025 को फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह पर एसएसबी और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की थी। मुख्य सरगना धरा गया और कंप्यूटर स्कैनर आदि जब्त किया गया था। ठाकुरगंज एसडीपीओ ने बताया कि इस कांड के फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है।
मानव तस्करी के लिए महिलाओं का इस्तेमाल
बिहार-बंगाल में काम करने वाले एनजीओ की सदस्य पारोमिता पाल बताती हैं कि सीमाई इलाकों में नकली दस्तावेज तैयार कर मानव तस्करी की जा रही है। एसएसबी की महिला विंग को आए दिन ऐसे मामले मिलते हैं जिनमें कम उम्र की लड़कियों या महिलाओं को सीमा पार करते पकड़े जाने पर उनके पास मौजूद दस्तावेज संदिग्ध पाए जाते हैं। गिरोह अक्सर किसी महिला को स्थानीय अभिभावक या मां के रूप में पेश कर फर्जी वंशावली बनवाते हैं।




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