बिहार में नाबालिग को पीएम आवास, परिवहन विभाग में भी करोड़ों का राजस्व नुकसान; कैग रिपोर्ट
पटना और गोपालगंज में डीलरों के नाम पर आपस में ही बीएस-चार वाहनों का पंजीकरण किया गया। ई-चालान में 203 करोड़ का मामला लंबित रखा गया। वाहन सॉफ्टवेयर में क्रय की तारीख गलत लिखे जाने के कारण 4.35 करोड़ का नुकसान हुआ। डीलरों पर 13.97 करोड़ अर्थदंड लगाया जाना था।

बिहार में सीएजी की रिपोर्ट सामने आने के बाद कई विभागों में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना में वर्ष 2019 से 2022 के बीच चार जिले में 21 ऐसे परिवार को आवास स्वीकृत हुआ, जिनके पास पहले से पक्का मकान था। इन्हें 24.30 लाख का भुगतान हुआ। वहीं, नाबालिग को भी आवास स्वीकृत हुआ, जिनके माता-पिता जीवित है। इन्हें ढाई लाख का भुगतान हुआ। सीएजी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक तरफ जहां अपात्र लोगों को आवास का लाभ दिया गया, वहीं कई पात्र परिवार भी इसके लाभ से वंचित रह गये।
परिवहन विभाग में करोड़ों का नुकसान
परिवहन विभाग के अधिकारी व कर्मियों की लापरवाही के कारण सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। गुरुवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पटना और गोपालगंज में डीलरों के नाम पर आपस में ही बीएस-चार वाहनों का पंजीकरण किया गया। ई-चालान में 203 करोड़ का मामला लंबित रखा गया। वाहन सॉफ्टवेयर में क्रय की तारीख गलत लिखे जाने के कारण 4.35 करोड़ का नुकसान हुआ। डीलरों पर 13.97 करोड़ अर्थदंड लगाया जाना था।
गैर परिवहन वाहनों के लिए कर और शुल्क के तौर पर सरकार को 85.20 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता जो नहीं हो सका। माल वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण की अनुमति देने से 57 लाख का नुकसान हुआ। ट्रैक्टर-ट्रेलरों के मालिकों को अनियमित तरीके से सर्वक्षमा योजना का लाभ देने से 1.62 करोड़ का नुकसान हुआ। स्थायी परमिट के नाम पर 28.09 करोड़ का नुकसान हुआ। फिटनेस प्रमाण पत्र में नवीनीकरण शुल्क में 2.27 करोड़ का नुकसान हुआ। नमूना जांच में 50.40 करोड़ का नुकसान हुआ।
वित्त मंत्री ने पेश किया कैग रिपोर्ट
वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने गुरुवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में प्रश्नोत्तर काल के बाद सीएजी की चार लेखा परीक्षा रिपोर्ट को सदन पटल पर रखा। इसके पूर्व इन रिपोर्ट की प्रति महालेखाकार (लेखापरीक्षा-II) हाउतिनल्ल स्वानतक एवं वरिष्ठ उप महालेखाकार अजय कुमार झा, उप महालेखाकार सुजय कुमार सिन्हा तथा उप महालेखाकार पीयूष कुमार राय की ओर से विधान परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को सौंपा गया। अब, इन रिपोर्ट पर बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति चर्चा करेगी।
चार खंडों में सौंपी गई रिपोर्ट में कृषि, परिवहन, खनन, राजस्व तथा शैक्षणिक अवसंरचना से जुड़े मामलों में अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। लेखा खंड-1 में बकाये लेखा का जिक्र किया गया है। राजस्व वसूली की स्थिति को भी चिंताजनक बताया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 961 इकाइयों में से 66 की जांच हुई। जांच में 3546.95 करोड़ के सैरातों का निपटारा नहीं होने का मामला प्रकाश में आया है।
कृषि इनपुट सब्सिडी. चिह्नित क्षेत्र से ज्यादा भुगतान
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में दस ऐसे जिलों में 21.48 करोड़ की कृषि इनपुट सब्सिडी का भुगतान किया गया, जिन्हें आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं किया था। इसके अतिरिक्त, 14 अन्य जिलों के आवेदकों को 4.03 करोड़ रुपये का भुगतान उन क्षेत्रों के नाम पर किया गया, जो चिह्नित आपदा प्रभावित सूची में शामिल नहीं थे। रबी और खरीफ सीजन 2019 और 2020 के दौरान 151.92 करोड़ की सब्सिडी ऐसे क्षेत्रों में वितरित की गई, जो चिह्नित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक थे।




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