सावधान रहें! बिहार में सुबह नौ बजे से 12 बजे तक सबसे ज्यादा सड़क हादसे, तेज रफ्तार जिंदगी पर पड़ रही भारी
सबसे अधिक हादसे शाम के छह बजे से नौ बजे के बीच 17 फीसदी हो रहे हैं। इसके बाद शाम के तीन से छह बजे के बीच 16.47 फीसदी हादसे हो रहे हैं, जबकि सुबह नौ से 12 बजे के बीच 15.55 फीसदी हादसे हो रहे हैं।

बिहार में सुबह-शाम अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर सुबह के नौ से 12 बजे और शाम के छह बजे से रात नौ बजे के एक तिहाई सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इन दुर्घटनाओं में 18 से 45 वर्ष के 60 फीसदी युवा हादसों के शिकार हो रहे हैं। मरने वालों में पैदल चलने वाले अधिक हैं। मिजोरम के बाद देश में बिहार दूसरे पायदान पर है, जहां हादसों में सबसे अधिक मौतें हो रही हैं। राज्य की सड़कों में अकेले 40 फीसदी से अधिक हादसे एनएच पर हो रहे हैं।
पुलिस-परिवहन की रिपोर्ट के अनुसार रोजी-रोजगार के चक्कर में घर से निकलने और फिर शाम में घर लौटने की जल्दीबाजी में वाहन चालक यातायात नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। सबसे अधिक हादसे शाम के छह बजे से नौ बजे के बीच 17 फीसदी हो रहे हैं। इसके बाद शाम के तीन से छह बजे के बीच 16.47 फीसदी हादसे हो रहे हैं, जबकि सुबह नौ से 12 बजे के बीच 15.55 फीसदी हादसे हो रहे हैं। सुबह छह से नौ नौ बजे के बीच 14.52 फीसदी तो दिन के 12 से तीन बजे के बीच 12.90 फीसदी हादसे हो रहे हैं। वहीं रात के तीन बजे से सुबह छह बजे के बीच 9.95 फीसदी हादसे हो रहे हैं। सबसे कम हादसे रात के 12 से तीन बजे के बीच मात्र चार फीसदी हादसे हो रहे हैं।
सड़क हादसों में 18 से 25 वर्ष के बीच लगभग 22 फीसदी युवाओं की मौत हो रही है। 25 से 35 वर्ष के बीच लगभग 21 फीसदी तो 35 से 45 वर्ष के बीच वाले लगभग 17 फीसदी लोगों की मौत हो जा रही है। 45 से 50 वर्ष के बीच लगभग नौ फीसदी तो 18 वर्ष से कम उम्र में सात फीसदी नाबालिग अपनी जान गंवा रहे हैं। मरने वालों में लगभग 20 फीसदी महिलाएं तो 80 फीसदी पुरुष हैं। इन हादसों में लगभग 68 फीसदी लोगों की मौत ओवर स्पीडिंग (तेज गति) के कारण हो रही है। स्पष्ट है कि सड़कों पर लोग गति सीमा का पालन नहीं कर रहे हैं।
जबकि 17 फीसदी लोगों की मौत गलत दिशा में गाड़ी चलाने के कारण हो रही है। कुल हादसों में 31 फीसदी पैदल चलने वाले वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। 27 फीसदी दोपहिया वाहन चालक तो पांच फीसदी साइकिल सवार हादसों के शिकार हो रहे हैं। ऑटो में सफर के दौरान पांच फीसदी, पांच फीसदी कार सवार, दो फीसदी ट्रक सवार तो एक फीसदी बस सवार हादसों के शिकार हो रहे हैं।
वर्ष-हादसे-मौत
2020-8639-6699
2021-9553-7660
2022-10801-8898
2023-11014-8873
2024-11612-9124
मार्च 2025-3098-2482




साइन इन