RJD reached Supreme Court against voter list revision in Bihar challenging the decision of Election Commission बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची आरजेडी, चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची आरजेडी, चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती

बिहार मंं चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन के फैसले को चुनौती देते हुए तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी ने सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। इलेक्शन कमीशन के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसकी जानकारी राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने दी।

Sun, 6 July 2025 08:51 PMsandeep लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची आरजेडी, चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती

बिहार में चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन के फैसले के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एएनआई के मुताबिक आरजेडी की ओर से राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) के कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सह सांसद डा. मनोज झा ने याचिका दायर कर एसआइआर पर रोक लगाने की मांग की है।

उन्होंने निर्वाचन आयोग और एसआइआर की प्रक्रिया पर प्रश्न खड़े किए हैं। राजद सांसद ने कहा है कि आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में एसआइआर के लिए अभी न तो पर्याप्त समय है और न ही निर्वाचन आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज सभी नागरिकों के पास उपलब्ध हैं। कुछ वैध दस्तावेजों (आधार-कार्ड, राशन-कार्ड, मनरेगा जाब-कार्ड आदि) को इस प्रक्रिया में स्वीकार नहीं करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।

इससे पहले Association for Democratic Reforms एसोशिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने भी चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल है। कोर्ट में दाखिल याचिका में अचानक पूरे राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम को रोकने की मांग की गई है।

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इससे पहले तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन के नेताओं ने बिहार निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन को रोकने की मांग की थी। इस बाबत एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

महागठबंधन के नेताओं की ओर से चुनाव आयोग से ग्रामीण और वंचित तबकों के हित में अन्य प्रामाणिक दस्तावेजों को भी स्वीकार्य बनाने पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। ऐसा न होने पर सड़कों पर आंदोलन करने की चेतावनी दी गई। आयोग से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि क्या आयोग को केवल 11 दस्तावेज मांगने का ही अधिकार है? संविधान का अनुच्छेद 326, व्यस्क मताधिकार का आधार तय करता है।

उन्होने कहा कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड आदि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में अस्वीकार्य क्यों है। चार करोड़ से अधिक निवासी अन्य राज्यों में स्थायी और अस्थायी कार्य करते हैं। क्या 18 दिन में वो अपना सत्यापन करा पाएंगे? क्या सरकारी स्तर पर उन्हें बिहार लाने की कोई योजना है अथवा उनके वोट काटना उद्देश्य है?

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