गूगल पर सबसे ज्यादा पोर्न नेता देखते हैं; महिला आरक्षण पर चर्चा में ये क्या बोल गए पप्पू यादव
लोकसभा सांसद पप्पू यादव ने सदन में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान कहा कि महिलाओं के साथ यौन शोषण करने में सबसे ऊपर नेताओं का नंबर आता है। पोर्न देखने में नेता सबसे आगे हैं।

Pappu Yadav Lok Sabha Porn: लोकसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एक चौंकाने वाला बयान दे दिया। सांसद ने दावा किया कि पोर्न देखने में नेता सबसे आगे हैं। गूगल पर सबसे ज्यादा पोर्न नेता ही देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के साथ यौन शोषण करने वालों में भी पहले नंबर पर नेता ही आते हैं। सैकड़ों सांसदों पर यौन शोषण के आरोप लग चुके हैं और उनमें से कई चार्जशीटेड भी हैं।
पप्पू यादव ने गुरुवार रात को सदन में दिए गए अपने संबोधन में कहा कि 755 सांसदों पर यौन शोषण का आरोप लग चुका है। 155 सांसद पर चार्जशीट है। सबसे ज्यादा भारत में यदि किसी यौन शोषण का आरोप है, उनमें पहले नंबर पर नेता आते हैं। फिर बाबा और अफसर आते हैं।
उन्होंने कहा कि हम लोग महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं। हमाम में सब नंगे हैं। सबसे ज्यादा गूगल पर पोर्न देखने की प्रवृत्ति नेताओं में ही है। सिनेमा, मीडिया से लेकर कॉर्पोरेट जैसे सेक्टर में 80 प्रतिशत महिलाओं के साथ यौन शोषण के मामले दर्ज नहीं हो पाते हैं।
महिला आरक्षण के पक्ष में लेकिन...
पप्पू यादव ने कहा कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में हैं। हालांकि, उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण पर संविधान संशोधन और परिसीमन का बिल लाने के लिए संसद के 3 दिन का सत्र बुलाने की क्या जरूरत थी। इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर ना किसी विशेषज्ञ समिति से चर्चा की गई। ना ही राज्यों से परामर्श किया गया और ना किसी समिति को इसे चर्चा के लिए सौंपा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को भौगोलिक क्षेत्रों का ज्ञान ही नहीं है और परिसीमन करने जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि जातिगत जनगणना होने के बाद इस बिल को लागू किया जाए।
महिलाओं की पूजा, लेकिन इज्जत नहीं- पप्पू यादव
पप्पू यादव ने अपने संबोधन में जिक्र किया कि देश में महिलाओं की पूजा तो हुई लेकिन उन्हें इज्जत नहीं मिली। सती प्रथा, विधवा प्रथा, दहेज, भ्रूण हत्या, बांझ, खिलाड़ियों का शोषण, घरेलू हिंसा आदि महिलाओं के साथ हुई। आज दिन तक महिलाओं को सम्मान नहीं मिल पाया। अहिल्या से लेकर कौशल्या तक का सम्मान नहीं हुआ, सावित्री बाई फुले का घर जला दिया था। सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग आज महिलाओं की बात करते हैं, उन्होंने ही उनकी शैक्षणिक, राजनीतिक, सामाजिक आजादी को घर में ही कैद कर रखा है।




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