आर्थिक सर्वेक्षण: पेट्रोल-डीजल की खपत में पटना आगे; शहरीकरण में बिहार राष्ट्रीय औसत से बहुत कम
बिहार में शहरीकरण की दर बढ़ी है। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। 2026 में बिहार की शहरीकरण दर 15.3 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 36.1 फीसदी है। पटना के अलावा गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर तेजी से बढ़ रहे हैं।

बिहार की आर्थिक विवरणी राज्य में जिलों के बीच विषमता दर्शाती है। कुछ जिलों में तेज वृद्धि और अधिक खपत हो रही है, तो अन्य में परिणाम धीमी है। ईंधन की खपत का पैटर्न भी राज्य के जिलों में अलग-अलग है। पटना पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस तीनों की खपत में अन्य जिलों से आगे है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पेट्रोल की प्रति व्यक्ति सर्वाधिक 18.6 मीट्रिक टन की वार्षिक खपत पटना में थी।
इसके बाद 12.5 मीट्रिक टन मुजफ्फरपुर और 11.7 मीट्रिक टन पूर्णिया में थी। दूसरी ओर, सबसे कम 5.6 मीट्रिक टन लखीसराय, 5.6 मीट्रिक टन बांका और 6.1 मीट्रिक टन शिवहर में थी, जो पटना में पेट्रोल की खपत के स्तर के एक तिहाई से भी कम थी। राज्य के पटना, शेखपुरा और औरंगाबाद में डीजल की खपत सर्वाधिक थी। इनमें से हरेक जिले में 2024-25 में प्रति एक हजार व्यक्ति 29 मीट्रिक टन से अधिक वार्षिक खपत थी।
शिवहर, सीवान और कैमूर में 12 मीट्रिक टन से कम डीजल खपत थी। वहीं, ऊर्जा की घरेलू खपत के मूल्यांकन की अप्रत्यक्ष माप के बतौर रसोई गैस की खपत में भी ऐसा ही पैटर्न दिखाई देता है। पटना, बेगूसराय और गोपालगंज में रसोई गैस का सर्वाधिक उपयोग हुआ है। पटना में प्रति एक हजार व्यक्ति पर 25.5 एमटी रसोई गैस की वार्षिक खपत थी।
बिहार में शहरीकरण दर 15.3 फीसदी
बिहार में शहरीकरण की दर बढ़ी है। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। 2026 में बिहार की शहरीकरण दर 15.3 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 36.1 फीसदी है। पटना के अलावा गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर तेजी से बढ़ रहे हैं। निकायों के पुनर्गठन से भी शहरी आबादी बढ़ी है। वर्तमान में राज्य में 264 निकाय हैं। यहां नागरिकों की सुविधाएं भी बढ़ी हैं। इससे शहरों की तस्वीर बदली है।
विधानमंडल में सोमवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में यह दावा किया गया है। राज्य के 20 जिलों में वर्षा जल निकासी योजना लागू की गई है। इसके तहत कुल 2,925.27 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जिनमें 2024-25 तक 1,716.75 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत शहरों में चौड़ी-टिकाऊ सड़कों, बेहतर नालियों, पार्कों, घाटों, तालाबों व अन्य शहरी ढांचे के निर्माण और मरम्मत का काम तेज हुआ है।




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