आर्थिक सक्षेक्षण रिपोर्ट: बिहार सरकार का आंतरिक राजस्व सालाना 12.9 फीसदी की दर से बढ़ रहा
राज्य के राजस्व स्रोत में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) का हिस्सा 2020-21 में 52.9% से बढ़ कर 2024-25 में 54.1% हुआ। टैक्स कलेक्शन के अन्य प्रमुख स्रोतों में बिक्री एवं व्यापार कर की 19.7 फीसदी, स्टांप एवं निबंधन शुल्क की 14.9 व वाहन कर की 6.9% हिस्सेदारी रही।
बिहार सरकार का अपने स्रोतों से राजस्व लगातार बढ़ रहा है। पांच वर्षों में इसकी वार्षिक औसत वृद्धि दर 12.9 फीसदी रही। 2020-21 में बिहार को अपने स्रोतों से कुल 36,543 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था। यह 2024-25 में 59,360 करोड़ हो गया है। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान कर राजस्व (टैक्स कलेक्शन) का रहा। यह 30,342 करोड़ से बढ़ कर 53,578 करोड़ हो गया है। सोमवार को विधानमंडल में पेश बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक गत पांच वर्षों में राज्य सरकार की कुल प्राप्ति में आईजीएसटी (समेकित वस्तु एवं सेवा कर) और एसजीएसटी (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) की क्षतिपूर्ति सहित सीजीएसटी का हिस्सा आधे से अधिक रहा है।
राज्य के राजस्व स्रोत में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) का हिस्सा 2020-21 में 52.9% से बढ़ कर 2024-25 में 54.1% हुआ। टैक्स कलेक्शन के अन्य प्रमुख स्रोतों में बिक्री एवं व्यापार कर की 19.7 फीसदी, स्टांप एवं निबंधन शुल्क की 14.9 व वाहन कर की 6.9% हिस्सेदारी रही। विद्युत एवं कर शुल्क का 2.9%, जबकि भूमि राजस्व का 1.1% का योगदान रहा। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक राज्य की अपनी राजस्व प्राप्ति में 2020-21 में 7.9%, जबकि 2021-22 में 6.3% की वृद्धि हुई थी।
मुकाबले 2022-23 में 24.0% की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 2023-24 में इसकी वृद्धि दर 11.3% व 2024-25 में 10.7% हो गयी। 2025-26 में राज्य सरकार के अपने स्रोत से राजस्व 14.1% बढ़ने का अनुमान रखा गया है। इसके विपरीत करेतर राजस्व में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह 2020-21 के 6201 करोड़ से घट कर 2021-22 में 3984 करोड़ रह गया था, लेकिन 2024-25 में बढ़कर 5781 करोड़ हो गया। सबसे अधिक लौह खनन एवं धातु उद्योग से राजस्व प्राप्त हुआ। यह 2020-21 के 1709 करोड़ की तुलना में 2024-25 में 3536 करोड़ हो गया। वहीं ब्याज प्राप्ति घट कर 1467 करोड़ रुपये रह गयी है।
राज्य सरकार की कुल राजस्व प्राप्ति छह साल में दोगुनी
बिहार सरकार की कुल राजस्व प्राप्ति छह साल में दोगुनी से अधिक हो गयी है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक 2020-21 में कुल राजस्व प्राप्ति 1.28 लाख करोड़ रुपये थी, जिसके 2025-26 में लगभग 2.60 लाख करोड़ होने का अनुमान है। इसमें कर राजस्व मुख्य स्रोत के रूप में उभरा है। कुल राजस्व में कर प्राप्ति का हिस्सा 70% से बढ़ कर 84% हो गया है। कर से अलग राजस्व का हिस्सा 5% से घटकर 2% व सहायता अनुदान का हिस्सा 25% से घट 14% रह गया है। कोविड 19 के कारण 2021-22 में राजस्व प्राप्ति में 3.2% की ही वृद्धि हुई थी, जो 2021-22 में 23.9% हो गयी थी। 2022-23 में यह घट कर 8.7% रह गयी, लेकिन 2023-24 में 12% और 2024-25 में 13.1% बढ़ गयी, जो कि राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को दर्शाती है।




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