बिहार में बिजली की खपत प्रति व्यक्ति तीन गुनी हुई, सबसे ज्यादा इस जिले में जरुरत
88 फीसदी उपभोक्ताओं (घरेलू) को सवा सौ यूनिट तक मुफ्त बिजली दे रही सरकार ने वर्ष 2025 में बिहार में अधिकतम 8752 मेगावाट बिजली आपूर्ति कर नया रिकॉर्ड बनाया। राज्य के शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे तो ग्रामीण इलाकों में 22 घंटे रोज आपूर्ति हो रही है।

हाल के वर्षों में बिहार ने बिजली के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। लगभग 12 वर्ष पहले बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत मात्र 134 किलोवाट आवर थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 374 किलोवाट आवर हो गई। सोमवार को विधानमंडल में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, इस अवधि में राज्य में 17 फीसदी सालाना बिजली कनेक्शन बढ़े।
88 फीसदी उपभोक्ताओं (घरेलू) को सवा सौ यूनिट तक मुफ्त बिजली दे रही सरकार ने वर्ष 2025 में बिहार में अधिकतम 8752 मेगावाट बिजली आपूर्ति कर नया रिकॉर्ड बनाया। राज्य के शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे तो ग्रामीण इलाकों में 22 घंटे रोज आपूर्ति हो रही है। वर्ष 2017-18 में 41.60 करोड़ यूनिट की कमी झेल रहा बिहार 2024-25 में 17.6 करोड़ यूनिट सरप्लस राज्य बन गया।
पटना में सबसे अधिक बिजली खपत
बिहार में सबसे अधिक पटना में बिजली खपत हो रही है। राजधानी में सालाना 6969 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली खपत हो रही है। दूसरे पायदान पर गयाजी में 2505 करोड़ यूनिट, तीसरे पर मुजफ्फरपुर में 1807 करोड़ यूनिट की खपत हो रही है।
रोहतास में 1694 करोड़ यूनिट, नालंदा में 1601 करोड़ यूनिट, पूर्वी चम्पारण में 1521 करोड़ यूनिट, भागलपुर में 1391 करोड़ यूनिट, सारण में 1317 करोड़ यूनिट, भोजपुर में 1233 करोड़ यूनिट, औरंगाबाद में 1193 करोड़ यूनिट, बेगूसराय में 1109 करोड़ यूनिट और मधुबनी में 1025 करोड़ यूनिट की खपत हो रही है।
बिजली कंपनी के सेवानिवृत्त निदेशक, हरेराम पांडेय ने कहा कि बेहतर योजना के साथ लक्ष्य पर काम किया गया, जिससे बिजली व्यवस्था बेहतर हुई। बिजली क्षेत्र में हुई तरक्की से न केवल लोगों के रहन-सहन में बदलाव हुआ, बल्कि बिहार में उद्योगों का भी जाल बिछा। लोगों को 24 घंटे तक बिजली मिल रही है। निर्बाध बिजली के लिए सरकार ने कार्ययोजना बनाई है जिसका असर आने वाले दिनों में दिखेगा।




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