बिहार में जरूरत से ज्यादा सोचते हैं 60 फीसदी लोग, सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे
अधिक चिंतन करने में जिन 30 लाख लोगों पर यह सर्वे किया गया है, उनमें 18 लाख से अधिक महिलाएं हैं जो विभिन्न विषयों पर ज्यादा सोचती हैं। इसमें घर में हर दिन सुबह और रात में खाना बनाने से लेकर बच्चों को डांटने तक शामिल है।

बिहार के 60 फीसदी लोग जरूरत से ज्यादा सोचने पर अपना समय बर्बाद करते हैं। करीब 50 फीसदी लोग तो सोशल मीडिया पर लाइक्स नहीं मिलने के अनेक पहलुओं पर सोचते रहते हैं। 40 फीसदी लोग रेस्टोरेंट में क्या खाना है, यह फैसला लेने में भी 20 से 25 मिनट लगा देते हैं। पठन-पाठन या काम के विषयों पर लोग कम सोचते हैं, बल्कि इधर-उधर की बातों पर सोचने में ज्यादा समय लगाते हैं। ये बातें महिला विकास मंत्रालय के सर्वे में सामने आई हैं।
सर्वे की मानें तो ज्यादातर लोग 24 घंटे में चार से पांच घंटे केवल सोचने में निकाल दे रहे हैं। सर्वे में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, नौकरीपेशा, बिजनेस करने वालों को शामिल किया गया था। यह सर्वे 15 जुलाई से 15 अगस्त तक किया गया। इसमें 30 लाख 90 हजार 675 लोग शामिल हुए। इसके लिए मंत्रालय की वेबसाइट पर एक लिंक दिया गया था।
इस लिंक को खोलने पर 15 प्रश्नोत्तर थे। जवाब हां और न में देना था। रिपोर्ट की मानें तो राज्य के 40 फीसदी यानी 30 लाख 90 हजार में 15 लाख के लगभग लोग रेस्टोरेंट में खाना चुनने में 20 से 25 मिनट लगा देते हैं। इस काम को ये सबसे कठिन काम मानते हैं। सर्वे में शामिल दस लाख 11 हजार लोगों ने बताया कि जब किसी के लिए गिफ्ट-उपहार खरीदनी होती है तो इसके लिए कई-कई घंटे लगा देते हैं। लेकिन कई बार सही निर्णय नहीं ले पाते हैं।
महिलाएं ज्यादा सोचती हैं
अधिक चिंतन करने में जिन 30 लाख लोगों पर यह सर्वे किया गया है, उनमें 18 लाख से अधिक महिलाएं हैं जो विभिन्न विषयों पर ज्यादा सोचती हैं। इसमें घर में हर दिन सुबह और रात में खाना बनाने से लेकर बच्चों को डांटने तक शामिल है। कामकाजी महिलाएं ऑफिस के सहयोगी और बॉस के किसी बात पर डांटने से ज्यादा सोचने लगती है।
मनोवैज्ञानिक समिधा तिवारी ने कहा कि ज्यादा सोचने से तनाव उत्पन्न होता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। अधिक सोचने पर नियंत्रण रखना चाहिए। वहीं एक अन्य मनोवैज्ञानिक कुमुद श्रीवास्तव ने कहा कि लोगों में दिखावा और खुद को बेहतर मानने की भावना काफी आ गई है। जब कभी इसमें कमी होती है तो सोचना शुरू कर देते है कि क्या करें जो दूसरे उनपर फोकस करें। हर चीजों को परफेक्ट करने में भी लोग ज्यादा सोचते हैं।
सर्वे की खास बात
- 10 फीसदी छात्र अपने पठनपाठन को बेहतर करने के लिए सोचते हैं।
- 15 फीसदी ही नौकरीपेशा लोग अपने काम के बारे में सोचते हैं।
- रिल्स किन टॉपिक्स पर बनायें, इसपर 4 फीसदी युवा समय बर्बाद करते हैं।
- घूमने की योजना बनाने पर तीन से चार घंटे तक मंथन करते हैं।
- कपड़ा पहनने में 35 फीसदी लोग दो से तीन घंटा सोचते हैं।




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