पटना: नीट छात्रा मौत मामले में CBI को ढूंढने होंगे इन सवालों के जवाब, पुलिस से कहां चूक हुई
साथ ही पटना और जहानाबाद में 80 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए और छात्रा व संदिग्धों के मोबाइल फोन के सीडीआर समेत अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। इसके बावजूद मामला अभी तक बेनतीजा रहा। लोग अब सीबीआई जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं।

पटना के मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा से हुई दरिंदगी और मौत के मामले में पुलिस की अब तक की जांच बेनिष्कर्ष रही। 16 दिनों की तफ्तीश और छानबीन के बावजूद भी एसआईटी सच सामने नहीं ला सकी। शुरुआत में पुलिस ने छात्रा की मौत को आत्महत्या बताया और दुष्कर्म की संभावना से इनकार किया। लेकिन पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका सामने आने के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। इसके बाद एसआईटी गठित कर हॉस्टल संचालक, अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य संदिग्धों से पूछताछ की गई।
साथ ही पटना और जहानाबाद में 80 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए और छात्रा व संदिग्धों के मोबाइल फोन के सीडीआर समेत अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। इसके बावजूद मामला अभी तक बेनतीजा रहा। लोग अब सीबीआई जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं। वरीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का प्रस्ताव दिया है। इसलिए केस की जांच की प्रगति मीडिया में साझा करना उचित नहीं है। अब इस पूरे मामले में सीबीआई को कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे।
जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्य संकलित किए जा रहे हैं। पुलिस इन सबूतों और रिपोर्टों को सीबीआई के सुपुर्द कर देगी। मूल रूप से जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पांच जनवरी को घर से हॉस्टल लौटी थी। बेहोशी की हालत में उसे छह जनवरी को स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
सीबीआई से भी न्याय की कम उम्मीद
छात्रा के मामा का कहना है कि घटना के 24 दिन बाद जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद भी परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद कम है।
16 दिन बाद भी नहीं आई पटना एम्स की रिपोर्ट
पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की बात सामने आने के बाद पुलिस ने दुष्कर्म के दृष्टिकोण से मामले की जांच शुरू की थी। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सेकंड ओपिनियन के लिए एम्स, पटना को भेजा गया। वहीं जांच के लिए अन्य साक्ष्य एफएसएल को भेजे गए थे। फिलहाल 16 दिन बीत जाने के बावजूद एम्स की सेकंड ओपिनियन अभी तक नहीं आई है।
एसआईटी ने अब तक 150 लोगों के बयान दर्ज किए
मामले की जांच करीब 50 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की एसआईटी कर रही थी। एसआईटी अब तक 150 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिसमें हॉस्टल संचालक, हॉस्टल मालिक, हॉस्टल की छात्राएं, अस्पताल के डॉक्टर व नर्स, छात्रा के परिजन और संदिग्ध शामिल हैं। 24 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर पुरुष के वीर्य की पुष्टि होने के बाद परिवार सहित 25 लोगों के डीएनए सैंपल लिये गए। व्यापक जांच के बाद भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। पीड़िता के परिवार वाले भी पुलिस की जांच, रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं, जिससे जांच पर सवाल उठ रहे हैं।
CBI ढूंढेगी इन सवालों के जवाब…
● छात्रा के साथ कहां दरिंदगी हुई और किसने किया?
● छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ या किसी एक व्यक्ति ने घटना को अंजाम दिया?
● मामले की जांच में किन पुलिस अधिकारियों ने लापरवाही बरती और क्यों?
● दुष्कर्म से पहले छात्रा को नशे की गोली खिलाई गई या बाद में?
● उसकी मौत किन कारणों से हुई, क्या इलाज में डॉक्टरों ने लापरवाही बरती?
● घटना में कौन-कौन लोग शामिल हैं?
● पीएमसीएच की पोस्टमार्टम और एफएसएल की रिपोर्ट
पुलिस से कहां चूक हुई
● घटना के बाद पुलिस ने जांच में संवेदनशीलता नहीं दिखाई
● पास्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही मौत का कारण नींद की गोलियां खाना बता दिया गया
● छात्रा से दुष्कर्म की घटना को पुलिस ने शुरुआत में नकार दिया
● निजी अस्पताल की रिपोर्ट को ही पुलिस ने सच मान लिया
● शुरुआत में पुलिस जहानाबाद को घटनास्थल बताया, बाद में जांच हॉस्टल-पटना पर केंद्रित कर दिया




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