Nitish JDU may renominate either Harivansh or Ramnath Thakur to Rajya Sabha who will get ticket to Sansad हरिवंश या रामनाथ में एक ही लौटेगा संसद! जेडीयू से किस दूसरे नेता को राज्यसभा भेजेंगे नीतीश?, Bihar Hindi News - Hindustan
More

हरिवंश या रामनाथ में एक ही लौटेगा संसद! जेडीयू से किस दूसरे नेता को राज्यसभा भेजेंगे नीतीश?

Bihar Rajya Sabha Elections Nitish JDU: बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों के चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू 2 सीटें जीत सकती है। चर्चा है कि रिटायर हो रहे हरिवंश या रामनाथ ठाकुर में किसी एक को ही जदयू वापस संसद भेजेगी। एक नया सांसद होगा।

Wed, 25 Feb 2026 02:37 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
share
हरिवंश या रामनाथ में एक ही लौटेगा संसद! जेडीयू से किस दूसरे नेता को राज्यसभा भेजेंगे नीतीश?

Bihar Rajya Sabha Elections Nitish JDU: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) प्रदेश की 5 सीटों के राज्यसभा चुनाव में 2 सीट जीत सकती है और उसके 2 ही सांसद अप्रैल में कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। एक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह हैं और दूसरे भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के बेटे और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर। चर्चा है कि नीतीश की पार्टी से हरिवंश और रामनाथ ठाकुर में कोई एक ही वापस राज्यसभा लौटेगा, दूसरे को रिपीट करने का विचार नहीं है। नीतीश कुमार के मन-मिजाज और अति पिछड़ों की तरफ जेडीयू के राजनीतिक झुकाव को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रामनाथ ठाकुर के तीसरी बार राज्यसभा में पहुंचने के आसार ज्यादा हैं।

केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को नीतीश कुमार ने दिल्ली की राजनीति में भेजने से पहले में भी मौका दिया था। रामनाथ ठाकुर संसदीय राजनीति तक पहुंचने और केंद्र में मंत्री बनने से पहले बिहार की सरकार में नीतीश कैबिनेट के मंत्री रहे हैं। 2014 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे रामनाथ ठाकुर का यह दूसरा कार्यकाल है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने उनके पिता और बिहार के सबसे कद्दावर समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न सम्मान दिया था। ठाकुर राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रहे और जेपी आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे भी। बिहार के सारे समाजवादी नेता उनको अपना गुरु और आदर्श बताते हैं।

कुछेक अपवाद को छोड़ दें तो नीतीश कुमार की जेडीयू का रिकॉर्ड है कि विधानमंडल और संसद के उच्च सदन यानी विधान परिषद और राज्यसभा में आम तौर पर पार्टी किसी नेता को तीसरी बार नहीं भेजती है। उदाहरण में आरसीपी सिंह और वशिष्ठ नारायण सिंह जैसे कद्दावर नेता शामिल हैं। अपवाद में किंग महेंद्रा के नाम से मशहूर दवा उद्योग के बड़े नाम महेंद्र प्रसाद हैं, जिनको तीन बार मौका मिला। किंग महेंद्रा तो यहां तक कहते थे कि अगर जदयू के पास एक सीट भी होगी तो संसद वही जाएंगे। विधान परिषद में संजय गांधी और रामवचन राय को भी तीसरी पारी मिली है।

तीसरी बार टिकट नहीं देने के नियम से रामनाथ ठाकुर फंस सकते हैं, लेकिन अति पिछड़ी जातियों की राजनीति नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग का अहम हिस्सा रहा है। इस बात की पूरी संभावना है कि किंग महेंद्रा की तरह रामनाथ ठाकुर की स्पेशल केस के तौर पर लिए जाएं और तीसरी बार भेज दिए जाएं। रामनाथ ठाकुर के साथ नीतीश और पार्टी के सारे समीकरण पुराने जैसे हैं, यथावत हैं।

जेडीयू के दूसरे सांसद हरिवंश नारायण सिंह भी तीसरी राज्यसभा पारी के लिए नीतीश की ओर देख रहे हैं। राज्यसभा के उपसभापति पद तक पहुंचने वाले जेडीयू के पहले नेता हरिवंश पुराने जमाने के बड़े पत्रकार हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार रहे हरिवंश 2018 से दो कार्यकाल में लगभग 7 साल से राज्यसभा के उपसभापति हैं। नीतीश से हरिवंश की केमिस्ट्री बिगड़ने के संकेत तभी मिलने लगे थे, जब नीतीश एनडीए को छोड़कर 2022 में दूसरी बार महागठबंधन के साथ चले गए थे। तब पार्टी की इच्छा के खिलाफ जाकर हरिवंश राज्यसभा उपसभापति पद पर बने रहे। अब भले नीतीश वापस एनडीए के साथ हैं, लेकिन संवैधानिक पद की मर्यादा का हवाला देकर हरिवंश ने जो पद नहीं छोड़ा था, उस बात का दूरगामी असर अब हो सकता है। जेडीयू में नेताओं का एक धड़ा हरिवंश को जदयू से ज्यादा भाजपा का वफादार समझता है।

दूसरी सीट पर मनीष वर्मा को राज्यसभा भेज सकते हैं नीतीश

नीतीश जेडीयू कोटे की 2 सीटों में एक सीट पर रामनाथ ठाकुर को रिपीट करते हैं या हरिवंश को, ये तो अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा। लेकिन दूसरी सीट के संभावित कैंडिडेट के तौर पर मनीष वर्मा का नाम मजबूती से उभरा है। आरसीपी सिंह की ही तरह आईएएस अफसर रहे मनीष वर्मा भी नीतीश के भरोसेमंद करीबी हैं। आरसीपी सिंह की तरह मनीष वर्मा भी नीतीश के इलाके के हैं और उनकी ही कुर्मी जाति से भी। मनीष जदयू के महासचिव हैं और पार्टी का जमीनी संचालन देखते हैं। कुछ लोग उन्हें नीतीश के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखते हैं। नीतीश के दूसरे भरोसेमंद संजय झा पहले से राज्यसभा में हैं और इस समय पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी। चर्चा है कि संजय झा को भाजपा की सहमति से उपसभापति का पद और मनीष वर्मा को राज्यसभा में मौका मिल सकता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:राज्यसभा चुनाव पर जीतनराम मांझी ने भी खोली जुबान- हमें कहा गया था कि...
ये भी पढ़ें:हिना शहाब को राज्यसभा लड़ाकर ओवैसी का शिकार करेंगे लालू? करीबी MLA ने दिया संकेत
ये भी पढ़ें:हिना शहाब पर तैयार नहीं ओवैसी, अख्तरुल बोले- राज्यसभा में AIMIM को मौका दे RJD
ये भी पढ़ें:4 तो पक्की, 5वीं सीट कैसे जीतेगा NDA? कुशवाहा बता रहे 'विपक्ष' वाला फॉर्मूला

बिहार में क्या है राज्यसभा की 5 सीटों के लिए क्या है समीकरण

बिहार में राज्यसभा के चुनाव नियमों के मुताबिक 5 सीट के चुनाव के लिए अगर 5 से ज्यादा कैंडिडेट हुए तो मतदान होगा। मतदान में 41 विधायक के वोट से एक उम्मीदवार जीत सकता है। एनडीए के पास भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, हम और रालोमो के 202 विधायक हैं। इस हिसाब से उनके 4 सांसद जीत सकते हैं। पांचवें कैंडिडेट के लिए एनडीए को 3 विधायक की कमी है, जो वो विपक्षी खेमे में तोड़फोड़ कर क्रॉस वोटिंग से पूरा कर सकता है।

लालू-तेजस्वी और ओवैसी में एक राज्यसभा सीट पर तकरार

महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, भाकपा-माले, माकपा और आईआईपी के 35 विधायक हैं। इनको एक भी सीट जीतने के लिए 6 विधायकों का समर्थन और चाहिए जो संयोग से असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के 5 और मायावती की बसपा के 1 विधायक के समर्थन के बिना पूरा नहीं होगा। ओवैसी की पार्टी अपना कैंडिडेट देने और लालू यादव और तेजस्वी यादव की राजद समेत गठबंधन के दलों से समर्थन करने का राग छेड़ रही है। जिन 5 सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में पूरा हो रहा है, उसमें 2 राजद के नेता प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह हैं।

लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।