बिहार में सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर नकेल, नई नीति के लिए बनी कमेटी; कौन-कौन सदस्य
विभाग के विशेष सचिव हिमांशु शर्मा के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों को अलग से प्रोत्साहन की व्यवस्था करने तथा सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति लानी है।

सरकारी चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस पर रोक की नीति बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने नीति बनाने को लेकर समिति का गठन कर दिया है। मालूम हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 जनवरी को समृद्धि यात्रा के दौरान इसकी नीति बनाने की घोषणा की थी।स्वास्थ्य विभाग ने निदेशक प्रमुख डॉ. रेखा झा की अध्यक्षता में छह सदस्यसीय कमेटी का गठन किया है।
विभाग के विशेष सचिव हिमांशु शर्मा के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों को अलग से प्रोत्साहन की व्यवस्था करने तथा सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति लानी है।
इस नीतिगत मामले में विचार-विमर्श करने के लिए यह समिति गठित की गई है। कमेटी में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रतिनिधियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। विभाग ने यह भी कहा है कि सात निश्चय 3 के अंतर्गत न्याय के साथ विकास के सिद्धांत के आधार पर ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’ के आलोक में यह पहल की गई है।
पीएमसीएच के अधीक्षक भी होंगे समिति के अध्यक्ष
समिति में पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अधीक्षक को भी अध्यक्ष बनाया गया है। इसी प्रकार नालंदा चिकित्साह महाविद्यालय के प्राचार्य, बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. केके मणी, संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार तथा आईजीआईएमएस नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति प्रसाद सिन्हा समिति के सदस्य बनाये गये हैं।




साइन इन