ना सरकार में कुर्सी, ना पार्टी में पद; नीतीश की JDU में निशांत की राजनीति के लिए कब, क्या?
Nitish Nishant JDU Politics: बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार जेडीयू में शामिल तो हो गए, लेकिन ना तो सरकार में कोई जगह ली और ना पार्टी में कोई पद। निशांत कुमार अटकलबाजों को खूब छका रहे हैं।

Nitish Nishant JDU Politics: बिहार में दो दशक तक सरकार चला चुके पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार राजनीति में आने के बाद से ही अटकलबाजों को छका रहे हैं। नीतीश की अगुवाई वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में महिला दिवस के दिन 8 मार्च को शामिल हुए निशांत को 27 मार्च को कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सक्रिय सदस्यता भी दे दी। लेकिन जेडीयू कोटे से डिप्टी सीएम के तौर पर चर्चा के बावजूद 15 अप्रैल को निशांत ना तो सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी सरकार में शामिल हुए और ना शपथ ग्रहण समारोह में गए। कल 22 अप्रैल को जब नीतीश की जेडीयू की राष्ट्रीय टीम की घोषणा हुई तो निशांत का नाम उसमें भी नहीं आया। ऐसे में कौतुहल है कि जदयू की राजनीति में निशांत के लिए कब और क्या लिखा गया है। नीतीश के बाद निशांत का नंबर कब आएगा, सफर कहां से शुरू होगा।
नई सरकार के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले जेडीयू सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई थी कि निशांत ने डिप्टी सीएम बनने से मना कर दिया है और कहा कि जब तक वो सदन में नहीं पहुंच जाते, सरकार में पद नहीं लेंगे। निशांत ने जदयू में शामिल होने के बाद ही कह दिया था कि वह राज्य का दौरा करेंगे और कल इसका ऐलान हो गया कि 3 मई से वो पश्चिम चंपारण से बिहार के 38 जिलों की यात्रा पर निकलेंगे। यात्रा नीतीश की राजनीतिक ताकत रही है। नीतीश ने 2005 से 2026 तक कुल 16 यात्राएं की हैं। निशांत की यात्रा का नाम और कार्यक्रम नहीं आया है, लेकिन गांधी की कर्मभूमि चंपारण से शुरुआत भी एक राजनीतिक संदेश है।
जदयू में आने के बाद निशांत सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। हर दिन बैठक और मुलाकात की फोटो डाल रहे हैं। उनके एक्स (ट्विटर) हैंडल को देखने पर जो एक बात तुरंत नोटिस में आती है, वो यह कि वो नीतीश के साथ फोटो डालने से बच रहे हैं। सम्राट सीएम बनने और कल दिल्ली से लौटने के बाद जब नीतीश से मिलने गए, तो फोटो में निशांत नहीं दिखे, जबकि वो पिता के साथ रहते हैं। नीतीश या निशांत के सोशल मीडिया पर एक साथ बाप-बेटे के फोटो की संख्या बहुत कम है। इशारों से समझें तो निशांत को नीतीश की परछाई से निकालकर खड़ा करने की तैयारी है।
नीतीश चूंकि परिवारवाद को लेकर लालू यादव को लगातार घेरते रहे हैं, इसलिए वो खुद निशांत को लेकर इस तरह के आरोप से बचना चाहते हैं। यही वजह है कि सीएम पद छोड़ते ही नीतीश ने कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई और बेटे निशांत के बदले जेडीयू कोटे से विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम बनवाया। निशांत पार्टी में सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन जदयू कार्यालय में आयोजित बैठकों में वो बीच वाली कुर्सियों पर नजर आ रहे हैं। पार्टी के कार्यक्रमों और नेताओं की लगातार मुलाकात से समझाया जा रहा है कि पार्टी का अगला नेता कौन है। इसलिए नीतीश की टीम से बेटे को बाहर रखा गया है। नीतीश बेटे को बढ़ाते नहीं दिखना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि ऐसा दिखे कि जेडीयू वाले ही निशांत को लाए और अब वही आगे बढ़ा रहे हैं।
नीतीश की राजनीति में यात्रा का बहुत योगदान है। संकेतों से लगता है कि निशांत के आगे का रास्ता बिहार यात्रा के बाद खुलेगा। निशांत के लिए सरकार या पार्टी में कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे हासिल करने के लिए बहुत कुछ करना जरूरी है। निशांत जब चाहें, वो मिल सकता है। लेकिन जेडीयू पहले उनको राजनीतिक अनुभव हासिल कर चुके नेता के तौर पर स्थापित करना चाहती है। पार्टी संगठन में सक्रियता, नेताओं से मेल-मुलाकात और बिहार यात्रा के जरिए जेडीयू निशांत को खुद के दम पर आगे आया नेता बनाना चाहती है।
बिहार के प्रमुख नेताओं की दूसरी पीढ़ी में शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी, लालू यादव की बेटी मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान, जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश जगह बना चुके हैं। निशांत के सफर में नीतीश का बेटा होने की भूमिका को जेडीयू गौण करने की भरसक कोशिश कर रही है। लेकिन निशांत की पहचान ही नीतीश हैं। नीतीश की योजना में सरकार या दल में निशांत के लिए जो चीजें जब लिखी होंगी, तब मिल जाएंगी। आम कार्यकर्ता नेता बनने के लिए उन चीजों की ओर भागता है। वही चीजें निशांत का इंतजार कर रही हैं। नीतीश का जदयू निशांत के मन बनाने की ऐसी भूमिका बनाने में जुटा है, जिसे कोई परिवारवाद ना कह सके।




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