Residents Struggle with Power Supply Issues Despite High Maintenance Costs बिजली बिल की राशि तो देतेे पूरी,फिर भी गर्मी में आधी नींद सोने की मजबूरी, Muzaffarpur Hindi News - Hindustan
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बिजली बिल की राशि तो देतेे पूरी,फिर भी गर्मी में आधी नींद सोने की मजबूरी

मुजफ्फरपुर में गर्मी के बावजूद बिजली की कटौती बढ़ी है। उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब पूरा बिल दिया जाता है तो फिर क्यों बिजली की कमी सहनी पड़ती है। जर्जर पोल और ट्रांसफॉर्मरों को बदलने की आवश्यकता है।

Fri, 12 June 2026 05:50 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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बिजली बिल की राशि तो देतेे पूरी,फिर भी गर्मी में आधी नींद सोने की मजबूरी

मुजफ्फरपुर। गर्मी से पूर्व मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों खर्च के बावजूद बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को राहत नहीं दे पा रही है। आंधी-पानी के बाद सारी तैयारियां धरी रह जाती हैं। शहर में घंटों तो प्रखंडों में कई दिनों तक आपूर्ति बाधित हो जाती है। लोगों का कहना है कि जब हम बिजली का पूरा बिल देते हैं तो फिर गर्मी में बिजली कटौती क्यों झेलें? लोड शेडिंग और बार-बार फॉल्ट से बिजली आपूर्ति व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। दिन हो या रात, कभी भी बिजली गुल हो जा रही है, जिससे दिनचर्या प्रभावित हो रही है। लोगों ने कहा कि बढ़ती मांग के अनुरूप नए ट्रांसफॉर्मर, फीडर और सबस्टेशन स्थापित किए जाएं। चौबीस घंटे कंट्रोल रूम और मोबाइल मेंटेनेंस टीम सक्रिय रहे, ताकि शिकायत मिलने के तुरंत बाद समाधान हो सके。

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भीषण गर्मी के बीच शहरवासियों की मुश्किलें

भीषण गर्मी के बीच शहरवासियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर बढ़ते तापमान ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही लोड शेडिंग और बार-बार फॉल्ट से बिजली आपूर्ति चरमरा गई है। रात में बिजली कटते ही रतजगे की नौबत आ जा रही है, जबकि दिन में घरों और कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। कई इलाकों में मोटर नहीं चल पाने से पानी की समस्या गहरा रही है। शहरवासियों ने सवाल उठाया है कि जब गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़नी तय है तो व्यवस्था को पहले से दुरुस्त क्यों नहीं किया जाता?

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बार-बार फॉल्ट और अनियोजित कटौती से उपभोक्ताओं में नाराजगी

बार-बार फॉल्ट और अनियोजित कटौती से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। जिले में लगातार बढ़ रही बिजली खपत के बीच कमजोर विद्युत नेटवर्क बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ता लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग, फॉल्ट और बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं। हाल के दिनों में आई आंधी-बारिश के दौरान बड़ी संख्या में बिजली के पोल और ट्रांसफॉर्मरों के क्षतिग्रस्त होने से नेटवर्क की कमजोरियां उजागर हुई हैं। जानकारों के मुताबिक केवल अस्थायी मरम्मत और फॉल्ट दुरुस्त कर देने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जिले में कई स्थानों पर वर्षों पुराने पोल और तार अब भी उपयोग में हैं। तेज हवा या बारिश के दौरान यही कमजोर कड़ियां सबसे पहले प्रभावित होती हैं, जिससे बड़े इलाके की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। वहीं, बढ़ती आबादी और बिजली उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बावजूद कई क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई है। नतीजतन गर्मी के मौसम में ओवरलोडिंग बढ़ जाती है और ट्रिपिंग व ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाएं सामने आती हैं।

प्री-मानसून तैयारियां महज औपचारिकता

लोगों ने कहा कि सबसे पहले जर्जर पोल और पुराने तारों को बदलने की आवश्यकता है। इसके साथ ही ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त फीडर बनाने और नए पावर सबस्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम होना चाहिए। शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में भूमिगत केबलिंग और एबी केबल के उपयोग से भी बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। प्री-मानसून तैयारियों को भी केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय तकनीकी आधार पर कमजोर बिंदुओं की पहचान कर उनका समय रहते सुधार करना जरूरी है। बिजली मांग के अनुरूप नेटवर्क विस्तार और आधुनिकीकरण नहीं होने से हर वर्ष गर्मी और बरसात के दौरान संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग को अब अल्पकालिक उपायों की जगह दीर्घकालिक योजना पर काम करना चाहिए। उनका मानना है कि जर्जर ढांचे के व्यापक नवीनीकरण, क्षमता विस्तार और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ही जिले को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति हो सकेगी, अन्यथा हर वर्ष आंधी, बारिश और बढ़ते लोड के साथ बिजली संकट की समस्या और गंभीर होती जाएगी। अब लोगों की नजर बिजली विभाग पर है। लोगों का कहना है कि चौबीसों घंटे की इस परेशानी से आखिर कब राहत मिलेगी और कब उन्हें निर्बाध बिजली आपूर्ति का भरोसा मिल पाएगा?

हर बार आंधी में धराशायी हो रही बिजली

जिले में हर साल प्री-मानसून तैयारियों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन आंधी और बारिश आते ही बिजली व्यवस्था चरमरा जा रही है। हाल में आई आंधियों में 400 से अधिक बिजली के पोल और 15 ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे प्रखंडों में कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। सबसे बड़ी समस्या जर्जर पोल, कमजोर तारों और ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों की है। गायघाट, मीनापुर और बंदरा जैसे क्षेत्रों में आंधी के 48 घंटे बाद भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी। उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब हर वर्ष प्री-मानसून मेंटेनेंस का दावा किया जाता है तो फिर आंधी के बाद बिजली आपूर्ति बेपटरी क्यों हो जाती है।

बोले जिम्मेदार :

गर्मी में बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतें बढ़ गई हैं। काफी शिकायतें मेरे पास भी पहुंच रही हैं। प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों को तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों को फॉरवर्ड किया जाता है और उनके त्वरित समाधान का निर्देश दिया जाता है। समीक्षा बैठकों में विद्युत व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए जाते रहे हैं। हाल में बढ़ी शिकायतों को देखते हुए अधीक्षण अभियंता को विशेष रूप से आपूर्ति व्यवस्था बेहतर करने, फॉल्ट का शीघ्र निस्तारण करने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सुब्रत कुमार सेन, जिलाधिकारी

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