विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद श्रीकृष्ण सेतु पर मंडरा रहा खतरा
ए नहीं है यह पुल - बावजूद श्री कृष्णा सेतु पर लगातार बढ़ते जा रहा भारी वाहनों का दबाव, भारी वाहनों पर रोक नहीं लग पा रहे जिम्मेदार मुंगेर, निज संवा

मुंगेर, निज संवाददाता। मुंगेर और खगड़िया को जोड़ने वाला श्रीकृष्ण सेतु इन दिनों दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक तरफ भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर परिचालन बाधित होने के कारण उत्तर और दक्षिण बिहार के भारी वाहनों का पूरा दबाव इसी पुल पर आ गया है, तो दूसरी तरफ क्षमता से अधिक भार इसके वजूद के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आलम यह है कि जिस पुल की भार क्षमता वैज्ञानिकों ने अधिकतम 20 टन तय की थी, वहां बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोडेड ट्रक और बालू लदे हाइवा पुल की 'सांसें' फुला रहे हैं।
पुल की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताएँ
पुल की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच 30 जनवरी 2025 को चेन्नई से सीएसआईआर और एसईआरसी के मुख्य वैज्ञानिकों की टीम मुंगेर पहुंची थी। दो दिनों तक चली इस हाई-प्रोफाइल जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या श्रीकृष्ण सेतु भविष्य में भारी वाहनों का रेला झेलने की स्थिति में है या नहीं। टीम ने आधुनिक उपकरणों और सेंसर के जरिए पुल के पिलरों और स्पैन पर पड़ने वाले दबाव का बारीकी से अध्ययन किया था।
180 टन भार देकर हुई थी अग्निपरीक्षाः
जांच प्रक्रिया के दौरान पुल की मजबूती परखने के लिए उस पर एक साथ भारी-भरकम मशीनों और गिट्टी लदे 9 हाइवा खड़े किए गए थे। लगभग 180 टन का कृत्रिम भार देकर यह मापा गया कि पुल कितना झुकता है और तनाव सहने की इसकी क्षमता क्या है। इसके अलावा, 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लोडेड वाहनों को दौड़ाकर कंपन की भी जांच की गई थी। एनएचएआई के अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस परीक्षण के आंकड़े चौंकाने वाले रहे हैं।
20 टन की सीमा, पर नियमों की उड़ रही धज्जियाँ
वैज्ञानिकों ने अपनी प्रारंभिक जांच में स्पष्ट कर दिया था कि यह पुल एकल वाहन के लिए अधिकतम 20 टन तक का भार सहने के लिए ही उपयुक्त है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। विक्रमशिला सेतु पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगने के बाद, सीमांचल और कोसी क्षेत्र से आने वाले भारी ट्रक अब श्रीकृष्ण सेतु को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। 30 से 50 टन तक का भार लेकर गुजरने वाले वाहन पुल के स्ट्रक्चर को कमजोर कर रहे हैं।
माफियाओं का दुस्साहस: उखाड़ फेंके हाइट गेज
पुल को सुरक्षित रखने के लिए पूर्व में प्रशासन ने भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए हाइट गेज लगाए थे। ताकि ऊंचे और अत्यधिक भारी वाहन पुल पर न चढ़ सकें। लेकिन क्षेत्र में सक्रिय बालू माफियाओं और ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट ने अपने मुनाफे के लिए इन सरकारी सुरक्षा घेरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। वर्तमान में, भारी वाहनों को रोकने वाला कोई ठोस अवरोधक पुल पर मौजूद नहीं है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
खतरे की घंटी: क्यों जरूरी है सख्ती
इंजीनियरों का मानना है कि यदि ओवरलोडेड वाहनों का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो पुल के जोड़ों और बेयरिंग में तकनीकी खराबी आ सकती है। गंगा की लहरों पर टिका यह सेतु मुंगेर प्रमंडल की जीवनरेखा है। अगर इसके अस्तित्व पर कोई आंच आती है, तो न केवल मुंगेर और खगड़िया, बल्कि पूरे पूर्वी बिहार का सड़क संपर्क ध्वस्त हो जाएगा।
आमजन की परेशानी और प्रशासन की चुप्पी
हालिया टेस्टिंग के दौरान जब घंटों परिचालन बंद रहा, तो यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पैदल पुल पार करते लोग और एम्बुलेंस की कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि यह सेतु कितना महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके, भारी वाहनों के अवैध परिचालन पर लगाम कसने में जिला प्रशासन और पुलिस विफल साबित हो रही है।
रखी जा रही नजर, पकड़े जाने पर होगी कार्रवाई
श्रीकृष्ण सेतु पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकांश बड़े वाहनों को बेगूसराय के साइड से ही डायवर्ट कर दिया गया है। श्रीकृष्ण सेतु से यदि कोई तय मानक से अधिक भार वाला ट्रक या वाहन गुजरता है, तो उसके विरुद्ध निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से बातचीत की जा रही है।
- निखिल धनराज, डीएम, मुंगेर।
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बरियारपुर फोटो 1- बरियारपुर चौक पर जाम में फसी ट्रक
बरियारपुर में वाहनों का दबाव बढ़ा,तीन बटिया चौक पर लग रहा जाम
बरियारपुर, निज संवाददाता। बरियारपुर में एनएच-80 पर वाहनों की संख्या बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तीन बटिया चौक पर बड़े वाहनों के गुजरते ही सड़क पूरी तरह जाम हो जाती है। इससे स्थानीय लोगों, दुकानदारों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जाम के कारण ट्रेन पकड़ने वाले यात्री समय पर स्टेशन नहीं पहुंच पा रहे हैं। वाहनों की भीड़ में पैदल बाजार जाना भी जोखिम भरा हो गया है। तीन बटिया चौक पर दोनों ओर से बड़े वाहन आने पर पूरी तरह जाम लग जाता है। छोटे वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि बरियारपुर चौक पर यातायात नियंत्रण के लिए एक महिला सिपाही की तैनाती की गई है, लेकिन वाहनों का दबाव अधिक होने पर वह भी नाकाफी साबित हो रही है। चौक पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है।
वाहनों के लगातार हॉर्न और धुएं से लोग परेशान हैं। स्थानीय निवासी संतोष मंडल, प्रमोद कुमार और कपिल मंडल ने बताया कि, सड़क पार करना खतरे से खाली नहीं है। स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। जाम के कारण ऑटो-टोटो भी नहीं चल पा रहे। लोगों का कहना है कि ट्रेन पकड़ने के लिए दो घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है, फिर भी जाम की आशंका बनी रहती है। कई बार यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है।
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