Vikramshila Bridge design flawed experts explain why bridge slab collapsed UPBCL negligence exposed डिजाइन में गड़बड़ी से गिरा विक्रमशिला सेतु, एक्सपर्ट ने पकड़ी यूपी पुल निगम की खामी, Bihar Hindi News - Hindustan
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डिजाइन में गड़बड़ी से गिरा विक्रमशिला सेतु, एक्सपर्ट ने पकड़ी यूपी पुल निगम की खामी

टूटे स्लैब स्थल की जांच में बीआरओ और पुल निगम के अभियंताओं ने गड़बड़ी पाई कि स्लैब को रखने की जगह काफी छोटी थी, इसलिए स्लैब गिर गया। पुल के डिजाइन में काफी गड़बड़ी है।

Fri, 8 May 2026 11:18 AMSudhir Kumar हिन्दुस्तान, भागलपुर, मुख्य संवाददाता
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डिजाइन में गड़बड़ी से गिरा विक्रमशिला सेतु, एक्सपर्ट ने पकड़ी यूपी पुल निगम की खामी

बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के निर्माण में कार्य एजेंसी ने कोताही बरती थी। सेतु के स्लैब गिरने के बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम एवं सीमा सुरक्षा बल की टीम की जांच में सामने आया कि निर्माण करने वाली एजेंसी यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने मानकों को धता बताते हुए विक्रमशिला सेतु बनाया था। टूटे स्लैब स्थल की जांच में बीआरओ व पुल निगम के अभियंताओं ने गड़बड़ी पाई कि स्लैब को रखने की जगह काफी छोटी थी, इसलिए स्लैब गिर गया। अब जांच टीम यह पता लगा रही है कि यह हाल सभी स्लैब में तो नहीं अपनाई गई? खासकर उन पिलरों के पास जहां का साइड वॉल दरक रहा है।

पुल निगम के स्ट्रक्चरल इंजीनियर एवं ब्रिज एक्सपर्ट आलोक भौमिक ने साफ कहा कि गलती सिर्फ एक जगह नहीं हुई है। टीम ने तो पुल के लेवल के डिजाइन पर भी सवाल उठा दिया है। ब्रीज एक्सपर्ट ने कहा कि सेतु की सड़क देखिए। ऐसा लगता है मानो गंगा की लहरें उठ रही हैं। इसी तरह बनाई गई फर्श भी पुल की सेहत पर खतरा बना रही है। उस वक्त किसने नक्शा पास किया? क्या तकनीक अपनाई गई? इसका न तो जवाब मिलेगा, न ही समाधान। अब हमें नये सिरे से नई तकनीक अपनाकर पुल को बचाना है।

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पुल की बीम के अंदर की गई जांच के बाबत बीआरओ अधिकारियों ने बताया कि बॉक्स की जांच में पाया गया कि अंदर एलीगेटर क्रैकिंग हो रहा था। एलीगेटर क्रैकिंग भारी यातायात, कमजोर आधार, खराब जल निकासी से होता है। हालांकि बीम का अंदरूनी भाग दुरुस्त है, इसी में प्री फैब्रिकेटेड (बेली ब्रिज) का बेस तैयार करते हुए पुल को मोटरेबल बनाया जाएगा। इंजीनियरों ने गुरुवार को भी पुल के फर्श की नापी की है, ताकि यह पता चल सके कि कितनी चौड़ाई में बेली ब्रिज तैयार हो पाएगा। बेली ब्रिज से संबंधित रिपोर्ट पटना को उपलब्ध करा दी गई है। जहां उच्चस्तरीय जांच के बाद फाइनल होगा कि स्टील पाइल ब्रिज मॉडल में पुल तैयार करना है या बेली ब्रिज मॉडल का। इसी के अनुरूप राशि जारी होगी और काम शुरू होगा।

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साढ़े तीन मीटर चौड़ा ब्रिज तैयार होगा: डीएम

भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि विक्रमशिला सेतु पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लगभग तीन से साढ़े तीन मीटर चौड़ा स्कैफोल्डिंग ब्रिज शीघ्र तैयार कर लिया जाएगा। इसके संचालन के दौरान ट्रैफिक रेगुलेशन की आवश्यकता होगी, जिसमें एक ओर से वाहनों के आवागमन के दौरान दूसरी ओर वाहनों को रोका जाएगा। डीएम ने बताया कि कहलगांव से तीनटंगा-गोपालपुर जलमार्ग के माध्यम से ट्रक एवं छोटी गाड़ियों का परिचालन कराया जाएगा। स्कैफोल्डिंग ब्रिज एक विशेष प्रकार का अस्थायी निर्माण मंच है, जो दो अलग-अलग स्कैफोल्डिंग टावरों को जोड़कर एक लंबा और सुरक्षित वॉकवे बनाता है। यह मुख्य रूप से ऊंचे स्थानों, पुलों या बड़ी इमारतों के निर्माण और रखरखाव में काम आता है, जहां सामान्य मचान लगाना मुश्किल होता है।

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