18 लाख को पहली, 1 करोड़ से ज्यादा जीविका दीदी और महिलाओं को दूसरी किश्त नहीं मिली; तेजस्वी का दावा
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, ‘बिहार की महिलाओं के साथ NDA सरकार ने विश्वासघात किया है, सफेद झूठ बोल उनकी भावनाओं का दोहन कर करोड़ों महिलाओं के साथ दिनदहाड़े धोखेबाजी की है।’

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत जीविका दीदियों और अन्य महिलाओं को दिए गए पैसों को लेकर बिहार सरकार पर हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट कर दावा किया है कि 18 लाख महिलाओं को इस योजना की पहली किश्त और 1 करोड़ से ज्यादा जीविका दीदियों और अन्य महिलाओं को दूसरी किश्त नहीं मिली है। यहां आपको बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लाखों महिलाओं के खाते में दस-दस हजार रुपये भेजने का दावा किया गया था। इस योजना को स्वीकृति 30 अगस्त 2025 को बिहार कैबिनेट ने दी थी। सात सितंबर को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस योजना की शुरुआत की थी।
पहली बार 26 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 75 लाख महिलाओं के खाते में दस-दस हजार रुपये डाले थे। करीब एक हफ्ते बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 25 लाख महिलाओं के खाते में दस-दस हजार रुपये का भुगतान किया था। इसके बाद 28 नवंबर को भी दस लाख महिलाओं के खाते में राशि भेजी गई थी। बिहार में चुनाव खत्म हुए 5 महीने से कुछ ज्यादा का वक्त हुआ है। बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर को जबकि रिजल्ट 14 नवंबर को आया था। अब तेजस्वी यादव ने चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में भेजे गए पैसे और दूसरी किश्त को लेकर सवाल उठाया है।
तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, 'बिहार की महिलाओं के साथ NDA सरकार ने विश्वासघात किया है, सफेद झूठ बोल उनकी भावनाओं का दोहन कर करोड़ों महिलाओं के साथ दिनदहाड़े धोखेबाजी की है। बिहार विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा होते ही, बीच चुनाव में मतदान के दिन तक, बैंक खुलवाकर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एनडीए सरकार ने महिलाओं और जीविका दीदियों के बैंक खातों में 10 हजार रुपये भेजे।
उन्हें लालच देकर, कड़ी चेतावनी और धमकी के साथ डरा कर कहा गया कि मतदान केंद्र में कैमरा लगा है अगर अमुक पार्टी के अमुक निशान पर बटन नहीं दबायेंगे तो आपके खाते में आए पैसे वसूलेंगे। प्रलोभन दिया गया कि चुनाव के बाद आगे की दो लाख की किश्त मिलेगी। उम्मीद दी गई कि चुनाव के बाद छह महीने के अंदर शेष दूसरी किश्त को अविलंब महिलाओं के खाते में भेजा जाएगा। छह महीने हो गए हैं अब ये धोखेबाज़-दग़ाबाज़ नेता अपनी कुर्सी के खेल में लीन हैं। खजाना खाली है। वित्तीय स्थिति बदतर है।
चुनाव बाद पूर्व से इस योजना में पंजीकृत 18 लाख महिलाओं को न तो पहली किश्त के रुपये मिले और न ही 1 करोड़ 81 लाख जीविका दीदियों और महिलाओं को दूसरी किश्त मिली। जबकि चुनाव के समय वादा किया गया था कि इस योजना के तहत महिलाओं को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे।अब बिहार का खजाना खाली है। केवल चुनावी लाभ लेने के लिए एनडीए ने बिहार की मातृशक्ति के साथ धोखेबाजी की है, उनके बाल-बच्चों के वर्तमान और भविष्य के साथ खिलवाड़ की है। युवाओं के सपनों का कत्ल किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों को जोखिम डाल दिया है। बिहार में अराजक स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।
सरकार जानती थी कि बिहार के पास सीमित संसाधन होने के बावजूद उधार लेकर चुनावों के अंतिम दिनों में वोट लूटने के लिए विभिन्न मदों में 41,000 करोड़ रुपए नगद बांटना आत्मघाती कदम है लेकिन कुर्सी के लालची लोगों ने राज्यहित पर स्वार्थ को प्राथमिकता दी। एजेंसियों में फंसे भ्रष्ट चंद अधिकारियों और बिहारी अस्मिता को दो बाहरियों के कदमों में गिरवी रखे रीढ़विहीन नेताओं को आम बिहारियों की नहीं बल्कि ख़ुद के वर्तमान और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की चिंता थी जिसके कारण उन्होंने बिहार का सौदा किया।'




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