LPG Crisis: गैस नहीं, रोजी-रोटी पर संकट; फैक्ट्रियों पर ताला, करोड़ों का कारोबार प्रभावित
व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से बेला व मोतीपुर औद्योगिक क्षेत्र की दो दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों पर ताला लग गया है। कारीगर व मजूदरों के समक्ष नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

गैस का संकट जिले में और गहरा गया है। इससे लोगों की दिनचर्या खराब हो रही है। वे पूरे दिन गैस सिलेंडर की तलाश में भटक रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर जहां आम उपभोक्ता परेशान हैं, वहीं व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से बेला व मोतीपुर औद्योगिक क्षेत्र की दो दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों पर ताला लग गया है। कारीगर व मजूदरों के समक्ष नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
दोनों क्षेत्रों की प्रोसेसिंग यूनिट, बेला में लोहे व स्टील के सामग्री उत्पादन, नमकीन उत्पादन, कार्टन निर्माण समेत अन्य यूनिट इसमें शामिल है। बीते दो दिनों से यह स्थिति है। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति ठप होने से घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। शनिवार को मिठनपुरा स्थित एक रेस्टोरेंट में जिला प्रशासन की टीम ने छापेमारी कर घरेलु गैस सिलेंडर बरामद किया है। जिला प्रशासन रेस्टोरेंट संचालक के खिलाफ एफआईआर करने और उसे सील करने तैयारी में है।
रोजगार बचाने की चुनौती
उधर, इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले बड़ी संख्या में मजूदरों और कारीगरों को रोजगार बचाने की चुनौती का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा उत्पादन कम होने का सीधा प्रभाव बाजार पर पड़ेगा। उत्पादन कम और डिमांड अधिक होने से फूड प्रोसेसिंग व छोटे स्तर के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से बनने वाले सामान जैसे कुर्सी, पाइप, अलमारी, पानी टंकी आदि के दाम भी बढ़ सकते हैं। वर्तमान में व्यावसायिक गैस का विकल्प पीएनजी, डीजल और बिजली है, लेकिन इससे खर्च बढ़ने व उत्पाद के दाम वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उत्तर बिहार उद्यमी संघ के सदस्यों का कहना है कि व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से काफी नुकसान भी हो रहा है। दो दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों का उत्पादन ठप हो गया है। इससे 25-30 करोड़ रुपये प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
मेडिकल में मरीजों के परिजन भी परेशान
रसोई गैस की किल्लत से आम जनता ही नहीं, एसकेएमसीएच में भर्ती मरीजों के परिजन भी परेशान हैं। सौ रुपये किलो का गैस तीन सौ रुपये में खरीद रहे हैं। मेडिकल के पास गैस की कालाबजारी धड़ल्ले से हो रही है। सीतामढ़ी की रीता ठाकुर ने बताया एक सप्ताह से मरीज भर्ती है। साथ में चार लोग रह रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व सो रुपये में एक किलो गैस लिये थे। शनिवार को तीन सौ रुपये किलो गैस मिला है। होटल में भी खाना महंगा हो गया है। शिवहर की सविता देवी व खूबलाल पासवान ने बताया दो सप्ताह से मरीज के साथ हैं। पांच सौ रुपये में मेडिकल के बाहर किसी तरह दो किलो गैस मिला है।
सीतामढ़ी की संगीता देवी, नूरजहां खातून व उर्मिला देवी ने बताया कि मरीज को अस्पताल से खाना मिल जा रहा है, लेकिन मरीज के साथ दो लोग रह रहे हैं। आज गैस के लिए गए थे, गैस नहीं मिला। गैस के कारण खाना नहीं बना है। रात में कुछ खा लेंगे, फिर कल देखा जाएगा।
पुलिस लाइन मेस पर गैस सिलेंडर की किल्लत की मार
गैस की किल्लत का असर पुलिस लाइन और जेल के मेस पर भी पड़ा है। हालांकि, अभी बहुत गंभीर स्थिति नहीं है। पुलिस लाइन के सूत्रों की मानें तो गैस के खर्च में कटौती की गई है। प्रशिक्षु सिपाहियों के मेस में शनिवार शाम गैस सिलेंडर की कमी थी। रविवार की सुबह में ही गैस खत्म होने की आशंका जताई जा रही है। इसी तरह जेल में कैदियों के मेष पर गैस की किल्लत का असर देखा जा रहा है। जेल सूत्रों की मानें तो हर दिन यहां 10 से 12 गैस सिलेंडर की खपत है। एजेंसी से गैस सिलेंडर की लगातार आपूर्ति का आग्रह किया गया है।
गैस की कमी से करोड़ों का कारोबार प्रभावित
व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा के कारण मुजफ्फरपुर में प्रतिदिन 100-125 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है। होटल, स्टील फेब्रिकेशन, रंगाई उद्योग सीधे-सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा होस्टल, निजी लॉज और मेस चलाने वाले उद्यमियों को भी परेशानी हो रही है। कारोबारियों ने आशंका जतायी है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो कई चीजों की कीमत बढ़नी तय है। वहीं, गैस की होम डिलीवरी नहीं होने से घरेलू उपभोक्ताओं का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।
शहर में इंडक्शन चूल्हे की मांग बढ़ने लगी है। मांग बढ़ने से कंपनियों ने कीमत में भी बढ़ोतरी कर दी है। कई ब्रांडेड इंडक्शन दुकान से आउट ऑप स्टॉक हो गया है। विक्रेताओं के अनुसार प्रतिदिन शहर में दो सौ से अधिक इंडक्शन की बिक्री हो रही है। तिलक मैदान रोड के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के संचालक प्रमोद कुमार जाजोदिया ने बताया कि दुकानों में पुराने इंडक्शन की कीमत नहीं बढ़ी है, लेकिन नये आने वाले इंडक्शन की कीमत 10-15 फीसदी तक महंगी हो गई है। ऑर्डर भेज रहा हूं, लेकिन कंपनी ऑर्डर नहीं ले रही है। कह रही है कि नया माल बढ़ी हुई कीमत पर ही मिलेगा। इधर, मोतीझील की एक गृहणी सरिता गट्टानी ने बताया कि जब से गैस की किल्लत हुई है उपयोग कम कर दी है। उसकी जगह इंडक्शन का उपयोग करती हूं। कहा कि मैं चाय, नास्ता बनाने में इंडक्शन का ही उपयोग करती हूं।




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