LPG की किल्लत से पटन में प्लास्टिक उद्योग बंद होने के कगार पर, स्टील का उत्पादन भी गिरा; निवाले के भी लाले
मध्य-पूर्व में जंग और गैस की कमी का बुरा असर पटना के उद्योग-धंधों पर भी पड़ा है। पटना सिटी के प्लास्टिक ओर इससे संबंधित उद्योग व फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर है। वहीं फतुहा में स्टील उद्योग में उत्पादन में 50 % तक की गिरावट आई है।

मध्यपूर्व में बीते 15 दिन से जारी जंग का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखने लगा है। चीजें महंगी हो रही हैं। दुकानदार कह रहे हैं कि यह सब गैस और अन्य सामान की आपूर्ति लड़खड़ाने के चलते है। वहीं सरकार का कहना है कि हालात इतने बुरे नहीं है। केंद्र ने शनिवार को कहा कि लोग अफवाहों के फेर में ना पड़ें और डर में खरीदारी ना करें। हालांकि, बाजार में घबराहट का माहौल है। खाने-पीने की वस्तुएं सहित कुछ चीजों के दाम बढ़े हैं। प्लास्टिक दाने की आपूर्ति लड़खड़ाने से सिरिंज, कैनुला, प्लास्टिक पाइप के दाम भी बढ़े हैं।
मध्य-पूर्व में जंग और गैस की कमी का बुरा असर पटना के उद्योग-धंधों पर भी पड़ा है। पटना सिटी के प्लास्टिक ओर इससे संबंधित उद्योग व फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर है। वहीं फतुहा में स्टील उद्योग में उत्पादन में 50 % तक की गिरावट आई है। यहां काम करने वाले मजदूरों को पूरी मजदूरी भी नहीं मिल रही है। आवक कम होने से प्लास्टिक दानों (कच्चा माल) के दाम में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। इसका असर कारखानों पर पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह में प्लास्टिक दानों के दाम में तीस से चालीस फीसदी की तेजी आयी है।
कारोबारियों का कहना है कि यदि युद्ध एक सप्ताह और चला तो अधिकतर कारखानों में ताला लग जाएगा। कारोबारी प्रदीप सिंह यादव का कहना है कि पहले दाना 125 रु किलो था जो 200 रुपया प्रति किलो है। बाहर से माल नहीं आने और कालाबाजारी से दाम तेजी से बढ़े हैं। कई कंपनियों ने माल देने से भी हाथ खड़े कर दिये। ऐसे में सिटी क्षेत्र में प्लास्टिक की कुर्सी, बाल्टी, मग, कंघी, ऐनक, डब्बा, कैरीबैग के कारखानों में उत्पादन ठप होने का खतरा मंडराने लगा है।
युद्ध का असर पेट्रोलियम पदार्थों पर तेजी से पड़ा है। ईरान के रास्ते आने वाले केमिकल के दाम काफी बढ़ गए हैं। साबुन, क्रीम में उपयोग होने वाला ग्लिसरीन नब्बे रुपए लीटर से बढ़कर एक सौ अस्सी रुपए हो गया है। पेट्रोलियम जेली, फिनाइल तेल, बोरिक पाउडर समेत कई केमिकल की आपूर्ति नहीं होने से इसमें बीस से पच्चीस फीसदी तेजी आयी है। कारोबारियों का कहना है कि कई केमिकल का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। ऐसे में दवा समेत कई उद्योग प्रभावित होंगे।
फतुहा:उत्पादन आधा घटा
फतुहा इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्रियों में कामगारों के लिए मेस में भोजन बनाने के लिए कोयले-लकड़ियों का उपयोग हो रहा है। भोजन का मेन्यू कम हो गया है। पटवारी स्टील फैक्ट्री के प्रबंधक मधुसूदन प्रसाद ने बताया कि इसका असर उत्पादन पर भी पड़ा है। 50% उत्पादन कम हुआ है। मजदूरों ने बताया कि नियमित मजूदरी पर संकट है।
अब निवाले के भी लाले
पटना के कौशल नगर स्लम बस्ती में तीन हजार परिवार के लगभग दस हजार लोग हैं। यहां पर 90% घरों में गैस कनेक्शन भी है। लेकिन, गैस की किल्लत से 60% घरों में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बन रहा है। लकड़ी का जुगाड़ सुबह से ही शुरू हो जाता है। बस्ती के बगल में वन विभाग का डिपो है। बस्ती की तमाम महिलाएं सुबह से ही डिपो के अलावा आसपास के इलाके में जाकर लकड़ी चुनने को निकल जाती है।
कई परिवार बाजार से लकड़ी खरीद भी रहे हैं। बस्ती के शंकर कुमार और उनकी पत्नी सुगनी देवी ने बताया कि गैस एक सप्ताह पहले खत्म हो गयी। भरा सिलेंडर नहीं मिला। नंबर लगाए सात दिन से अधिक हो गये है। अब ईंट जोड़ कर लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। वहीं बस्ती की एक बुर्जुग महिला जानकी देवी ने बताया कि वेंडर खाली सिलेंडर लेकर चला गया है। दस दिन से ज्यादा हो गया, लेकिन अबतक भरा हुआ सिलेंडर नहीं दिया है। उम्र अधिक होने से वो लकड़ी के चूल्हे पर खाना नहीं बना पा रही है। वार्ड पार्षद आशीष शंकर ने बताया कि लोग लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं।




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