स्कूल, हॉस्टल, आंगनबाड़ी में LPG किल्लत से गैस चूल्हे बंद; लकड़ी जलाकर खाना पका रहे रसोइया
बिहार में एलजीपी संकट से स्कूल, हॉस्टल और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन व्यवस्था चरमरा गई है। गैस सिलेंडर की किल्लत झेल रहे रसोइए लकड़ियां जलाकर मजबूरी में जैसे-तैसे खाना पका रहे हैं।

Bihar LPG News: ईरान युद्ध से मध्य-पूर्व में आए संकट के बीच भारत में एलपीजी गैस की किल्लत हो गई है। बिहार के स्कूल, छात्रावासों और आंगनबाड़ी केंद्रों की रसोइयां भी इससे प्रभावित हुई हैं। राज्य में कई स्कूलों में लकड़ी के चूल्हे पर मिड डे मील बनाया जाने लगा है। वहीं, राज्य के आधे आंगनबाड़ी केंद्रों में भी एलपीजी गैस सिलेंडर नहीं मिलने से संकट आ गया है। आंगनबाड़ी सेविकाएं अब लकड़ियां जलाकर खाना पका रही हैं। पटना के विभिन्न हॉस्टलों के कैंटीन और मेस में भी गैस सिलेंडर की कमी देखी जा रही है।
बिहार में एक लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां छोटे बच्चों को रोजाना गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। ग्रामीण और शहरी, लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर गैस चूल्हे पर ही खाना पकाया जा रहा है। एलपीजी संकट से आंगनबाड़ी सेविकाओं के सामने परेशानी आ गई है। सेविकाओं द्वारा बीते 10 दिनों से नंबर लगाने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है। गैस सिलेंडर खत्म हो जाने से अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों पर खाना तैयार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि बिहार में लगभग आधे आंगनबाड़ी केंद्रों पर गैस सिलेंडर की किल्लत हो गई है। हर आंगनबाड़ी केंद्र को गैस सिलेंडर के लिए 910 रुपये मिलते हैं। परेशान सेविकाओं ने आईसीडीएस को भी इसकी जानकारी दी है।
दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में मिड डे मील सेवा भी प्रभावित हुई है। गैस सिलेंडर की किल्लत से स्कूलों में रसोइये अब लकड़ी के चूल्हों पर खाना पका रहे हैं। राजधानी पटना के हॉस्टलों में भी गैस सिलेंडर ना मिलने से परेशानी हो रही है। एम्स के नर्सिंग स्टाफ को इंडक्शन खरीद कर खाना पका रहे हैं।
दीदी की रसोई में भी सिर्फ चाय से काम चलाया जा रहा है। गैस नहीं मिलने से खाना पकाना बंद है। पटना में सिर्फ पीएमसीएच और एससी-एसटी छात्रावास में 30 फीसदी कटौती कर गैस सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है। निजी हॉस्टल संचालक भी वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।
एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार ने पिछले दिनों 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 20 प्रतिशत तक सीमित कर दी थी। साथ ही इसके दाम में भी 144 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। दूसरी ओर, 14 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की जमाखोरी एवं कालाबाजारी रोकने के लिए उस पर भी सप्लाई को सीमित किया गया है। आलम यह है कि पटना समेत राज्य भर के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग पिछले एक सप्ताह से सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं।
(पटना से हिन्दुस्तान टीम की रिपोर्ट)




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