लैंड फॉर जॉब केस में मार्च से चलेगा ट्रायल, लालू-राबड़ी और तेजस्वी को कोर्ट से एक राहत भी
Land For Job Case: दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई है। लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। इसके अलावा इस मामले में आरोपी लालू यादव की बेटी मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत तौर से अदालत में हाजिर हुईं।

Land For Job Case: देश के चर्चित लैंड फॉर जेब केस में लालू परिवार के लिए आज का दिन काफी अहम रहा। आज दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई है। लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। इसके अलावा इस मामले में आरोपी लालू यादव की बेटी मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत तौर से अदालत में हाजिर हुईं। बताया जा रहा है कि अदालत ने जमीन के बदले नौकरी घोटाले में मार्च के महीने से मुकदमा चलाने की अनुमति दी है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 9 मार्च से केस का ट्रायल शुरू होगा। इस दौरान जांच एजेंसी सबूत भी पेश करेगी। इसके अलावा कोर्ट से लालू परिवार के कुछ सदस्यों को राहत भी मिली है। लालू प्रसाद यादव ने अपनी बढ़ती उम्र को देखते हुए अदालत में व्यक्तिगत पेशी से राहत मांगी थी। तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी ने भी व्यक्तिगत पेशी से राहत मांगी थी। सभी को व्यक्तिगत पेशी से फिलहाल राहत मिल गई है।
जमीन के बदले नौकरी घोटाले में अदालत ने की थी कड़ी टिप्पणी
आपको बता दें कि इसी महीने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें।
उन्होंने कहा था कि इसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की। आदेश के मुख्य हिस्से को मौखिक रूप से सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा था कि सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट से “गंभीर संदेह के आधार पर एक व्यापक साजिश’’ का खुलासा होता है। उन्होंने लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों समेत आरोपियों द्वारा बरी किये जाने की याचिका को भी ‘‘अनुचित’’ बताते हुए खारिज कर दिया था और इस बात पर जोर दिया था कि पूर्व रेल मंत्री और अन्य लोग ‘‘भूमि हड़पने के लिए एक संगठित आपराधिक समूह की तरह काम कर रहे थे।’’
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला
अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया था। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था। आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं।
इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन तोहफ़े में दी या हस्तांतरित की। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।




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