ट्रायल फेस करेंगे; लालू-राबड़ी ने आरोपों से किया इनकार, लैंड फॉर जॉब केस में कोर्ट में हाजिर हुए
राउज एवेन्यू कोर्ट में देश के चर्चित नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले में सुनवाई थी। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और बिहार विधान परिषद में नेता विरोधि दल कोर्ट में उपस्थित हुए।

बिहार के पूर्व सीएम सह राष्ट्रीय जनता दल के बड़े चेहरे लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को हाजिरी लगाई। लैंड फॉर जॉब घोटाला केस मे चार्ज फ्रेमिंग के बाद उन्हें सदेह हाजिर होकर चार्ज के मुद्दे पर अपना पक्ष रखना था। कोर्ट ने मामले के सभी अभियुक्तों को उपस्थित होने का आदेश दिया है। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और मीसा भारती पहले ही उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। दोनों नेताओं ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस मामले में 9 मार्च से नियमित सुनवाई की जाएगी।
सोमवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में देश के चर्चित नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले में सुनवाई थी। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और बिहार विधान परिषद में नेता विरोधि दल कोर्ट में उपस्थित हुए। राबड़ी देवी देवी खुद चल कर गईं तो लालू प्रसाद यादव को व्हील चेयर पर बैठाकर ले जाया गया। दोनों के पहुंचते ही अदालत परिसर में गहमागहमी का माहौल बन गया। कांड से जुड़े लोगों के अलावे राजद के नेता, कार्यकर्ता और लालू के समर्थक भी जुट गए।
सूत्रों के मुताबिक कोर्ट में हाजिर होने पर लालू यादव और रबड़ी देवी से आरोपों को लेकर पूछा गया तो साफ कर दिया गया कि आरोप उन्हें स्वीकार नहीं है। वे इस मामले में कोर्ट में ट्रायल फेस करेंगे। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। करीब 20 मिनट की कार्यवाही के बाद दोनों ने दस्तखत किया और निकल गए। पाटलिपुत्र सांसद और बेटी मिसा भारती भी माता, पिता के साथ कोर्ट में मौजूद रहीं।
मीसा भारती ने बताया साजिश
पत्रकारों से बात करते हुए सांसद मीसा भारती ने कहा कि मामला कोर्ट में है और हमें कोर्ट पर विश्वास है कि हमें न्याय मिलेगा। एक ही केस में बहुत से केस बनाकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। न्यायालय से जब भी जैसा आदेश आएगा उसे पूरा किया जाएगा। लेकिन, लालू जी को एनडीए परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि लालू जी बीमार हैं पर कोर्ट का सम्मान करते हुए उपस्थित होकर अपनी बात रखी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला रेलवे भर्ती से संबंधित है। इसमें वर्ष 2004 से 2009 तक यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर लोगों को जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप है। लालू पर आरोप है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए ही बिना कोई विज्ञापन जारी कर रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के लिए कई लोगों की भर्ती की थी। लालू के दबाव में ऐसे लोगों को ग्रुप-डी की नौकरियां दी गईं, जो अपना नाम तक नहीं लिख सकते थे। सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी थी कि चयनित अभ्यर्थियों ने या तो लालू यादव, उनके परिजनों या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर जमीन उपहार में दीं या कम कीमत पर बेची थीं। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने बताया था कि नौकरी पाने वाले सभी अभ्यर्थी बिहार के बेहद गरीब तबके से थे। उनके पास जो दस्तावेज थे, वे फर्जी स्कूलों से जारी हुए थे।




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