किलो में सोना-चांदी-हीरा, नोटों के बंडल, 61 सेल डीड; पटना के ठेकेदार रिशु की संपत्ति देख SVU चौंक पड़ी
पटना के मीठापुर स्थित रिशुश्री के फ्लैट की जांच में एसवीयू को 61 सेल डीड के कागजात, करीब दो करोड़ रुपये मूल्य का सवा किलो सोना, चांदी, हीरा और ढाई लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

बिहार में सरकारी ठेके में भ्रष्टाचार के मामले में सरकार की विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने ठेकेदार रिशु श्री के ठिकाने को खंगाला। पटना के मीठापुर स्थित रिशुश्री के फ्लैट की जांच में एसवीयू को 61 सेल डीड के कागजात, करीब दो करोड़ रुपये मूल्य का सवा किलो सोना, चांदी, हीरा और ढाई लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। सम्राट चौधरी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह ऐक्शन लिया गया है। जांच एजेंसी ठेकेदार की अन्य संपत्तियों की पता लगा रही है। इस कार्रवाई से बिहार के ठेकेदारी महकमें में हड़कंप मच गया है। रिशु के कुछ आईएएस अधिकारियों से कनेक्शन की भी चर्चा है। इसकी भी जांच की जा रही है।
रिशुश्री पर सरकारी निविदाओं में हेरफेर कर अपनी कंपनी को लाभ पहुंचाने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। एसवीयू ने उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 30 अप्रैल 2025 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इस कांड में बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस भी आरोपित हैं।
ईडी की जांच में भी मिले थी यह संपत्तियां :
एसवीयू की जांच से पहले नवंबर 2025 में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी रिशु श्री के ठिकानों की जांच की थी। इस दौरान भी 51 लाख रुपये नकद सहित दो करोड़ रुपये मूल्य का सोना और 61 सेल डीड के कागजात बरामद हुए थे। रिशु श्री के विरुद्ध सबसे पहले केंद्र सरकार की जांच एजेंसी ईडी ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी। रिशु श्री के कई आईएएस सहित उच्च पदस्थ अधिकारियों से अच्छे संबंध रहे। इसका फायदा उठाते हुए उसने जल संसाधन, नगर विकास और भवन निर्माण सहित बिहार सरकार के कई विभागों में अधिकारियों को कमीशन देकर ठेके लिए।
ईडी सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारियों को विदेश यात्राएं भी कराई और उनके निजी खर्च मैनेज किए। ईडी ने मनी लांड्रिंग में दर्ज मामले में रिशुश्री व आईएएस संजीव हंस को आरोपित बनाते हुए उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की। बाद में ईडी की अनुशंसा पर एसवीयू ने अप्रैल 2025 में ठेकेदार व आईएएस पर भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। इसके बाद कोर्ट की अनुमति लेकर बुधवार को उनके आवासीय परिसर की जांच की गयी।
ठेकेदार रिशु पर आरोप है कि वह अफसरों के साथ मिलीभगत करके पूरी टेंडर प्रक्रिया को सेट कर देता था। इसमें सरकारी राशि का घपला कर अपनी कंपनी के साथ पूरे रैकेट को लाभ पहुंचाता था। जांच में यह बात सामने आई है कि निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं के माध्यम से आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया गया। पहले इस मामले में की ईडी के द्वारा की गई थी। ईडी की जांच में जो तथ्य आए उसके आधार पर विस्तृत जांच की सिफारिश की गई। छापेमारी के दौरान पुलिस टीम द्वारा दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कागजातों की गहन जांच की जा रही है।




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