विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने से सीमांचल व कोसी में निर्माण सामग्रियों के मूल्यों में वृद्धि
विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने से सीमांचल व कोसी में निर्माण सामग्रियों के मूल्यों में वृद्धि विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने से सीमांचल व कोसी में निर्माण स

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होकर गिरने का असर अब सीमांचल, कोसी और उत्तर बिहार के बाजार पर साफ दिखने लगा है। पुल बंद होने से निर्माण सामग्री, खासकर ब्लैक स्टोन चिप्स के दाम में तेज बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे घर और सड़क निर्माण महंगा होना तय माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक झारखंड के साहिबगंज, पाकुड़ और पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट से प्रतिदिन एक हजार से अधिक ट्रक स्टोन चिप्स लेकर इसी पुल के रास्ते उत्तर बिहार पहुंचते थे। अब पुल बंद होने के कारण इन ट्रकों को मुंगेर के नए पुल और बेगूसराय होते हुए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे 150 से 160 किलोमीटर तक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर ढुलाई लागत पर पड़ रहा है।
अतिरिक्त दूरी के कारण 20-30 रुपये सीएफटी की वृद्धि
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अतिरिक्त दूरी और समय के कारण प्रति सीएफटी (क्यूबिक फीट) ब्लैक स्टोन में 20 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, फेरा बढ़ने से ईंधन, समय और परिचालन लागत में इजाफा हुआ है, जिसका बोझ अंतत: उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। उधर गिट्टी बालू के धंधा से जुड़े भारत यादव, अमित शर्मा, गोलू शर्मा एवं बबलू साह ने बताया कि सौ सीएफटी पर दो हजार बालू में तथा तीन हजार गिट्टी में उछाल आया है।
निर्माण क्षेंत्र पर असर पड़ना तय
इस स्थिति का असर निर्माण क्षेत्र पर पड़ना तय है। मकान बनाने की लागत बढ़ेगी, वहीं सड़क और अन्य सरकारी परियोजनाओं की लागत भी बढ़ सकती है। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो अगले छह माह तक यह संकट बना रह सकता है। पुल बंद होने से रेलवे पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है। स्टोन चिप्स की आपूर्ति बनाए रखने के लिए अब रेल रैक की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। सिर्फ निर्माण सामग्री ही नहीं, बल्कि उत्तर बिहार से अंग क्षेत्र तक जाने वाले लीची, अनाज और हरी सब्जियों की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। परिवहन में देरी और लागत बढ़ने से इन वस्तुओं के दाम में भी उछाल आने की आशंका है।
फोटो कैप्शन। कटिहार- 14 कुरसेला के बालू मंडी में लगी गिट्टी लदी ट्रक
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रूट परमिट की पेच में रास्ते में फंसा दर्जनों मालवाहक वाहन
कटिहार, निज प्रतिनिधि
व्यवसायिक उपयोग के सामान का परिवहन करने वाले मालवाहक ट्रकों व वाहनों के लिए रूट परमिट होना अनिवार्य है। खासकर दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए रूट परमिट को जरूरी है। किसी तरह की आपात स्थिति में अस्थायी परमिट लेकर दूसरे मार्ग से मालवाहक वाहनों का परिचालन किया जा सकता है। बताते चलें कि भागलपुर में विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से रूट परमिट की पेच में कटिहार सहित कोसी, सीमांचल के विभिन्न जिलों तक जाने वाला बड़ा वाहन बीच रास्ते में ही फंसा हुआ है। जानकारी के मुताबिक गिट्टी, बालू सहित अन्य खनन संबंधी सामान का परिवहन करने वाले वाहनों के लिए रूट परमिट पूरी तरह अनिवार्य है। वहीं खाद्य सामग्री, वैकल्पिक ईंधन सीएनजी आदि के व्यवसायिक उपयोग के लिए मालवाहक ट्रकों को भी रूट परमिट की जरूरत होती है। रास्ते में किसी तरह की आपात स्थिति होने पर वहां के जिला प्रशासन के निर्देश पर रूट को डायवर्ट किया जा सकता है लेकिन गिट्टी, बालू, मिट्टी सहित अन्य खनन संबंधी सामान से लदे वाहन को अपने रूट परमिट में बदलाव के लिए परिवहन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। जानकारी के मुताबिक भागलपुर के रास्ते कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल जैसे जिलों के लिए दर्जनों मालवाहक ट्रक भागलपुर में ही फंसा हुआ है। हलांकि कुछ मालवाहक वाहन वाया मुंगेर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई। अब भी कई वाहन बीच रास्ते में ही फंसा हुआ है। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि यूपी व राजस्थान से मंगाए जाने वाले सामान भागलपुर पहुंचने के तीन बाद भी नहीं मिल पाई है। सामान लदा ट्रक व अन्य वाहन वाया मुंगेर तीसरे दिन भी नहीं पहुंच पाई है। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने का असर व्यापारिक कारोबार भी हो रहा है।
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