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जर्जर पुल -- भदैया टोला जाने वाली सड़क मार्ग दो आर सी सी पुल हुआ जर्जर

जर्जर पुल -- भदैया टोला जाने वाली सड़क मार्ग दो आर सी सी पुल हुआ जर्जर जर्जर पुल -- भदैया टोला जाने वाली सड़क मार्ग दो आर सी सी पुल हुआ जर्जरजर्जर पुल

Tue, 5 May 2026 10:05 PMNewswrap हिन्दुस्तान, कटिहार
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जर्जर पुल -- भदैया टोला जाने वाली सड़क मार्ग दो आर सी सी पुल हुआ जर्जर

समेली,एक संवाददाता समेली प्रखंड के मुरादपुर पंचायत अंतर्गत डुमरिया चौक से भदैया टोला जाने वाली सड़क और दो पुल की स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है। पिछले कई महीनों से सड़क लगातार उबड़-खाबड़ और गड्ढों में तब्दील हो गया है। जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालत ऐसी है कि इस मार्ग पर हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जबकि सड़क और पुल निर्माण हेतु 10 माह पूर्व शिलान्यास किए जाने के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ।

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भदैया टोला का महत्व

भदैया टोला जो कटिहार-पूर्णिया की सीमा पर कोसी नदी के किनारे स्थित कटिहार जिले की सीमा का अंतिम गांव है। ग्रामीणों की लंबी मांग के बाद सड़क और पुल का निर्माण तो हुआ लेकिन अब इनके रखरखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही है।

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सड़क और पुल की स्थिति

करीब 17.75 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर दो पुल भी बने हैं जो आज बदहाल स्थिति में हैं। यह मार्ग न केवल भदैया टोला बल्कि पूर्णिया जिले के 10 से 15 गांवों को भी जोड़ता है। इसी रास्ते से लोग पूर्णिया जिला के बघवा, टीकापट्टी, डुमरी बाजार, सपाहा, नंदगोला और बैरिया जैसे गांवों के लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब हालत का असर बड़े इलाके की आवाजाही पर पड़ रहा है।

निर्माण कार्य में देरी

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस मार्ग पर दो उच्च स्तरीय आरसीसी पुल के निर्माण के लिए वर्ष 2025 में बरारी विधायक विजय सिंह द्वारा शिलान्यास किया गया था। शिलान्यास बोर्ड के अनुसार 718.33 लाख की लागत से 96.84 मीटर और 461.75 लाख की लागत से 58.12 मीटर लंबाई के पुल एप्रोच पथ सहित बनाए जाने हैं। कार्य प्रारंभ की तिथि 12 जून 2025 अंकित है, लेकिन शिलान्यास के महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक की लापरवाही के कारण काम शुरू नहीं हो रहा है। जबकि मौजूदा सड़क और पुल दिन-प्रतिदिन और जर्जर होते जा रहे हैं। आने वाले बरसात में इस मार्ग के फिर से बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने और सड़क-पुल की मरम्मत कराने की मांग तेज कर दी है, ताकि क्षेत्र की बड़ी आबादी को राहत मिल सके।

जर्जर पुल-- कुरसेला

मेंटेनेंस के सहारे चल रहा एनएच-31 का कोसी सड़क पुल

विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद कुरसेला के पुल पर उठे सवाल

कुरसेला, निज प्रतिनिधि

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का हिस्सा टूटकर गंगा में समाने की घटना के बाद अब क्षेत्र के पुराने पुलों की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। इसी क्रम में एनएच-31 पर कुरसेला स्थित कोसी सड़क पुल एक बार फिर चर्चा में है, जो पिछले छह दशकों से अधिक समय से लगातार भारी यातायात का दबाव झेल रहा है। 1962 में निर्मित यह पुल आज भी अपनी क्षमता से अधिक भार वहन कर रहा है। हालांकि, पुल की मजबूती का आधार अब नियमित मेंटेनेंस ही बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि समय-समय पर मरम्मत और निगरानी के कारण ही यह पुल अब तक चालू स्थिति में बना हुआ है। बताया जाता है कि वर्ष 2019 में पुल के एक स्पैन में करीब 6 इंच तक धंसाव हो गया था। उस समय धंसने की वजह वायरिंग टूटना बताया गया था। इस घटना के बाद करीब एक महीने तक आवागमन बाधित रहा, जिससे एनएच-31 पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया था। बाद में मरम्मत कार्य के जरिए पुल को फिर चालू किया गया। साल 2025 में पुल की रेलिंग क्षतिग्रस्त होने की घटना भी सामने आई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। हालांकि, समय रहते मरम्मत कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर लगातार भारी वाहनों का दबाव बना रहता है, जिससे इसकी संरचना पर असर पड़ना स्वाभाविक है। बावजूद इसके, अब तक किसी बड़े हादसे से बचाव केवल नियमित मेंटेनेंस के कारण ही संभव हो पाया है। विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पुराने पुल का उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (ऑडिट) कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके। फिलहाल, एनएच-31 का यह कोसी सड़क पुल मेंटेनेंस के सहारे चल रहा है, लेकिन इसकी बढ़ती उम्र और लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए अब ठोस और दीर्घकालिक समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है।

यातायात में बाधा

फोटो कैप्शन। कटिहार- 05 एनएच 31 कोसी पुल पर आवागमन करते वाहन (फाइल फोटो)

बढ़ी परेशानी--- मरीजों,किसानों और व्यापारियों को भागलपुर जाने में भारी परेशानी

विक्रमशिला सेतु का पाया टूटा,बरारी क्षेत्र में आवागमन ठप

बरारी। संवाद सूत्र

बरारी प्रखंड के सैकड़ों व्यवसायियों, किसानों और मरीजों को काढ़ागोला से भागलपुर जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे विक्रमशिला सेतु का 133 नंबर पाया अचानक टूटकर गंगा नदी में समा गया। जिसके बाद इस महत्वपूर्ण पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसारयह पुल बरारी और आसपास के क्षेत्रों के लिए भागलपुर से संपर्क का मुख्य साधन था। पुल बंद होने से दैनिक जीवन पर गहरा असर पड़ा है।

प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता

बरारी प्रखंड के अजय मेहता, मनोज कुमार साह, अवधेश यादव और भगवान सिंह समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने मरीजों को इलाज के लिए भागलपुर ले जा रहे थे। लेकिन पुल टूटने की खबर मिलने के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं कई यात्री भागलपुर जाने के लिए काढ़ागोला रेलवे स्टेशन पहुंच चुके थे। लेकिन पुल क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही उन्हें मायूस होकर वापस घर लौटना पड़ा।

किसानों और व्यापारियों का कहना है कि इस मार्ग के बंद होने से माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी। जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। ताकि आवागमन सुचारू हो सके और लोगों को राहत मिल सके। साथ ही पुल की मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की भी अपील की गई है।प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।लेकिन उम्मीद जताई जा रही है।कि जल्द ही स्थिति को सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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