वोटर लिस्ट रिवीजन के विरोध में जेडीयू सांसद, बोले- चुनाव आयोग ने जबरदस्ती थोप दिया
बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) पर अब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के सांसद गिरधारी यादव ने आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना किसी व्यावहारिक ज्ञान के मतदाता गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को जबरदस्ती थोप दिया।

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट रिवीजन पर काफी हंगामा हो रहा है। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के सांसद ने ही चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए हैं। बांका से जेडीयू सांसद गिरधारी यादव ने बुधवार को आरोप लगाया कि आयोग ने बिना किसी व्यावहारिक ज्ञान के हम पर मतदाता गहन पुनरीक्षण जबरदस्ती थोप दिया है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए वोटर लिस्ट रिवीजन की समय सीमा पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस प्रक्रिया के लिए कम से कम 6 महीने का समय मिलना चाहिए।
नई दिल्ली में लोकसभा के मॉनसून सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे जेडीयू सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग को बिहार के इतिहास और भूगोल का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। वोटर लिस्ट रिवीजन के लिए दस्तावेज जमा करने की एक महीने की समय सीमा अव्यावहारिक है। गिरधारी कहा कि उन्हें खुद अपने दस्तावेज इकट्ठा करने में 10 दिन लग गए।
सांसद ने बिहार से बाहर रहने वाले प्रवासी मतदाताओं को मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण में हो रही परेशानी को बताया। गिरधारी यादव ने कहा, "मेरा बेटा अमेरिका में रहता है। वह सिर्फ एक महीने में साइन कैसे करेगा? यह (एसआईआर) हम पर जबरदस्ती थोपा गया है। इसके लिए कम से कम 6 महीने का समय दिया जाना चाहिए था।"
हालांकि, जेडीयू सांसद ने इसे अपनी निजी राय करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस पर क्या कह रही है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। मगर यही सच्चाई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह सच नहीं बोल सकते हैं तो फिर सांसद क्यों बने।
बता दें कि चुनाव आयोग ने 22 साल बाद पिछले महीने बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) शुरू किया था। इसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। साल 2004 की वोटर लिस्ट के बाद के सभी मतदाताओं को अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए आयोग को दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। इसके बाद नई वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इसकी समयसीमा और दस्तावेजों को लेकर कई सवाल उठाए। सड़क से लेकर सदन तक हंगामा हुआ। सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के नेता वोटर लिस्ट रिवीजन को सही बता रहे हैं। हालांकि, नीतीश की पार्टी के सांसद द्वारा इस पर सवाल उठाए जाने से अब सियासी पारा और गर्मा गया है।




साइन इन