क्या बेटे गुंजन की हत्या के अनसुलझे केस और गोपाल खेमका के मर्डर में कोई कनेक्शन है?
बिहार के बड़े व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या के बाद 2018 में उनके बेटे गुंजन खेमका की इसी तरह अपनी फैक्ट्री के गेट पर हत्या का अनसुलझा केस फोकस में आ गया है। पुलिस ने तब एक शूटर को पकड़ कर छुट्टी मान ली थी, जो बाद में मारा गया।

क्या 20 दिसंबर 2018 को हाजीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में बिहार भाजपा के लघु उद्योग सेल के संयोजक रहे गुंजन खेमका की हत्या का केस पुलिस अगर सुलझा लेती तो 4 जुलाई 2025 को गुंजन के पिता और बिहार के बड़े व्यापारी गोपाल खेमका की जान बच जाती? व्यापारी वर्ग की जुबान पर सवाल है कि पुलिस ने गुंजन मर्डर केस में शूटर को पकड़ा, लेकिन सुपारी देने वाले को क्यों नहीं पकड़ा। जमीन विवाद बताया लेकिन मरवाया किसने, ये बिना बताए केस को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया। ये सवाल हर कोई पूछ रहा है कि क्या गोपाल खेमका की हत्या से बेटे गुंजन खेमका का कोई कनेक्शन है?
गुंजन के पिता गोपाल खेमका की लगभग 7 साल बाद उसी तरीके से पटना में उनके अपार्टमेंट के बाहर शुक्रवार की रात हत्या हो गई है। गुंजन को हाजीपुर में अपनी ही कॉटन फैक्ट्री के गेट पर शूटर ने गोलियों से छलनी कर दिया था। पुलिस ने गुंजन मर्डर केस में अभिषेक कुमार उर्फ मस्तु सिंह और राहुल आनंद उर्फ चीकू को हत्या के डेढ़ महीने दिन बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया था कि मस्तु ने गुनाह कबूल भी लिया है लेकिन मर्डर केस की जांच इससे आगे नहीं गई। जेल से निकलने के बाद मस्तु सिंह भी मारा गया।
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पुलिस ने तब बताया था कि वैशाली में हाइवे के किनारे 13 बीघा जमीन के एक प्लॉट को लेकर विवाद में यह हत्या हुई है। इस जमीन पर अपराधी माफिया की भी नजर थी। गोपाल खेमका के भाई शंकर खेमका ने शनिवार को हिन्दुस्तान को उस जमीन विवाद का नेचर बताया। शंकर ने पुलिस के दावे के हवाले से बताया कि जिन लोगों को लगता था कि वो डरा-धमकाकर आधे या एक चौथाई दाम पर जमीन खरीद सकते हैं, उनको मार्केट रेट पर गुंजन द्वारा जमीन खरीदना नहीं भाया। उन्होंने कहा कि मस्तु सिंह की हत्या के बाद पुलिस ने केस को क्लोज कर दिया कि जिसने मारा वो खत्म हो गया, तो केस खत्म।




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