बिहार राज्यसभा चुनाव: आईपी गुप्ता और ओवैसी की मुलाकात RJD की आफत या तेजस्वी को राहत?
Bihar Rajya Sabha Elections: बिहार में राज्यसभा की 5वीं सीट के लिए जोड़-तोड़ शुरू है। महागठबंधन में शामिल इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के अध्यक्ष आईपी गुप्ता की हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात ने सियासी हलचल तेज कर दी है।

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव से पहले पान-तांती-ततवा की राजनीति कर रहे इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के अध्यक्ष आईपी गुप्ता का हैदराबाद में AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के कार्यक्रम में शामिल होना पटना में राजनीतिक हलचल का कारण बन गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जिसमें खुद गुप्ता भी हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए बिहार से 41 विधायकों का वोट चाहिए, जिसके लिए तेजस्वी को ओवैसी के 5 विधायकों के साथ-साथ मायावती के इकलौते विधायक सतीश यादव के समर्थन की जरूरत है। लेकिन, ओवैसी की AIMIM के बिहार में अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने समीकरण को यह कहकर उलझा दिया है कि क्यों ना उनकी AIMIM का नेता कैंडिडेट बनकर लड़े और तेजस्वी और महागठबंधन उनका समर्थन करे।
ओवैसी की पार्टी के कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर शामिल और सम्मानित होकर पटना लौटे गुप्ता ने कहा था कि एआईएमआईएम के मुखिया ने संसद में तांती-ततवा को आरक्षण का मुद्दा उठाने का भरोसा दिया है। ओवैसी ने सभा में कहा था कि 9 मार्च से संसद का सत्र जब दोबारा शुरू होगा, तब वो पान-तांती-ततवा समाज की आवाज उठाएंगे। गुप्ता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय भी उन्होंने कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु से कहा था कि ओवैसी की पार्टी को साथ रखना चाहिए। ओवैसी के कारण विधानसभा चुनाव में राजद और महागठबंधन को नुकसान के सवाल पर भी गुप्ता ने एआईएमआईएम का बचाव किया और कहा कि सब अपनी राजनीति करते हैं।
राज्यसभा के चुनाव को लेकर ओवैसी से क्या बात हुई, ये तो आईपी गुप्ता ने नहीं बताया, लेकिन यह कहा है कि महागठबंधन राज्यसभा का चुनाव लड़े और वो कोशिश करेंगे कि ओवैसी की पार्टी का साथ उनको मिले। उन्होंने ये माना कि उनका हैदराबाद जाना एक पहल है और कहा कि संबंध बना है और हम चाहते हैं कि महागठबंधन राज्यसभा की एक सीट जीते। अख्तरुल ईमान ने AIMIM का कैंडिडेट और महागठबंधन का समर्थन का राग, आईपी गुप्ता के इन बयानों के बाद छेड़ा है। इसका सीधा संकेत है कि अभी तेजस्वी और ओवैसी की पार्टी के बीच बात नहीं बनी है। आईपी गुप्ता चुनाव में तेजस्वी का तनाव कम करेंगे या टेंशन बढ़ाएंगे, ये कहना मुश्किल है।
बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर पांच सीटों के चुनाव में प्रथम वरीयता के 41 वोट लाकर ही कोई राज्यसभा जा सकता है। तेजस्वी यादव की राजद लड़े या असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, विपक्षी खेमे को अपने 41 के 41 विधायक एकजुट रखने पर ही जीत मिल सकती है। क्योंकि एनडीए कैंप के पास पांचवीं सीट के लिए सिर्फ 3 वोट की कमी है, जिसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के रणनीतिकार क्रॉस वोटिंग या दूसरी वरीयता के वोट डलवाकर आसानी से हासिल कर सकते हैं।
बिहार से राज्यसभा के पांच सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। इसके लिए 16 मार्च को उस हालत में मतदान होगा, जब कोई छठा कैंडिडेट खड़ा हो जाए। संभावना है कि तेजस्वी रिटायर हो रहे राजद के दो सांसद प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह में किसी एक को फिर भेजने के लिए ताकत लगाएं। रिटायर होने वाले बाकी सांसदों में जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के उपेंद्र कुशवाहा रिटायर होने वाले पांचवें सांसद हैं, जो इस भरोसे हैं कि बीजेपी उन्हें फिर से सांसद बना दे।




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